हालांकि सरकार समय-समय पर OTT प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती करती रहती है लेकिन सवाल यह है कि आखिर लोग इसे क्यों देखते हैं। क्या यह केवल जिज्ञासा है, मनोरंजन है या इसके पीछे गहरी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वजहें काम करती हैं?

डिजिटल युग ने मनोरंजन के सारे रास्ते आसान कर दिए हैं। मोबाइल और इंटरनेट के जरिए जानकारी और कंटेंट सिर्फ एक क्लिक दूर है। इसी आसानी ने पॉर्न को भी आम कर दिया है। हालांकि सरकार समय-समय पर OTT प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती करती रहती है लेकिन सवाल यह है कि आखिर लोग इसे क्यों देखते हैं। क्या यह केवल जिज्ञासा है, मनोरंजन है या इसके पीछे गहरी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वजहें काम करती हैं? हालिया रिसर्च ने इस सवाल का विस्तार से जवाब खोजने की कोशिश की गई है।
इंटरनेशनल रिसर्चर्स की टीम ने 276 कॉलेज छात्रों से खुला सवाल पूछा, "आप पॉर्न क्यों देखते हैं?" उनके जवाबों से कुल 78 अलग-अलग कारण सामने आए। इस डेटा का विश्लेषण करके शोधकर्ताओं ने इन कारणों को चार बड़े समूहों में बांटा। इसके बाद दूसरी स्टेज में 322 प्रतिभागियों के आंकड़ों की स्टैटिस्टिकल जांच की गई।
अध्ययन में सबसे बड़ा कारण बढ़ी हुई सेक्स ड्राइव पाया गया। कई प्रतिभागियों ने माना कि वे एक्साइटमेंट, फैंटेसी, जल्दी संतुष्टि या बोरियत दूर करने के लिए पॉर्न देखते हैं। कुछ लोगों ने इसे आदत भी बताया। यह समूह रिसर्च में सबसे प्रभावशाली पाया गया।
दूसरी प्रमुख वजह सेक्सुअल परफॉर्मेंस में सुधार थी। कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि वे पॉर्न को एक तरह के अनौपचारिक लर्निंग टूल की तरह देखते हैं। इससे उन्हें नई चीजें सीखने, तकनीक समझने और अपने पार्टनर के साथ बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलती है। तीसरी वजह सामाजिक प्रभाव से जुड़ी पाई गई। दोस्तों की चर्चा, कंटेंट की क्वालिटी या किसी खास एक्टर की लोकप्रियता कई बार पॉर्न देखने की प्रेरणा बनती है। कुछ लोगों के लिए यह केवल टाइम पास या मनोरंजन का जरिया होता है।
रिसर्च में यह भी पाया गया कि अकेलापन, रिश्तों की कमी, तनाव या उदासी जैसी भावनात्मक स्थितियां भी पॉर्न देखने की वजह बनती हैं। कई प्रतिभागियों ने माना कि यह उन्हें अस्थायी राहत और ध्यान भटकाने में मदद करता है।
शोध में यह भी सामने आया कि जिन लोगों का झुकाव लंबी कमिटमेंट की बजाय कैजुअल रिश्तों की ओर ज्यादा था, वे अक्सर एक्साइटमेंट और सेक्स ड्राइव की वजह से पॉर्न की ओर रुख करते थे। जेंडर के आधार पर भी अंतर दिखा, पुरुषों के स्कोर महिलाओं से थोड़े अधिक थे लेकिन सीखने और परफॉर्मेंस सुधार के मामलों में दोनों समान पाए गए।