भारत में बहुत तेजी से फैल रहा है शुगर डैडी का चलन

शुगर डैडी दिल खोल कर पैसे खर्च कर सकता है और शुगर बेबी को ज़रूरत है पैसों की। यूरोप, यूएस और अफ्रीका में ऐसी लड़कियों की तादाद बढ़ती जा रही है, जो डेटिंग के लिए लडकों के साथ नहीं, बल्कि बूढ़ों के साथ जाना पसंद करती हैं। अब यह प्रचलन भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है।

शुगर डैडी ट्रेंड
शुगर डैडी ट्रेंड
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 04:25 PM
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Sugar Daddy : भारत की संस्कृति तथा सभ्यता का इतिहास वर्षों पुराना है। पश्चिमी देशों में फैल चुके शुगर डैडी (Sugar Daddy) के प्रचलन की आहट पूरे भारत में सुनाई दे रही है। बताया जा रहा है कि शुगर डैडी (Sugar Daddy का प्रचलन भारत में बहुत तेजी के साथ फैल रहा है। शुगर डैडी (Sugar Daddy) वाली सोच तथा यह पश्चिमी पैशन भारत की संस्कृति तथा सभ्यता से बिल्कुल भी मेल नहीं खाता है। ऐसे में भारत में बढ़ते हुए शुगर डैडी (Sugar Daddy) के प्रचलन ने समाज की चिंता बढ़ा दी है।

शुगर डैडी (Sugar Daddy) किसे कहते हैं?

आपको हम यहां विस्तार से बता देते हैं कि शुगर डैडी (Sugar Daddy)किसे कहते हैं। दरअसल शुगर डैडी (Sugar Daddy) का कान्सेप्ट पश्चिमी सभ्यता वाले देशों से शुरू होकर भारत तक आया है। पहले तो शुगर डैडी का प्रचलन भारत के बड़े शहरों तक ही सीमित था। धीरे-धीरे शुगर डैडी वाला प्रवचन भारत के छोटे शहरों तक भी फैल गया है। भारत के तमाम बड़े तथा छोटे शहरों में शुगर डैडी बड़ी संख्या में सक्रिय हैं। भारत के छोटे-बड़े शहरों में शुगर डैडी की संख्या को जानने से पहले शुगर डैडी (Sugar Daddy) को जानना जरूरी है। आखिर कौन होता है शुगर डैडी। हम यहां आपको शुगर डैडी के विषय में विस्तार से बता रहे हैं। शुगर डैडी को जान लेने के बाद आपके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहेगा। आपको बता दें कि शुगर डैडी डेटिंग का एक नया नाम है। भारत में तो डेटिंग शब्द भी नया ही है। Sugar Daddy इसलिए बताते चलें कि अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए स्त्री तथा पुरूष कुछ समय के लिए आपस में मिलते हैं। इस मिलने-जुलने को डेटिंग कहा जाता है। डेटिंग के अनेक तरीके इजाद हुए है। इन्हीं तरीकों में से डेटिंग के एक तरीके का नाम है शुगर डैडी। “शुगर डैडी” एक ऐसा बुजुर्ग होता है जिसके पास खूब धन होता है। इसी धन के बलबूते पर बुजुर्ग अपने से बहुत कम उम्र की लडक़ी के साथ घूमता, फिरता तथा डेटिंग करता है। ऐसे बुजुर्ग को लड़कियां शुगर डैडी (Sugar Daddy) नाम से बुलाती हैं। जो लड़कियां इस प्रकार की डेटिंग करती हैं उन लड़कियों को शुगर बेबी कहा जाता है। डेटिंग का यह नया रूप Sugar Daddy खूब ट्रेंड कर रहा है। जहां एक अमीर, लेकिन उम्रदराज शख़्स रिलेशन रखता है अपने से छोटी लडक़ी से। शुगर डैडी दिल खोल कर पैसे खर्च कर सकता है और शुगर बेबी को ज़रूरत है पैसों की। यूरोप, यूएस और अफ्रीका में ऐसी लड़कियों की तादाद बढ़ती जा रही है, जो डेटिंग के लिए लडकों के साथ नहीं, बल्कि बूढ़ों के साथ जाना पसंद करती हैं। अब यह प्रचलन भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है। 

भारत में शुगर डैडी के साथ ही बढ़ रही हैं शुगर बेबी 

शुगर डैडी (Sugar Daddy) की साथी को शुगर बेबी (Sugar Baby) कहा जाता है। शुगर डैडी (Sugar Daddy) तथा शुगर बेबी के रिश्ते की ख़ासियत है कि यह शॉर्ट टर्म होता है। इसे दोनों तरफ से लिया जाता है एक बिजनेस अथवा धंधे की तरह। अगर शुगर बेबी को कोई दूसरा अमीर आदमी मिलता है और पहले वाले शुगर डैडी के पास समय नहीं है, तो वह शिफ्ट हो जाती है। यह रिश्ता चलता है घंटों के हिसाब से। इसमें तय कर लिया जाता है कि शुगर डैडी को कितने घंटे का साथ चाहिए और किस समय। इससे शुगर बेबी (Sugar Baby) एक ही दिन में कई-कई लोगों के साथ रिलेशनशिप मेंटेन कर पाती है। इस रिलेशनशिप की अवधि इस बात पर भी निर्भर करती है कि शुगर डैडी कितनी जिम्मेदारी संभाल कर चल रहा है शुगर बेबी की। युवा लड़कियां मानती हैं कि उनके साथियों में करीब 24 फ़ीसदी साथियों के शुगर डैडी हैं। एशियन ट्रेंड को देखें, तो शुगर डैडी और शुगर बेबी आपस में सोशल नेटवर्किंग साइट्स और सोशल मीडिया के ज़रिए कनेक्ट होते हैं। दुनियाभर में पॉपुलर ‘शुगर डैडी फॉर मी’ डेटिंग वेबसाइट पर इस समय करीब 5 करोड़ यूजर हैं। आपको बता दें कि इस प्रकार के रिश्तों में शुगर डैडी इसलिए आपसे जुड़ता है, क्योंकि वह अपनी पर्सनल लाइफ से खुश नहीं होता। ऐसे में वह अधिकतर समय अपनी दिक्कतें शेयर करता रहता है। वहीं, शुगर बेबी का काम है उन समस्याओं को सुनना और शुगर डैडी को रिलैक्स करना। इससे फर्क नहीं पड़ता कि लडक़ी ख़ुद किस तरह की मानसिक परेशानी से गुजर रही है। ऐसे रिश्ते में भावनात्मक सहारा नहीं मिल पाता। एकतरफा होता है यह रिश्ता। पैसों से जुड़ा होने की वजह से ज्यादातर केस में शुगर डैडी मल्टीपल रिलेशनशिप में होते हैं। ऐसे में मल्टीपल पार्टनर के साथ सेक्स करने से कई तरह की सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज होने की आशंका बढ़ जाती है। Sugar Daddy भारत में शुगर डैडी तथ शुगर बेबी (Sugar Daddy and Sugar Baby) का चलन नया नया है। समाजशास्त्री बताते हैं कि यह चलन भारत में तेजी से बढ़ रहा है। शुगर डैडी व शुगर बेबी के बढ़ते हुए चलन से भारत में समाज के सभी तबके चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि शुगर डैडी (Sugar Daddy) तथा शुगर बेबी वाला चलन भारतीय सभ्यता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। भारत में रिश्ते-नातों की पवित्रता का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में Sugar Daddy जैसा प्रचलन भारतीय समाज की चिंता का बड़ा कारण बन गया है। कुछ समाजसेवी संगठनों ने शुगर डैडी तथा शुगर बेबी वाले प्रचलन को तुरंत बंद करने की मांग की है।

भारत के छोटे शहरों तक फैल गया है शुगर डैडी का प्रचलन

आपको बता दें कि भारत में शुगर डैडी (Sugar Daddy) का प्रचलन बड़े शहरों में ज्यादा था। धीरे-धीरे शुगर डैडी का प्रचलन भारत के छोटे शहरों तक फैल गया है। भारत की राजधानी दिल्ली की बगल में स्थित नोएडा जैसे शहर में 50 से अधिक शुगर डैडी (Sugar Daddy) सक्रिय हैं। यही हाल दिल्ली-NCR के ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, फरीदाबाद तथा पलवल जैसे शहरों का भी है। शुगर डैडी बनकर मौज-मस्ती करने वाले 58 वर्ष के एक व्यक्ति ने चेतना मंच को बताया कि मौज-मस्ती के लिए शुगर डैडी बनना बहुत अच्छा अनुभव है। उसने बताया कि शुगर डैडी (Sugar Daddy) बनने तथा शुगर बेबी तलाश करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं होती है। शुगर डैडी (Sugar Daddy) बनने के लिए इंटरनेट पर वेबसाइट तथा एप मौजूद हैं। इनमें से सर्वाधिक लोकप्रिय वेबसाइट का नाम “शुगर डैडी फॉर मी” है। इस वेबसाइट के 6 करोड़ से भी अधिक यूजर हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि दुनिया में करोड़ों की संख्या में शुगर डैडी मौजूद हैं। इस वेबसाइट के अलावा “माई शुगर डैडी डॉट कॉम”तथा “शुगर डैडी मीट”आदि विभिन्न नामों से शुगर डैडी (Sugar Daddy) तथा शुगर बेबी बनने के लिए दो दर्जन से अधिक वेबसाइट तथा एप इंटरनेट पर मौजूद हैं। अब आप जान गए हैं कि कौन होता है शुगर डैडी? शुगर डैडी का ट्रेंड भारत में तेजी के साथ फल-फूल रहा है। शुगर डैडी वाला यह चलन बॉयफ्रेंड वाले चलन पर भारी पड़ रहा है। एक समय में बॉयफ्रेंड वाला प्रचलन भी भारत के लिए बिल्कुल नया प्रचलन था। वर्तमान में बॉयफ्रेंड का प्रचलन खूब चल रहा है। इसी प्रकार भविष्य में शुगर डैडी का प्रचलन भी तेजी के साथ बढ़ेगा।   Sugar Daddy

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यह क्या बोल गए NSA अजीत डोभाल, बात तो बड़ी है

यह भी क्यों नहीं पढ़ाते कि लुटेरों का मुकाबला करने के बजाय उस समय हमारा समाज और उसके कर्णधार किन किन कामों में लिप्त थे ? पता नहीं क्यों हम अपने नई पीढ़ी को यह बता कर गौरवान्वित होते रहते हैं कि इतिहास में हमने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया?

NSA अजीत डोभाल
NSA अजीत डोभाल
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 03:15 PM
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Ajit Doval : भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी वही सब दोहराने लगे जो सांप्रदायिक मानसिकता वाले नेता जमाने से कहते आ रहे हैं। दिल्ली के एक कार्यक्रम में भारत के NSA अजीत डोभाल भारत द्वारा कभी किसी देश पर हमला न करने और मध्य युग में मंदिरों को तोड़े जाने जैसी बातें दोहराकर युवाओं का आह्वान कर गए कि युवा अपने अंदर आग पैदा करें और इतिहास की दर्दनाक घटनाओं का प्रतिशोध लें । अब इसे देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या कहें कि जो बातें इतने बड़े अधिकारी ने कहीं वही सब हमारे स्कूलों में बच्चों को भी पढ़ाई जा रही हैं । बेशक विदेशी हमलावरों ने भारतीय मंदिर तोड़े थे, इससे तो किसी को इनकार ही नहीं है मगर इस जानकारी के साथ साथ ही हम अपनी नई पीढ़ी को यह भी क्यों नहीं बताते कि क्यों उस दौर में देश का सारा खजाना नागरिकों के पास नहीं वरन मंदिरों में जमा था, जिसे लूटने हमलावार आए थे ? यह भी क्यों नहीं पढ़ाते कि लुटेरों का मुकाबला करने के बजाय उस समय हमारा समाज और उसके कर्णधार किन किन कामों में लिप्त थे ? पता नहीं क्यों हम अपने नई पीढ़ी को यह बता कर गौरवान्वित होते रहते हैं कि इतिहास में हमने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया? भारतीय इतिहास की बाबत हजारों बार बोले गए इसी झूठ को अब एक राजनीतिक एजेंडे के तहत जब NSA अजीत डोभाल जैसे लोग बदले की भावना के आह्वान के साथ युवाओं के समक्ष परोसते हैं तो वाकई दुख होता है।

जिम्मेदार तत्वों पर बात क्यों नहीं करते?

यकीनन हमारा इतिहास दु:ख, क्लेश, उत्पीडऩ और अमानवीय घटनाओं से भरा हुआ है मगर पता नहीं क्यों हम उसके लिए जिम्मेदार तत्वों पर बात न करके एक अजीब किस्म की नैतिकता का यह चोला ओढ़ लेते हैं कि भारत सदैव एक शांतिप्रिय सभ्यता रही है, जिसने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया। क्या ऐतिहासिक दृष्टि से यह अधूरा और भ्रामक सत्य नहीं है ? यदि भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया तो चंद्रगुप्त मौर्य ने यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित कर किस अफग़़ानिस्तान और आज के पाकिस्तान और बलूचिस्तान को अपने विशाल साम्राज्य में शामिल किया था ? क्यों सम्राट अशोक के समय में मौर्य साम्राज्य की सीमाएँ आज के अफग़़ानिस्तान तक फैली थीं ?

भारत ने भी किया था सीमा विस्तार

क्या इससे भी इनकार किया जा सकता है कि दक्षिण भारत के शासकों ने भारत को एक समुद्री सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित किया था और चोल राजाओं ने 10वीं और 11वीं शताब्दी में समुद्र पार कर श्रीलंका, आज के मलेशिया, इंडोनेशिया,, थाईलैंड, म्यांमार और सिंगापुर क्षेत्र तक अपने सैन्य अभियान चलाए थे । क्या यह केवल व्यापारिक यात्राएँ थीं और उन्होंने वहाँ स्थानीय शासकों को पराजित कर कर-वसूली और प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित नहीं किया गया ? क्या यह भी किताबों में दर्ज नहीं है कि आठवीं सदी में कश्मीर के राजा ललितादित्य ने अपने देश की सीमाओं का विस्तार तिब्बत, मध्य एशिया और ईरान की सीमाओं तक कर लिया था ?आधुनिक काल के महाराजा रणजीत सिंह को क्यों हम भूल जाते हैं जिनके नेतृत्व में सिख साम्राज्य लाहौर, पेशावर, मुल्तान और अफग़़ानिस्तान तक फैला हुआ था । 18वीं शताब्दी में मराठों की सेनाएँ भी तो अटक और अफग़़ान सीमा तक अपना भगवा झंडा फहरा आई थीं। इन सभी तथ्यों का जिक्र करने का अर्थ यह साबित करना कतई नहीं है कि भारत भी एक आक्रामक या विस्तारवादी सभ्यता था बल्कि यह है कि अन्य सभ्यताओं की तरह उस दौर में भारत भी राजनीतिक शक्ति, सुरक्षा और प्रभाव के लिए सैन्य अभियानों का सहारा लेता रहा है । इसी लिए यह कहना कि "भारत ने कभी आक्रमण नहीं किया"  मुझे इतिहास को आदर्शवाद की चादर में ढकने जैसा लगता है। 

सच्चा राष्ट्रबोध मिथकों से नहीं आता

पता नहीं हम कब समझेंगे कि सच्चा राष्ट्रबोध मिथकों से नहीं, बल्कि ईमानदार इतिहासबोध से जन्म लेता है। भारत की महानता उसकी निष्क्रियता में नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, संतुलन और समयानुसार शक्ति प्रयोग में निहित रही है। इतिहास को स्वीकार करना उसे कमज़ोर नहीं, बल्कि अधिक परिपक्व बनाता है। यूं भी हम भारत शब्द के प्रयोग के साथ जिस सीमाओं और उसके भीतर रहने वाले करोड़ों लोगों के बात करते हैं, वह तो संविधान लागू होने के बाद ही अस्तित्व में आया । अपने युवाओं को बदले की भावना से ओतप्रोत करते हुए हम यह स्पष्ट क्यों नहीं करते कि हमें बदला आखिर लेना किससे है ? जिन देशों के तत्कालीन राजाओं ने भारत पर हमले किए , क्या अब हम उनसे बदला ले भी सकते हैं ? क्या यह संभव भी है ? यदि नहीं तो फिर हमारा प्रतिशोध और नफरत किसके खिलाफ होगी ? काश आज ऐसे लोग की आवाज बुलंद हो जो लोगों को बताएं कि राष्ट्र केवल सीमाएं नहीं उसमें बसे लोग भी होते हैं । मगर दुर्भाग्य देखिए कि वही लोग चहुंओर दिखाई पड़ते हैं जो लोगों के आज के सुख दुख की बात ही नहीं करते और बार बार उन्हें इतिहास की भूल भुलैया में भटकाने की कोशिश करते हैं। Ajit Doval


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वर्ष-2026 के बजट में रचा जाएगा नया इतिहास, सरकार तैयार

1 फवरी को रविवार होने के बावजूद वर्ष-2026 के बजट को 1 फरवरी के दिन ही संसद में पेश करने का फैसला किया है। भारत के इतिहास में यह ऐतिहासिक घटना होने जा रही है कि भारत सरकार का बजट रविवार के दिन संसद में पेश किया जाएगा। इस मामले में वर्ष-2026 का बजट नया इतिहास रचने जा रहा है।

1 फरवरी को संसद में पेश होगा बजट
1 फरवरी को संसद में पेश होगा बजट
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar09 Jan 2026 04:16 PM
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Budget 2026 : भारत सरकार की तरफ से वर्ष-2026 का वार्षिक बजट एक नया इतिहास बनाएगा। भारत सरकार की तरफ से केन्द्र वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण वर्ष-2026 का बजट पेश करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। केन्द्र सरकार के अंतरंग सूत्रों ने बताया कि वर्ष-2026 के बजट को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वित्त मंत्रालय की एक बहुत बड़ी टीम बजट-2026 को अंतिम रूप देने में लगी हुई है।

इस खास कारण से ऐतिहासिक होगा वर्ष-2026 का बजट

आपको बता दें कि वर्ष-2026 तक भारत सरकार का बजट फरवरी की आखिरी तारीख यानि 28 अथवा 29 फरवरी को संसद में पेश किया जाता था। वर्ष-2017 के बाद भारत सरकार ने केन्द्रीय बजट को फरवरी की पहली तारीख (1 फरवरी) को पेश करना शुरू कर दिया था। वर्ष-2017 से लगातार केन्द्रीय बजट 1 फरवरी को ही संसद में पेश किया जाता रहा है। वर्ष-2017 के बाद यह पहला मौका है कि जब 1 फरवरी को रविवार का दिन पड़ रहा है। 1 फवरी को रविवार होने के बावजूद वर्ष-2026 के बजट को 1 फरवरी के दिन ही संसद में पेश करने का फैसला किया है। भारत के इतिहास में यह ऐतिहासिक घटना होने जा रही है कि भारत सरकार का बजट रविवार के दिन संसद में पेश किया जाएगा। इस मामले में वर्ष-2026 का बजट नया इतिहास रचने जा रहा है।

क्या-क्या खास होगा वर्ष-2026 के बजट में

संसद में पेश होने तक भारत में बजट की व्यवस्था को गोपनीय रखा जाता है। बजट में क्या-क्या नया होने वाला है इस बात की भनक किसी को भी नहीं लगने दी जाती है। यहां तक गोपनीयता बरती जाती है कि बजट से जुड़े अधिकारियों तथा कर्मचारियों को किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने तक नहीं दिया जाता है। इस कारण से वर्ष-2026 के बजट के विषय में कोई भी भविष्यवाणी केवल कोरी कल्पना ही हो सकती है। अत: हम इस विषय में आपको कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं।

भारत के संविधान में जिक्र तक नहीं है बजट का

बजट की चर्चा चल रही है तो आपको बता दें कि भारत के संविधान में कहीं भी बजट का जिक्र तक नहीं है। भारत के संविधान में बजट की जगह अनुच्छेद 112 में जानकारी तो दी गई है लेकिन इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 112 में बजट को बजट नहीं बल्कि वार्षिक वित्तीय विवरण यानी Annual Financia Statement(AFS) कहा जाता है। इसका अर्थ सरकार की अनुमानित आय (इनकम) और व्यय (खर्च) का एक ब्यौरा है. बताया जाता है कि Annual Financia Statement(AFS) शब्द अंग्रेजों की परंपरा से आया हुआ है, जिसे भारत के संविधान बनाने वालों ने 'वार्षिक वित्तीय विवरण' कहा है। मतलब कि आप कह सकते हैं कि संविधान में लिखित 'वार्षिक वित्तीय विवरण' का ही लोकप्रिय नाम बजट है।

लम्बा इतिहास है बजट शब्द का

बजट शब्द के इतिहास की बात करें तो बजट शब्द का इतिहास एक लम्बा इतिहास है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार बजट शब्द कुछ दशक पहले आया है, लेकिन इसकी यात्रा काफी पुरानी है। सबसे पहले हम यहां बात बजट शब्द के आने की करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शब्द लैटिन के 'बुल्गा'(Bulga) से निकला हुआ है, जिसका अर्थ होता है चमड़े का थैला या बैग। उसके बाद यह फ्रांसीसी रूप में आ गया। मतलब कि लैटिन से फ्रांसीसी में इसे बोजेट (Bougeette) कहा जाने लगा, जिसका अर्थ होता है चमड़े का छोटा थैला. उसके बाद यह शब्द 15वीं शताब्दी में अग्रेजी में एंट्री कर लिया। जी हां, अंग्रेजी में यह पहले बोगेट (Bogget) कहलाया, जो बाद में चलकर बजट (Budget) के रूप में पहचाना गया। भारत में भी इसी बजट शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन देश के संविधान में इस शब्द का जिक्र नहीं है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बजट शब्द कुछ दशक पहले आया है, लेकिन इसकी यात्रा काफी पुरानी है। सबसे पहले हम यहां बात बजट शब्द के आने की करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शब्द लैटिन के 'बुल्गा'(Bulga) से निकला हुआ है, जिसका अर्थ होता है चमड़े का थैला या बैग। उसके बाद यह फ्रांसीसी रूप में आ गया। मतलब कि लैटिन से फ्रांसीसी में इसे बोजेट (Bougeette) कहा जाने लगा, जिसका अर्थ होता है चमड़े का छोटा थैला। उसके बाद यह शब्द 15वीं शताब्दी में अग्रेजी में एंट्री कर लिया। जी हां, अंग्रेजी में यह पहले बोगेट (Bogget) कहलाया, जो बाद में चलकर बजट (Budget) के रूप में पहचाना गया। भारत में भी इसी बजट शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन देश के संविधान में इस शब्द का जिक्र नहीं है।

सबसे अधिक बजट पेश करने के मामले में पीछे है निर्मला सीतारमण

आपको यह नहीं पता होगा कि भारत में सबसे ज्यादा बजट भारत के किस वित्त म़ंत्री ने पेश किए हैं। यदि आप यह मान रहे हैं कि बजट पेश करने के मामले में भारत की वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नम्बर—1 पर हैं तो आप गलत हैं। हम आपको विस्तार से बताते हैं कि भारत में सबसे अधिक बजट पेश करने का रिकार्ड किस नेता के नाम पर दर्ज है। 

मोरारजी देसाई हैं सबसे अधिक बार बजट पेश करने वाले नेता

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम सबसे अधिक बार बजट पेश करने का रिकार्ड मौजूद है। स्व0 मोरारजी देसाई ने अपने जीवन काल में भारत सरकार के 10 बजट पेश किए थे। मोरारजी देसाई के बाद इस कड़ी में दूसरा नम्बर पूर्व वित्त मंत्री पी.0 चिदम्बरम ने 9 बार भारत का केन्द्रीय बजट संसद में पेश किया था। इस मामले में तीसरा नम्बर प्रणव मुखर्जी का है उन्होंने 8 बार बजट पेश किया था। वर्ष—2025 का बजट पेश करके वर्तमान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण प्रणव मुखर्जी जी बराबरी कर ली थी। निर्मला सीतारमण वर्ष 2026 का बजट पेश करके 9 बार बजट पेश करने वाली वित्त मंत्री बन जाएंगी। Budget 2026

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