Year Ender 2021: साल 2021 तो बीत गया, क्या ये बातें कभी भूल पाएंगे हम!
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 12:53 AM
सिंघु बॉर्डर
साल 2021 की शुरुआत के साथ ही देश ने किसानों के गुस्से को आंदोलन का रूप लेते हुए देखा। किसान, तीन नए कृषि कानूनों को समाप्त करने की मांग पर अड़ चुके थे।
सरकार और किसानों के बीच कटुता 26 जनवरी 2021 को चरम पर पहुंच गई। लाल किले सहित दिल्ली की सड़कों पर सिर्फ किसानों के ट्रैक्टर दौड़ते दिख रहे थे और इनके सामने पुलिस व सुरक्षा बल नतमस्तक थे।
सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) और शाहीन बाग (Shaheen Bagh) की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हो रही थी। लोग भूल गए कि दिल्ली में लाल किला और कुतुब मीनार भी है। फरवरी-मार्च के बीच जब किसान आंदोलन अपने चरम पर था उसी दौरान बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा हुई।
डेल्टा वैरिएंट
केंद्र सरकार और बंगाल की सरकार का पूरा ध्यान चुनावी अभियान पर था। इस दौरान कोरोना के डेल्टा वैरिएंट (Delta Variant) की खबरें और कोरोना (Corona) के मामले बढ़ने शुरू हो गए थे। दोनों ही सरकारों ने इसकी पूरी तरह अनदेखी की। बंगाल चुनाव के नतीजे आने के साथ ही कोराना की दूसरी लहर का कहर बरसना शुरू हो गया।
श्मशान घाट
दिल्ली एक बार फिर इंटरनेशनल मीडिया के केंद्र में थी। इस बार राजधानी का श्मशान घाट और यहां जल रही सैकड़ों चिताओं की तस्वीरें सरकार की नाकामी की कहानी बयां कर रही थीं।
लखीमपुर खीरी
इतना ही काफी नहीं था। दो अक्टूबर को देश अहिंसा के सबसे बड़े पुजारी महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को याद करते सोया और अगली सुबह जब नींद खुली तो टीवी स्क्रीन पर किसानों को रौंदती हुई एक कार के मंजर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
सिद्धार्थ शुक्ला/आर्यन खान
राजनीति के अलावा क्रिकेट (Cricket) और बॉलीवुड (Bollywood) भारतीयों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। टीवी इंडस्ट्री के उभरते सितारे सिद्धार्थ शुक्ला (Sidharth Shukla) की हार्ट अटैक से मौत ने सिद्धार्थ के फैन्स सहित पूरी इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को सदमे में डाल दिया। उस तस्वीर ने सिद्धार्थ के फैन्स सहित पूरी इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को सदमे में डाल दिया। इसी साल बॉलीवुड के शहंशाह कहे जाने वाले शाहरुख खान (Shahrukh Khan) के बेटे आर्यन खान (Aryan Khan) की ड्रग्स मामले में गिरफ्तारी और रिहाई के पूरे एपिसोड को भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए काले अध्याय के तौर पर याद किया जाएगा।
टी-20 वर्ल्ड कप
पूरे देश को अक्टूबर में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup) में भारत के पहले मैच का इंतजार था। लंबे समय बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीधा मुकाबला हुआ। इस मैच में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हरा दिया। साल 2021 की इस हार को भारतीय क्रिकेट का कोई भी प्रशंसक शायद ही कभी भुला पाएगा।
टीकाकरण
इन बुरी यादों के साथ साल 2021 ने हमें ऐसे कई मौके भी दिए हैं जिन्हें हम अपनी यादों में हमेशा संजोए रखना चाहेंगे। कोरोना की भयावह दूसरी लहर से सीख लेकर भारत ने टीकाकरण (Vaccination) की दिशा में जो उपलब्धि हासिल की है वह भारतीय वैज्ञानिकों और चिकित्सा जगत पर भरोसे को मजबूत करती है। देश की 90% से भी अधिक वयस्क आबादी को कम से कम एक बार टीका लग जाने की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) तक ने की है।
20% की विकास दर
साल 2020 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में भारत की आर्थिक विकास दर -24.4% थी। देश घोर आर्थिक संकट से घिरा हुआ था लेकिन, 2021 की पहली तिमाही में 20.1% के विकास दर को हासिल करके भारत ने वापसी का जो जज्बा दिखाया है वह सराहनीय है।
नीरज चोपड़ा/हरनाज़ संधू
जहां बॉलीवुड से आई बुरी खबरों से मन भारी हुआ वहीं, साल 2021 जाते-जाते मिस यूनिवर्स (Miss Universe) का ताज भारत की बेटी हरनाज़ संधू (Harnaaz Sandhu) के नाम कर गया। 2021 को नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) के गोल्ड मैडल और ओलंपिक (Olympics) में भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए भी याद किया जाएगा।
तालिबान/क्वॉड
इसी साल अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) राज के बाद भारत ने यूएन (UNO) में आतंकवाद का मुखर विरोध किया जबकि, दुनिया के ज्यादात देशों ने इस पर चुप्पी साधे रखी। साथ ही, 2021 में क्वॉड (Quad) में अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के साथ भारत की प्रभावी उपस्थिति ने वैश्विक जगत में देश की प्रतिष्ठा को स्थापित किया है।
मजबूत होता लोकतंत्र
तमाम उतार चढ़ावों के बावजूद, 2021 को लोकतंत्र के तीन स्तंभों (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) के प्रति विश्वास बढ़ाने वाले वर्ष के तौर पर भी याद किया जाएगा।
दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ सख्त रुख, लखीमपुर खेड़ी (Lakhimpur Kheri) की घटना के बाद जांच को अपने हाथ में लेने जैसी घटनाओं ने देश की न्यायपालिका (Judiciary) पर आम जन के विश्वास को मजबूत किया है। लड़कियों की शादी की उम्र को लड़कों के बराबर (21 वर्ष) करने वाले कानून को पास करके विधायिका (Legislative) ने खुद को समय के साथ चलने वाली संस्था के तौर पर स्थापित किया। वहीं, सरकार ने किसानों के विरोध के चलते तीन कृषि कानूनों को वापस लेकर यह बता दिया कि कार्यपालिका (Executive) चाह कर भी जन-भावना की अनदेखी नहीं कर सकती।
साल 2021 जाने को है और कुछ ही घंटों बाद नया साल (2022) दस्तक देने वाला है। नव-वर्ष, दुनिया को महामारी से हमेशा के लिए निजात दिलाने वाली वैक्सीन की खुशखबरी लेकर आए, इसी शुभकामना के साथ, हैप्पी न्यू ईयर!