
Yogi Cabinet 2022 : उत्तर प्रदेश सरकार के नए मंत्रिमंडल के लिए विधायकों से पार्टी कार्यकर्ताओं तक विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। योगी के मंत्रिमंडल में कौन शामिल होगा, यह शाम चार बजे पता चल पाएगा। संभावना जताइ जा रही है कि पुराने मंत्रियों के साथ कई नए विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। इसके साथ ही योगी मंत्रिमंडल में महिलाओं को अधिक तवज्जो मिलने की बात कही जा रही है।
चर्चा है कि करीब चार दर्जन मंत्रियों (कैबिनेट, स्वतंत्र दर्जा प्राप्त और राज्यमंत्री) को शपथ दिलाई जा सकती है। पिछड़ों के ही नेता के रूप में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह का नाम है। सबसे अधिक पिछडे वर्ग के विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने के दावे किए जा रहे हैं। इसमें संगठन से सरकार में में लाने के लिए पार्टी के पास एमएलसी विद्याराम सोनकर और लक्ष्मण आचार्य जैसे दलित नेता भी हैं। है। वहीं दूसरी तरफ चर्चा है कि नई सरकार में अनुसूचित जाति और ओबीसी वर्ग के विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। इसमें अनिल राजभर, रामपाल वर्मा और कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह का नाम लगभग तय है।
मंत्रिमंडल लिस्ट में ये हो सकते हैं शामिल सरिता भदौरिया, अदिति सिंह, जय वीर सिंह, दयाशंकर सिंह, अपर्णा यादव, शलभमणि त्रिपाठी, नितिन अग्रवाल, संजय निषाद, डाक्टर सुरभि, राकेश तिवारी, असीम राय, कुंवर ब्रजेश, रामचंद्र यादव, केतकी सिंह, राजेश त्रिपाठी, आशीष पटेल, पंकज सिंह, विजय बहादुर पाठक और रामचंद्र यादव के नाम शामिल है। पूर्व आईपीएस राजेश्वर सिंह और पूर्व आईपीएस असीम अरुण के अलावा पूर्व आईएएस एके शर्मा के भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की बात कही जा रही है। योगी सरकार में महिलाओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। पहले मंत्रिमंडल में जहां यह संख्या चार थी, अब उसे बढ़ाया जाएगा। कांग्रेस उम्मीदवार की जमानत जब्त कराने वालीं बेबी रानी मौर्य को मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं प्रतिभा शुक्ला, कृष्णा पासवान और अंजुला माहौर का नाम भी चर्चा में है। ब्रजेश पाठक, आशुतोष टंडन, सिद्धार्थनाथ सिंह, नंदगोपाल नंदी, राम पाल वर्मा, सूर्य प्रताप शाही, श्रीकांत शर्मा सतीश महाना आदि के नाम हर वायरल लिस्ट में शामिल है।
संभावना यह भी है कि यदि पार्टी आगरा ग्रामीण से विधायक बनीं उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबीरानी मौर्य को डिप्टी सीएम बनाने की बजाए विधानसभा अध्यक्ष बना दे और दिनेश शर्मा उसी पद पर रहें तो प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी दलित नेता को दी जा सकती है। योगी मंत्रिमंडल के अंतिम विस्तार में राज्यमंत्री बनाए गए संजीव गोंड अनुसूचित जनजाति से हैं, जो फिर विधायक बने हैं। इन्हें भी फिर मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय माना जा रहा है।