
Yogi Cabinet 2022 : उत्तर प्रदेश में फिर से भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है। योगी के पुराने मंत्रिमंडल में शामिल 11 मंत्री चुनाव हार चुके हैं तो कई नए युवा चेहरे और महिलाएं हैं जो ऐतिहासिक जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे है। योगी के मंत्रिमंडल के स्वरूप को लेकर पिछले दो दिनों से दिल्ली में खांका खींचा जा रहा था। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार सरकार में जहां नए चेहरे दिखायी देंगे वहीं दूसरी तरफ संगठन में भी बदलाव तय माना जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के सरकार में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं जिससे प्रदेश अध्यक्ष को लेकर नए नामों की चर्चा भी शुरू हो गई है। सूत्रों की माने तो इस बार योगी का मंत्रिमंडल का गठन, मिशन 2024 को ध्यान में रखकर किया गया है।
चुनाव में जीत के बाद अब ये अटकलें लगाई जा रही है कि कौन योगी के मंत्रिमंडल में शामिल होगा और कौन बाहर होगा। संगठन में क्या बदलाव होंगे। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के रहते भाजपा को जो जीत मिली है क्या इसका लाभ उन्हें मिलेगा और वो डिप्टी सीएम की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहेंगे। ऐसी चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश अध्यक्ष थे। भाजपा को शानदार जीत मिली थी जिसका इनाम उन्हें मिला था और सरकार में डिप्टी सीएम की कुर्सी मिली थी। हालांकि इस बार वह चुनाव हार गए हैं जिससे उनके राजनीतिक कद को बड़ा धक्का लगा है। बहरहाल अब क्या केशव की तरह ही स्वतंत्र देव सिंह को भी डिप्टी सीएम की कुर्सी मिलेगी। इस पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।
ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि स्वतंत्र देव को सरकार में बड़ी भूमिका मिल सकती है। हालांकि स्वतंत्र देव सिंह योगी की पिछली सरकार में भी परिवहन मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। क्या इस बार वह डिप्टी सीएम बनेंगे, इसका जवाब 25 मार्च को मिल जाएगा। लेकिन एक बात तो तय है कि यदि स्वतंत्र देव सिंह संगठन में गए तो फिर भाजपा को अपने नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश में जुटना होगा। भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा।
अटकलें लगाईं जा रही हैं कि योगी की सरकार में डिप्टी सीएम रह चुके डॉ. दिनेश शर्मा को सरकार से हटाकर संगठन में लाया जाएगा और उन्हें प्रदेश की कमान सौंपी जा सकती है। दिनेश शर्मा भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में यूपी का प्रदेश अध्यक्ष उनके लिए कितना मुफीद साबित होगा यह तो समय बताएगा, लेकिन दिनेश शर्मा के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी की चर्चा भी जोरों पर हैं। उन्हें संगठन या सरकार में बड़ी भूमिका दी जा सकती है।
भाजपा के भीतर योगी आदित्यनाथ का एक ऐसे नेता के रूप में उभरना जो अपनी हिंदुत्व छवि और विकास के दम पर यूपी में दोबारा सरकार बनाने में कामयाब रहे। योगी ने खुद के लिए मजबूत जनादेश प्राप्त करने से पार्टी में भी समीकरण बदल सकते हैं।