Jalvayu Vihar Case] Noida : नोएडा। शहर के पॉश सेक्टरों में शुमार जलवायु विहार की चारदीवारी घटिया निर्माण सामग्री की वजह से भरभरा कर गिरी और चार मजदूरों की जिंदगी खत्म हो गई। यह सेक्टर पहले भी घोटालों की जद में रहा है, जिसकी जानकारी नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग को है। इस घोटाले से जुड़ा एक दस्तावेज चेतना मंच के पास मौजूद है।
Jalvayu Vihar Case :
इस शहर को बसाने के लिए एएफएनएचबी का सहारा लिया गया था। यह संस्था सैन्य कर्मचारियों और अधिकारियों के आवास के लिए बनी एक हाउसिंग सोसाइटी के रूप में काम करती है। सेक्टर 21, 25, 28, 29 और 37 आर्मी सेक्टर घोषित है। जलवायु विहार रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन लंबे समय से घोटालों की जद में है। यहां एक अधिकारी ने नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई है।
Jalvayu Vihar Case :
सूत्र बताते हैं कि 8000 वर्गमीटर जमीन प्राइमरी स्कूल के लिए प्राधिकरण की ओर से आरक्षित की गई है। एएफएनएचबी के कर्ताओं ने इस जमीन पर अवैध रूप से न केवल पार्किंग बनाई, बल्कि पार्किंग को पैसे लेकर आवंटित भी कर दिया। करोड़ों रुपये के इस घपले की शिकायत नोएडा प्राधिकरण से कई वर्ष पूर्व की गई थी, लेकिन भ्रष्टाचार की नींव इतनी गहरी है कि इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। नाम न छापने के अनुरोध के साथ एक निवासी ने बताया कि यहां कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों ने एक गिरोह बना लिया है, जिसकी आड़ में भ्रष्टाचार का नंगा खेल चल रहा है। इसी का परिणाम है कि इस सेक्टर की सुरक्षा के नाम पर बनाई गई चारदीवारी घटिया निर्माण सामग्री की वजह से भरभरा कर गिर गई और 4 लोग काल के गाल में समा गए। हालांकि नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऋतु महेश्वरी ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन करने का दावा किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक की सरकार के दौरान हुए इस भ्रष्टाचार के मामले में क्या निर्णय होगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
यह है मामला :
बीके विश्नोई नामक व्यक्ति ने 27 फरवरी 2019 को एक शिकायत नोएडा प्राधिकरण से की, जिसकी जांच करने के बाद नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग ने विशेष कार्याधिकारी को बताया कि 8000 वर्गमीटर जमीन लेआउट प्लान में प्राइमरी स्कूल के लिए आवंटित की गई है। यह जमीन क्यू और बी पॉकेट के पास है, लेकिन एएफएनएचबी ने इस पर अवैध रूप से पार्किंग बनाकर उन्हें बेचने का काम किया है। इसलिए इनके विरूद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसी सेक्टर के निवासी पूर्व सैन्य अधिकारी आरिफ रजा ने चेतना मंच को बताया कि यह कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार कर रहे हैं। इस निर्माण कार्य में भी इसी भ्रष्टाचार की परतें खुली हैं। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। घटिया निर्माण सामग्री लगाने वाले और उनसे कमीशन खाने वालों की भी जांच और कार्रवाई हो। तभी भ्रष्टाचार करने वालों को नसीहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलेगा।