10वीं पास अब्दुल अलीम ने बिना किसी कॉलेज डिग्री के सिक्योरिटी गार्ड से Zoho में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने तक का प्रेरणादायक सफर तय किया। जानिए कैसे मेहनत, सीखने की लगन और सही मार्गदर्शन ने उनकी किस्मत बदल दी।

भारत में ज्यादातर छात्र सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के लिए 12वीं के बाद बीटेक या अन्य इंजीनियरिंग कोर्स का रास्ता चुनते हैं। हालांकि, कुछ कहानियां यह साबित करती हैं कि सफलता केवल डिग्री के सहारे ही नहीं मिलती। तमिलनाडु के रहने वाले अब्दुल अलीम की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायक मिसाल है। उन्होंने केवल 10वीं तक पढ़ाई की, लेकिन अपनी मेहनत, सीखने की इच्छा और सही मार्गदर्शन की बदौलत Zoho Corporation में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपनी पहचान बनाई। आज वह कंपनी में मेंबर ऑफ टेक्निकल स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं।
अब्दुल अलीम ने 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश शुरू कर दी। वह सिर्फ 1000 रुपये लेकर घर से निकल पड़े। कुछ साल पहले सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने बताया था कि जब वह चेन्नई पहुंचे तो उनके पास मौजूद 1000 रुपये में से 800 रुपये खर्च हो गए थे। नौकरी नहीं मिलने की वजह से उन्हें करीब दो महीने तक सड़क पर रहकर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्हें Zoho Corporation में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई। उस समय शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यही कंपनी आगे चलकर उनकी जिंदगी बदल देगी।
अब्दुल अलीम ने बताया था कि स्कूल के दिनों में उन्होंने थोड़ी-बहुत HTML सीखी थी, लेकिन कॉलेज की डिग्री नहीं होने के कारण उनके पास तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर नहीं थे। Zoho में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के दौरान कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी शिबू की नजर उन पर पड़ी। बातचीत के दौरान अलीम ने उन्हें अपनी पढ़ाई और कंप्यूटर में रुचि के बारे में बताया। इसके बाद शिबू ने उनसे पूछा कि क्या वह आगे सीखना चाहते हैं। अलीम ने तुरंत हां कह दिया और यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
शिबू के मार्गदर्शन में अब्दुल अलीम ने करीब आठ महीने तक तकनीकी प्रशिक्षण लिया। इस दौरान उन्होंने लगातार नई चीजें सीखीं और एक एप्लिकेशन तैयार करने में सफलता हासिल की। उनका बनाया हुआ ऐप देखकर शिबू काफी प्रभावित हुए और उन्होंने इसे अपने मैनेजर को दिखाया। एप्लिकेशन पसंद आने के बाद अलीम को उनके तकनीकी कौशल के आधार पर टेक्निकल पद के लिए इंटरव्यू का मौका मिला।
अब्दुल अलीम का यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। वह रोजाना 12 घंटे सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी करते थे। इसके बावजूद ड्यूटी खत्म होने के बाद भी रुककर कोडिंग सीखते और अपनी तकनीकी जानकारी को बेहतर बनाने में जुटे रहते थे। उन्होंने न तो किसी इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की और न ही किसी डिग्री प्रोग्राम का सहारा लिया। उनके पास केवल सीखने की लगन, लगातार मेहनत और सही मार्गदर्शन था, जिसने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।
अब्दुल अलीम ने बाद में बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें टेक्निकल इंटरव्यू देने का मौका मिलेगा। उन्हें हमेशा लगता था कि बिना इंजीनियरिंग डिग्री के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना संभव नहीं है। लेकिन उनके कौशल और मेहनत ने इस सोच को गलत साबित कर दिया। इंटरव्यू में उनके प्रदर्शन के बाद उन्हें कंपनी की तकनीकी टीम में शामिल होने का अवसर मिला।
साल 2014 में अब्दुल अलीम ने Zoho की तकनीकी टीम में इंजीनियरिंग ट्रेनी के रूप में काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने लगातार नई तकनीकों को सीखा, अपने कौशल को बेहतर बनाया और कंपनी के कई प्रोडक्ट्स के विकास में योगदान दिया। आज वह Zoho Corporation में मेंबर ऑफ टेक्निकल स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं और एक दशक से अधिक समय से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अब्दुल अलीम की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सफलता केवल डिग्री से तय नहीं होती। अगर किसी के पास सीखने की इच्छा, मेहनत करने का जज्बा और सही समय पर सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वह कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी पीछे छोड़ सकता है। सिक्योरिटी गार्ड से सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने तक का उनका सफर आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
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