अग्निवीरों के लिए सरकार के नए एग्जिट प्लान की पूरी जानकारी। जानिए 25 प्रतिशत अग्निवीरों की स्थायी नौकरी, 75 प्रतिशत के लिए रोजगार और जनवरी 2027 में सेवामुक्त होने वाले पहले बैच से जुड़ी अहम बातें।

अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार एक ऐसा एग्जिट प्लान तैयार कर रही है, जिसके तहत चार साल की सेवा पूरी होने से पहले ही उनके आगे की नौकरी का रास्ता साफ करने की तैयारी है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को सेना में ही स्थायी तौर पर रखने की प्रक्रिया सेवा अवधि पूरी होने से पहले पूरी की जा सकती है। वहीं, बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए अर्धसैनिक बलों, पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। अग्निपथ योजना के तहत सेना में अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल की होती है। इस अवधि के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेवा से मुक्त किया जाता है। अब सरकार की कोशिश बताई जा रही है कि सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों को आगे की नौकरी के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अग्निवीरों के लिए तैयार किए जा रहे एग्जिट प्लान में सबसे बड़ा बदलाव 25 प्रतिशत अग्निवीरों के चयन की प्रक्रिया को लेकर है। पहले ऐसी योजना बताई गई थी कि चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अग्निवीरों को बाहर किया जाएगा और इसके बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों की दोबारा बहाली की जाएगी। अब इस प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी है। नई व्यवस्था के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों की योग्यता सूची चार साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही जारी करने की योजना है। इसके लिए आंतरिक परीक्षा कराई जाएगी और उसके आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि जिन अग्निवीरों को सेना के नियमित कैडर में बनाए रखा जाना है, उन्हें सेवा अवधि खत्म होने से पहले ही उनके चयन के बारे में जानकारी मिल सके।
अग्निपथ योजना में पहले से ही यह प्रावधान है कि चार साल की सेवा पूरी करने के बाद 25 प्रतिशत तक अग्निवीरों को भारतीय सेना के नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है। अब सरकार की ओर से इस प्रक्रिया को सेवा अवधि पूरी होने से पहले पूरा करने की तैयारी की जानकारी सामने आई है।
इसके लिए आंतरिक परीक्षा और मेरिट के आधार पर योग्य अग्निवीरों का चयन किया जाएगा। यानी चार साल पूरे होने के बाद चयन प्रक्रिया शुरू करने के बजाय इसे पहले ही पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
चार साल की सेवा के बाद 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेवामुक्त किया जाएगा। सरकार की योजना इन अग्निवीरों को आगे रोजगार उपलब्ध कराने की भी है। इसके लिए अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों और अन्य सरकारी विभागों में उपलब्ध अवसरों का इस्तेमाल किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, गृह मंत्रालय के एक विशेष पोर्टल के माध्यम से अर्धसैनिक और पुलिस बलों में नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य बताया गया है कि अग्निवीरों की चार साल की सेवा समाप्त होने से पहले ही उनके लिए आगे की नौकरी का रास्ता तय हो जाए।
सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अलग-अलग विभागों में आरक्षण और प्राथमिकता के प्रावधान किए गए हैं। इससे अग्निवीरों को सेना से बाहर आने के बाद सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने में अवसर मिल सकते हैं।
बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और असम राइफल्स में सिपाही और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। साथ ही, उन्हें लिखित परीक्षा, शारीरिक मानक परीक्षण और शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट दिए जाने की जानकारी दी गई है।
अग्निवीरों के लिए रेलवे में भी रोजगार के अवसरों का प्रावधान किया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय रेलवे में पूर्व अग्निवीरों के लिए श्रेणी 2 और उससे ऊपर के पदों में 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण निर्धारित किया गया है। वहीं, श्रेणी 1 के पदों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सेना में चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को आगे सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
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अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाला पहला बैच जनवरी 2023 में शामिल हुआ था। इस बैच में 19 हजार से अधिक अग्निवीर शामिल बताए गए हैं। चार साल की सेवा अवधि पूरी होने के बाद इस बैच के अग्निवीर जनवरी 2027 में सेवामुक्त होने जा रहे हैं।
पहले बैच के सेवामुक्त होने का समय करीब आने के साथ ही अग्निवीरों के लिए आगे की नौकरी और पुनर्वास की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है। इसी को देखते हुए 25 प्रतिशत अग्निवीरों के नियमित कैडर में बने रहने और बाकी 75 प्रतिशत के लिए सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सेवा अवधि खत्म होने से पहले पूरा करने की तैयारी की जा रही है।
चार साल की सेवा पूरी होने के बाद 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना से बाहर होना होता है। ऐसे में उनके सामने आगे रोजगार का सवाल रहता है। सरकार की ओर से बनाए जा रहे एग्जिट प्लान का मुख्य उद्देश्य यही बताया गया है कि सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को आगे रोजगार के लिए नए सिरे से लंबे समय तक इंतजार या तलाश न करनी पड़े।
वहीं, सेना में बनाए जाने वाले 25 प्रतिशत अग्निवीरों की मेरिट पहले जारी होने से उन्हें भी समय रहते अपने भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इस तरह प्रस्तावित व्यवस्था में सेना में नियमित सेवा और सेना के बाहर सरकारी नौकरी, दोनों रास्तों को सेवा अवधि समाप्त होने से पहले स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है।
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अग्निपथ योजना के मौजूदा प्रावधान के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी करने के बाद सभी अग्निवीर सेना में नियमित नहीं रहते हैं। इनमें से 25 प्रतिशत तक अग्निवीरों को नियमित कैडर में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीर सेवामुक्त होते हैं।
अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, सरकार का जोर इस पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरा करने पर है। 25 प्रतिशत अग्निवीरों के चयन के लिए आंतरिक परीक्षा और मेरिट की प्रक्रिया पहले पूरी करने तथा बाकी अग्निवीरों के लिए अर्धसैनिक बलों, पुलिस, रेलवे और अन्य सरकारी सेवाओं में उपलब्ध प्रावधानों के जरिए रोजगार के अवसर देने की तैयारी की जा रही है।
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