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बिहार के सीयूएसबी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सप्तर्षि घोष को केंद्र सरकार की एएनआरएफ से 64 लाख रुपये का शोध अनुदान मिला है। जानिए कैंसर और जेनेटिक रोगों से जुड़ी इस खास रिसर्च की पूरी जानकारी।

बिहार के सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सप्तर्षि घोष को भारत सरकार की अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) से 64 लाख रुपये का शोध अनुदान मिला है। यह अनुदान उन्हें आनुवंशिक यानी जेनेटिक रोगों से जुड़ी नई चिकित्सीय रणनीतियों के विकास पर शोध करने के लिए दिया गया है। डॉ. घोष विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग में कार्यरत हैं और इस परियोजना पर अगले तीन वर्षों तक काम करेंगे।
डॉ. सप्तर्षि घोष का शोध कार्य न्यूक्लिक अम्लों यानी डीएनए और आरएनए में होने वाले संरचनात्मक परिवर्तनों पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि कैंसर और न्यूरोडीजेनेरेटिव यानी तंत्रिका-अपक्षयी रोगों जैसी कई आनुवंशिक बीमारियां मुख्य रूप से डीएनए और आरएनए की संरचना में बदलाव के कारण विकसित होती हैं। इस परियोजना का उद्देश्य ऐसे रोगों से जुड़े संरचनात्मक परिवर्तनों को नियंत्रित करने के लिए रासायनिक मॉड्यूलेटरों का उपयोग करना है।
डॉ. घोष के अनुसार, इस शोध में छोटे अणुओं और लिगैंड्स जैसे केमिकल मॉड्यूलेटर्स की सहायता से न्यूक्लिक अम्लों में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जाएगा। शोधकर्ताओं का प्रयास होगा कि इन रासायनिक तत्वों के माध्यम से बीमारी से जुड़े संरचनात्मक परिवर्तनों को नियंत्रित किया जा सके। इससे भविष्य में आनुवंशिक रोगों के उपचार के लिए नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
एएनआरएफ द्वारा स्वीकृत इस परियोजना को तीन वर्षों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस दौरान डॉ. घोष सीयूएसबी के बायोटेक्नोलॉजी और लाइफ साइंसेज विभाग के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर शोध कार्य करेंगे। यह परियोजना विभिन्न विभागों के सहयोग से संचालित होगी, जिससे शोध को और अधिक व्यापक बनाने में मदद मिलेगी।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी मो. मुदस्सीर आलम ने बताया कि यह शोध न्यूक्लिक अम्लों की संरचनात्मक परिवर्तनशीलता को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। डॉ. घोष का मानना है कि इस परियोजना से स्वदेशी ज्ञान-संपदा का विकास होगा और शोध के परिणाम प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किए जा सकेंगे। साथ ही, शोध से प्राप्त महत्वपूर्ण निष्कर्षों को पेटेंट के रूप में भी संरक्षित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के सफल होने पर जैव-भौतिकी और न्यूक्लिक अम्ल अनुसंधान के क्षेत्र में सीयूएसबी को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने की संभावना है।
इस उपलब्धि पर सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह और कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा ने डॉ. सप्तर्षि घोष को बधाई दी है। वहीं, भौतिक एवं रासायनिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अतुल प्रताप सिंह सहित विभाग के सभी शिक्षकों ने भी डॉ. घोष और उनकी शोध टीम की सराहना की है। विश्वविद्यालय समुदाय ने इसे संस्थान के लिए गर्व की उपलब्धि बताया है।
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