बिहार में बीएसएससी अभ्यर्थियों का गुस्सा बढ़ा। इंटर लेवल परीक्षा, सीजीएल-4 और बीएसओ परीक्षा की तारीख, 26,426 पदों की भर्ती और 25 प्रतिशत वेटेज पर जानें अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें।

बिहार में बिहार कर्मचारी चयन आयोग यानी बीएसएससी की लंबित भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। द्वितीय इंटर स्तरीय परीक्षा, चतुर्थ स्नातक स्तरीय सीजीएल परीक्षा और प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी भर्ती परीक्षा की तारीख घोषित करने की मांग तेज हो गई है। लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थी आयोग से जल्द परीक्षा कराने और भर्ती प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की मांग कर रहे हैं। बीएसएससी की द्वितीय इंटर स्तरीय भर्ती परीक्षा के लिए वर्ष 2023 में आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन अब तक प्रारंभिक परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है। इस भर्ती में रिक्तियों की संख्या बढ़कर 26,426 हो चुकी है। वहीं, इस परीक्षा के लिए करीब 36 लाख आवेदन आने की बात सामने आई है। ऐसे में अभ्यर्थियों को परीक्षा की तारीख का इंतजार है।
दूसरी ओर, चतुर्थ स्नातक स्तरीय सीजीएल परीक्षा और प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी भर्ती परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ रही है। अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग लंबित परीक्षाओं की तारीख जल्द घोषित करे और भविष्य की भर्तियों के लिए नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करे।
बीएसएससी की द्वितीय इंटर स्तरीय भर्ती परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। इस भर्ती के लिए सितंबर 2023 से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके बाद कई बार बदलाव किए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीन वर्षों के दौरान चार बार रिक्तियों की संख्या बढ़ाई गई और दस बार निर्देशों में बदलाव हुआ। इसके बावजूद अब तक प्रारंभिक परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है। परीक्षा ऑफलाइन होगी या ऑनलाइन, इसे लेकर भी अभ्यर्थियों के बीच स्पष्टता नहीं है। इस भर्ती में पदों की संख्या बढ़कर 26,426 हो गई है। वहीं, लगभग 36 लाख आवेदन आने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में परीक्षा की तारीख को लेकर अभ्यर्थियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय तक परीक्षा नहीं होने से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। कई युवा वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा की तारीख तय नहीं होने के कारण उन्हें आगे की योजना बनाने में परेशानी हो रही है।
बीएसएससी की चतुर्थ स्नातक स्तरीय यानी सीजीएल-4 परीक्षा भी अभ्यर्थियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस भर्ती का विज्ञापन अगस्त 2025 में जारी किया गया था। शुरुआत में इस भर्ती के तहत 1,064 पद थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 1,883 हो गई है। इस परीक्षा के लिए करीब 10 लाख अभ्यर्थियों के आवेदन करने की जानकारी दी गई है। बड़ी संख्या में उम्मीदवार परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा की तारीख घोषित नहीं होने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग सीजीएल-4 परीक्षा की तारीख जल्द घोषित करे और भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय के भीतर पूरा करे। उनका कहना है कि परीक्षा में देरी होने से तैयारी के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ता है।
बिहार कर्मचारी चयन आयोग की प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी भर्ती परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों में इंतजार बना हुआ है। इस भर्ती का विज्ञापन मार्च 2025 में जारी किया गया था। इसके तहत कुल 682 पदों पर भर्ती की जानी है। इस परीक्षा के लिए करीब चार लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक प्रारंभिक परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब बड़ी संख्या में युवा आवेदन करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, तो आयोग को परीक्षा की तारीख और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध करानी चाहिए। इससे उम्मीदवारों को अपनी पढ़ाई और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
लंबित भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता उम्र सीमा, पढ़ाई के खर्च और भविष्य को लेकर है। कई उम्मीदवार लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में परीक्षा की तारीख घोषित नहीं होने से उनके सामने आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कोचिंग की फीस, कमरे का किराया और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, परीक्षा कब होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। इससे तैयारी करने वाले युवाओं और उनके परिवारों पर भी दबाव बढ़ता है। एक अभ्यर्थी राहुल कुमार के अनुसार, बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी की समस्या लगातार सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को पढ़ाई के खर्च और परिवार के दबाव के बीच अपनी तैयारी जारी रखनी पड़ती है। कमरे का किराया और महंगाई भी उनकी परेशानियों को बढ़ा रहे हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि बीएसएससी लंबित परीक्षाओं को जल्द आयोजित करे और नई भर्तियों की प्रक्रिया भी समय पर शुरू करे।
बीएसएससी की लंबित परीक्षाओं के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में संविदा कर्मियों को दिए जा रहे 25 प्रतिशत अतिरिक्त अंकों या वेटेज का मुद्दा भी चर्चा में है। कई अभ्यर्थी इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। विरोध कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, संविदा कर्मियों को अतिरिक्त वेटेज दिए जाने से सामान्य अभ्यर्थियों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंता पैदा होती है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि संविदा कर्मियों को दिया जा रहा 25 प्रतिशत वेटेज वापस लिया जाए और भर्ती प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों के लिए समान तथा निष्पक्ष अवसर सुनिश्चित किए जाएं। यह मुद्दा उन अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और चयन प्रक्रिया में समान नियम लागू किए जाने की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की एक प्रमुख मांग बिहार कर्मचारी चयन आयोग यानी बीएसएससी और बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग यानी बीपीएसएससी के लिए नियमित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग को पहले से यह जानकारी देनी चाहिए कि किस भर्ती का विज्ञापन कब जारी होगा, आवेदन की प्रक्रिया कब पूरी होगी और परीक्षा किस समय आयोजित की जाएगी। इससे उम्मीदवार अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर सकेंगे। छात्र नेता दिलीप कुमार ने भी वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया समयबद्ध तथा पारदर्शी होनी चाहिए। परीक्षा आयोजित होने के बाद उत्तर कुंजी भी जल्द जारी की जानी चाहिए। उनके अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के 10 से 12 दिनों के भीतर उत्तर कुंजी जारी करने से अभ्यर्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि आयोग प्रश्नों के किन उत्तरों को सही मान रहा है।
लंबित भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया में सुधार को लेकर अभ्यर्थियों ने कई मांगें उठाई हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इन मांगों पर ठोस कदम उठाए जाने से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और उम्मीदवारों को समय पर जानकारी मिल सकेगी।
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लंबित परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थी सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी मांगें उठा रहे हैं। एक अभ्यर्थी ने मुख्यमंत्री से बिहार की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यापक सुधार करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर उठाई गई मांगों में नियमित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानूनों का पालन, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराना, समय पर उत्तर कुंजी जारी करना, निष्पक्ष जांच और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को यह भरोसा मिलना चाहिए कि भर्ती प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी होगी और चयन निष्पक्ष तरीके से किया जाएगा। एक अन्य अभ्यर्थी ने भी बीएसएससी की लंबित भर्ती परीक्षाओं को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि वर्षों तक परीक्षा का इंतजार करने से युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है और कई उम्मीदवारों की उम्र सीमा समाप्त होने की स्थिति पैदा हो जाती है।
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बिहार में लंबित भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों की मांग अब केवल परीक्षा की तारीख घोषित करने तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि आयोग भर्ती प्रक्रिया को नियमित बनाए और आने वाली परीक्षाओं के लिए भी स्पष्ट समय-सारणी जारी करे। द्वितीय इंटर स्तरीय परीक्षा में 26,426 पद, सीजीएल-4 में 1,883 पद और प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी भर्ती में 682 पद होने के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार इन परीक्षाओं से उम्मीद लगाए बैठे हैं। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन परीक्षाओं की तारीख घोषित किए जाने को लेकर अभ्यर्थियों का इंतजार बना हुआ है। ऐसे में उम्मीदवारों की नजर आयोग की ओर से आने वाली आधिकारिक सूचना पर है। परीक्षा की तारीख, आवेदन से जुड़े निर्देश और भर्ती प्रक्रिया के अगले चरणों की जानकारी के लिए अभ्यर्थियों को बीएसएससी की आधिकारिक घोषणाओं पर ध्यान देना चाहिए। लाखों युवाओं की मांग है कि लंबित परीक्षाओं को जल्द आयोजित किया जाए, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाए और भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऐसा कैलेंडर जारी हो, जिससे उम्मीदवारों को बार-बार अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
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