Delhi Jobs News: DTC में कंडक्टर की कमी दूर करने के लिए नई व्यवस्था लागू, सफदरजंग अस्पताल में 69 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू। जानिए पूरी खबर।

दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए दो बड़े फैसले लिए गए हैं। एक तरफ दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने अपनी बस सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कंडक्टरों की कमी दूर करने की योजना बनाई है, वहीं दूसरी तरफ सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इन दोनों फैसलों से आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में बसों की संख्या बढ़ने और नई व्यवस्थाओं के लागू होने के कारण डीटीसी को बड़ी संख्या में कंडक्टरों की जरूरत महसूस हो रही थी। इस समस्या का समाधान निकालते हुए निगम ने नई भर्ती करने के बजाय मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों को ही ट्रेनिंग देकर कंडक्टर बनाने का फैसला लिया है। इससे समय की बचत होगी और अनुभवी कर्मचारियों का बेहतर उपयोग भी हो सकेगा।
डीटीसी के अनुसार एक अप्रैल से DIMTS के 39 डिपो डीटीसी के अधीन आ जाएंगे। इसके बाद बस संचालन का दायरा और बढ़ जाएगा। इसी वजह से कंडक्टरों की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है।
इस चुनौती से निपटने के लिए डीटीसी ने यह रणनीति बनाई है कि वर्तमान में काम कर रहे कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों को ही कंडक्टर की जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जाएगा। इससे बस संचालन में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी और व्यवस्था भी सुचारू बनी रहेगी।
कंडक्टर के पद के लिए ड्राइवरों को जरूरी प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे नई जिम्मेदारी को सही तरीके से निभा सकें।
डीटीसी ने सभी डिपो मैनेजरों को निर्देश दिए हैं कि वे योग्य कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों की सूची जल्द से जल्द ट्रेनिंग सेंटर को भेजें ताकि प्रक्रिया जल्दी शुरू की जा सके।
दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। स्थायी नियुक्तियां नहीं होने की वजह से फैकल्टी और कंसल्टेंट स्तर के कई पद खाली पड़े हैं। इसका असर मरीजों के इलाज और मेडिकल छात्रों की पढ़ाई दोनों पर पड़ रहा है।
अस्पताल में कुल 632 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से अभी केवल 513 पदों पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं। यानी 119 पद खाली हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए अस्पताल प्रशासन ने 69 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है।
भर्ती किए जाने वाले सहायक प्रोफेसर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएंगे। इनमें मरीजों का इलाज करने के साथ साथ मेडिकल छात्रों को पढ़ाना और रिसर्च कार्यों में मार्गदर्शन देना भी शामिल है।
इन नियुक्तियों को फिलहाल एक वर्ष के लिए किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इससे मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
डीटीसी और सफदरजंग अस्पताल के इन फैसलों का सीधा फायदा दिल्ली के आम नागरिकों को मिलने की उम्मीद है। डीटीसी की नई व्यवस्था से बस सेवाएं अधिक व्यवस्थित होंगी, वहीं अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा।
सरकारी स्तर पर उठाए गए इन कदमों को सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।