दिल्ली यूनिवर्सिटी का साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले दो वर्षों में 2000 से अधिक छात्रों ने इसमें एडमिशन लिया। जानें इस कोर्स की खासियत, क्या सिखाया जाता है और क्यों बढ़ रही है इसकी मांग।

आज के समय में पढ़ाई का बढ़ता दबाव, करियर की चिंता और प्रतिस्पर्धा से भरे माहौल के कारण बड़ी संख्या में छात्र मानसिक तनाव और चिंता का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) का साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले दो वर्षों में इस कोर्स में 2,000 से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यह आंकड़ा बताता है कि अब छात्र केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और संतुलित जीवन को भी उतना ही महत्व देने लगे हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस कोर्स को अपने वैल्यू एडेड कोर्सेज के तहत हैप्पीनेस पोडियम के माध्यम से शुरू किया है। इस कोर्स का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबों तक सीमित ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सकारात्मक तरीके से सामना करना सिखाना भी है।
कोर्स को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्र अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दे सकें, तनावपूर्ण परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखें और अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बना सकें। यही वजह है कि कम समय में इस कोर्स को छात्रों का शानदार रिस्पॉन्स मिला है।
साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स को खुशी के पांच प्रमुख आधारों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें छात्रों को सकारात्मक भावनाएं विकसित करने, अपनी क्षमताओं को पहचानने, परिवार और समाज से बेहतर जुड़ाव बनाने, रिश्तों को मजबूत करने, जीवन के उद्देश्य को समझने और छोटी-छोटी उपलब्धियों का महत्व महसूस करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
इसका मकसद छात्रों को ऐसा दृष्टिकोण देना है, जिससे वे पढ़ाई और व्यक्तिगत जीवन के बीच बेहतर संतुलन बना सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
इस कोर्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इसे शुरुआती चरण में पांच प्रमुख महिला कॉलेजों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया है। इनमें लेडी श्री राम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, इंद्रप्रस्थ महिला कॉलेज, मिरांडा हाउस और दौलत राम कॉलेज शामिल हैं।
इन कॉलेजों की छात्राओं के बीच इस कोर्स को लेकर खासा उत्साह देखा गया है। कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक रटकर पढ़ाई करने के बजाय माइंडफुलनेस, मेडिटेशन, समूह गतिविधियों और खुली चर्चा के माध्यम से छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनने और खुश रहने के तरीके सिखाए जाते हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी का मानना है कि बेहतर शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। छात्रों का मानसिक रूप से स्वस्थ और भावनात्मक रूप से संतुलित होना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के साथ इस कोर्स को तैयार किया गया है, ताकि छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ जीवन की चुनौतियों का भी बेहतर तरीके से सामना कर सकें।
ग्रेजुएशन स्तर पर साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी अब इसके विस्तार पर भी विचार कर रही है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, छात्रों के बीच बढ़ती मांग को देखते हुए भविष्य में इस कोर्स को पोस्ट ग्रेजुएशन और रिसर्च स्तर पर भी एक पूर्ण विषय या डिप्लोमा के रूप में शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।
यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और जीवन कौशल से जुड़े इस विषय का अध्ययन उच्च शिक्षा के स्तर पर भी करने का अवसर मिल सकता है।
पिछले दो वर्षों में 2,000 से अधिक छात्रों का इस कोर्स में रजिस्ट्रेशन इस बात का संकेत है कि आज के युवा पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी का साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स इसी बदलती सोच का उदाहरण बनकर सामने आया है और आने वाले समय में इसकी लोकप्रियता और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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