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चीन की गाओकाओ (Gaokao) परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा मानी जाती है जहां जेल में पेपर प्रिंटिंग और सेना की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण पेपर लीक लगभग नामुमकिन हो जाता है।

भारत में हाल ही में NEET UG परीक्षा से जुड़ी पेपर लीक की खबरों ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली चीन की गाओकाओ परीक्षा चर्चा में है, जहां दावा किया जाता है कि पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन है। यह परीक्षा हर साल लाखों छात्रों के भविष्य का फैसला करती है और इसकी सुरक्षा व्यवस्था को दुनिया की सबसे सख्त परीक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है।
गाओकाओ (Gaokao) परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया बेहद गोपनीय तरीके से की जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार प्रश्नपत्र बनाने के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की एक टीम को एक सुरक्षित और अलग स्थान पर रखा जाता है, जहां उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं होता। इस दौरान उनके मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी पूरी तरह से ले लिए जाते हैं ताकि किसी भी तरह की जानकारी बाहर न जा सके।
इसके बाद प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग जेल जैसी अत्यधिक सुरक्षित जगहों पर की जाती है, जहां निगरानी बेहद सख्त होती है। प्रिंटिंग प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों को भी सख्त नियंत्रण में रखा जाता है और उन्हें परीक्षा खत्म होने तक बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती।
प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी बेहद संवेदनशील होती है। गाओकाओ (Gaokao) परीक्षा में प्रश्नपत्रों को जीपीएस से लैस वाहनों और सशस्त्र सुरक्षा बलों की निगरानी में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में सेना और पुलिस की कड़ी निगरानी रहती है ताकि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक न हो सके। यह व्यवस्था परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाई गई है।
परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों के आसपास सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। कई जगहों पर नो फ्लाई जोन घोषित किया जाता है ताकि ड्रोन या किसी अन्य तकनीकी माध्यम से कोई जानकारी लीक न हो सके। इसके अलावा मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को रोकने के लिए सिग्नल जैमर्स का उपयोग किया जाता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया जाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कैमरों की मदद से परीक्षा केंद्रों पर लगातार निगरानी रखी जाती है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके।
गाओकाओ (Gaokao) परीक्षा चीन की शिक्षा प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर साल लगभग 1.3 करोड़ छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। यह परीक्षा दो दिनों तक चलती है और इसमें मुख्य रूप से चीनी भाषा, गणित और अंग्रेजी जैसे विषय शामिल होते हैं। इस परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही छात्रों को देश की प्रमुख यूनिवर्सिटियों में प्रवेश मिलता है और यही उनके करियर और सामाजिक भविष्य को निर्धारित करता है।
चीन में परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सख्त कानून लागू हैं। नकल करने या संगठित धोखाधड़ी में शामिल पाए जाने पर छात्रों को कई वर्षों तक परीक्षा देने से रोका जा सकता है। वहीं पेपर लीक या गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कठोर सजा का प्रावधान भी बताया जाता है, जिससे इस पूरी परीक्षा प्रणाली में डर और सख्ती बनी रहती है। यही कारण माना जाता है कि गाओकाओ (Gaokao) परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाएं लगभग असंभव हो जाती हैं।
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