IIT मद्रास में इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल पढ़ाई की तैयारी है। संस्थान MBBS, MD और PhD के लिए स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी IIT को अब तक देश के बेहतरीन इंजीनियर और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ तैयार करने वाले संस्थानों के तौर पर जाना जाता है। लेकिन आने वाले समय में IIT की पहचान सिर्फ इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं रह सकती। IIT मद्रास मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। संस्थान मेडिकल साइंसेज का स्कूल शुरू करने और अपनी मेडिकल डिग्रियां देने की योजना पर काम कर रहा है।
IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि ने हाल ही में बताया कि संस्थान निश्चित रूप से स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज शुरू करना चाहता है। इसके तहत भविष्य में अंडरग्रेजुएट स्तर पर एमबीबीएस, पोस्टग्रेजुएट स्तर पर एमडी और डॉक्टरेट स्तर पर पीएचडी जैसे कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। हालांकि, इन पाठ्यक्रमों को शुरू करने से पहले जरूरी बुनियादी ढांचे और नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
IIT मद्रास का मेडिकल क्षेत्र में जाने का विचार अचानक सामने नहीं आया है। संस्थान पहले से ही मेडिकल साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्र में काम कर रहा है। मई 2023 में IIT मद्रास ने डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी की शुरुआत की थी। यह विभाग इंजीनियरिंग और जीव विज्ञान को एक साथ जोड़कर मेडिकल तकनीक के क्षेत्र में काम करने पर केंद्रित है।
इस विभाग में चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट डिग्री कोर्स भी कराया जाता है। इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करना है, जो मेडिकल क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को समझ सकें और स्कैनर, इम्प्लांट तथा मेडिकल सॉफ्टवेयर जैसी तकनीक विकसित करने में योगदान दे सकें। हालांकि, इस तरह की डिग्री करने वाले विद्यार्थी सीधे मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर नहीं बनते हैं।
यही वजह है कि प्रस्तावित मेडिकल स्कूल को IIT मद्रास की मौजूदा मेडिकल टेक्नोलॉजी शिक्षा से अलग माना जा रहा है। मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी विभाग मुख्य रूप से मेडिकल तकनीक और शोध से जुड़े विशेषज्ञ तैयार करता है, जबकि मेडिकल स्कूल का लक्ष्य मेडिकल डिग्री के जरिए डॉक्टर तैयार करना होगा।
IIT मद्रास के मेडिकल शिक्षा में आगे बढ़ने के पीछे मेडिकल तकनीक और इंजीनियरिंग के बीच बढ़ता संबंध एक अहम वजह है। प्रो. वी. कामकोटि का मानना है कि तकनीकी संस्थानों को मेडिकल स्कूल शुरू करने चाहिए। उनके अनुसार, आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था तेजी से तकनीक पर निर्भर हो रही है और भारत के लिए मेडिकल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना जरूरी है।
कोविड 19 महामारी के दौरान भी मेडिकल व्यवस्था में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई। महामारी ने यह दिखाया कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक कितनी जरूरी हो चुकी है। साथ ही, अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों और तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता भी एक चुनौती है।
IIT मद्रास के निदेशक का मानना है कि अगर भारत को अपने मेडिकल उपकरण और तकनीक विकसित करनी है तो इंजीनियरों और डॉक्टरों को साथ काम करने का अवसर मिलना चाहिए। एक ही संस्थान में इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल से मेडिकल तकनीक के क्षेत्र में नए समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
IIT मद्रास के लिए मेडिकल डिग्री शुरू करना इंजीनियरिंग कोर्स शुरू करने जितना आसान नहीं होगा। भारत में मेडिकल शिक्षा की निगरानी नेशनल मेडिकल कमीशन यानी NMC करता है। एमबीबीएस जैसे मेडिकल कोर्स शुरू करने के लिए संस्थान को जरूरी नियामकीय मंजूरी हासिल करनी होगी।
इसके साथ ही मेडिकल विद्यार्थियों की क्लिनिकल ट्रेनिंग के लिए एक टीचिंग हॉस्पिटल की भी जरूरत होगी। मेडिकल छात्रों को वास्तविक मरीजों के इलाज और क्लिनिकल प्रशिक्षण का अनुभव देने के लिए अस्पताल मेडिकल शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
इसलिए IIT मद्रास को मेडिकल स्कूल शुरू करने से पहले जरूरी अस्पताल और अन्य मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। इसके बाद संबंधित नियामकीय प्रक्रियाओं और मंजूरियों को पूरा करना होगा। अभी IIT मद्रास की ओर से मेडिकल स्कूल शुरू करने की योजना बताई गई है, लेकिन एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई कब से शुरू होगी, इसकी निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में IIT मद्रास से पहले IIT खड़गपुर भी कदम बढ़ा चुका है। IIT खड़गपुर ने अपना अस्पताल स्थापित किया है और पोस्टग्रेजुएट स्तर के एमडी कोर्स के लिए मंजूरी हासिल की है। हालांकि, उसका अंडरग्रेजुएट एमबीबीएस कोर्स शुरू होना जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता से जुड़ा हुआ है।
IIT खड़गपुर का उदाहरण यह दिखाता है कि तकनीकी संस्थानों के लिए मेडिकल शिक्षा में प्रवेश करने के साथ अस्पताल, इंफ्रास्ट्रक्चर और नियामकीय मंजूरी जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को पूरा करना जरूरी है।
IIT मद्रास के लिए मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक फायदा यह है कि संस्थान में पहले से मेडिकल तकनीक से जुड़े कई काम हो रहे हैं। कैंपस में हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी सेंटर और ब्रेन मैपिंग इंस्टीट्यूट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
इसके अलावा, 2023 में शुरू किया गया डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी चेन्नई के प्रमुख अस्पतालों के साथ भी काम कर रहा है। इससे IIT मद्रास के इंजीनियरों और मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच सहयोग का आधार पहले से मौजूद है।
अब प्रस्तावित स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज के जरिए संस्थान इसी सहयोग को मेडिकल शिक्षा के अगले स्तर तक ले जाने की योजना बना रहा है। अगर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और नियामकीय मंजूरियां पूरी होती हैं, तो भविष्य में IIT मद्रास से इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल क्षेत्र में भी डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थी निकल सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि IIT मद्रास का मेडिकल स्कूल कब शुरू होगा और एमबीबीएस व एमडी जैसे पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया कैसी होगी। संस्थान ने मेडिकल स्कूल और मेडिकल डिग्रियां शुरू करने की योजना जरूर बताई है, लेकिन इसकी शुरुआत के लिए जरूरी प्रक्रियाओं और मंजूरियों का पूरा होना अभी बाकी है।
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