झारखंड में JSSC CGL समेत 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द, छह स्थगित और 17 परीक्षाओं की CID जांच होगी। फैसले से 2627 सफल अभ्यर्थियों पर संकट बढ़ा।

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद राज्य में जेएसएससी सीजीएल समेत 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा छह परीक्षाओं को स्थगित किया गया है। वहीं, वर्ष 2014 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से हुई 17 परीक्षाओं, उनके परिणाम और नियुक्तियों की जांच सीआईडी को सौंपी गई है। सरकार के इस फैसले से उन 2627 सफल अभ्यर्थियों के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जो इन परीक्षाओं में सफल होकर नियुक्ति की उम्मीद कर रहे थे।
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार जेएसएससी सीजीएल परीक्षा समेत कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द किया गया है। इनमें जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पर पड़ा है, जिसमें 1932 पदों पर भर्ती होनी थी।
सरकार के अनुसार जेएसएससी सीजीएल को एसआईटी जांच और सीआईडी अनुसंधान में सामने आए तथ्यों के आधार पर रद्द किया गया है। इसके साथ ही टीडीपीएल के माध्यम से कराई गई सभी परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है। रद्द की गई 22 परीक्षाओं में से 19 परीक्षाओं का आयोजन टीडीपीएल के जरिए हुआ था।
रद्द की गई परीक्षाओं में विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती, सहायक निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी भर्ती, ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती, इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर भर्ती और पॉलिटेक्निक संस्थानों में लेक्चरर भर्ती शामिल हैं। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, सिविल जज, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्र पदाधिकारी, सहायक लोक अभियोजक और संयुक्त सिविल सेवा से जुड़ी परीक्षाएं भी इस फैसले की चपेट में आई हैं।
भर्ती परीक्षाएं रद्द होने का सीधा असर 2627 सफल अभ्यर्थियों पर पड़ा है। इनमें जेएसएससी सीजीएल और जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में सफल हुए अभ्यर्थी शामिल हैं। इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति की उम्मीद की थी, लेकिन सरकार के नए फैसले के बाद उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर कुछ उम्मीदवारों पर परीक्षा में गड़बड़ी या अनियमितता के आरोप हैं तो उनकी जांच की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि कुछ लोगों की कथित गलती के कारण पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को रद्द करने से उन सभी अभ्यर्थियों को नुकसान होगा, जिन्होंने मेहनत के बाद सफलता हासिल की है।
कई चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर भी अपनी चिंता जाहिर की थी। अभ्यर्थियों ने कहा था कि उन्होंने लंबे संघर्ष और न्यायालय के आदेश के बाद सरकार की चयन प्रक्रिया के तहत सफलता हासिल की है। कई अभ्यर्थियों ने इस नौकरी की उम्मीद में अपनी पुरानी नौकरी तक छोड़ दी थी। ऐसे में नियुक्ति रद्द होने की स्थिति में उनके सामने आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।
सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी के जरिए हुई 17 परीक्षाओं, उनके परिणाम और नियुक्तियों की जांच सीआईडी को सौंपने का फैसला किया है। इस जांच में पुरानी भर्ती परीक्षाओं में किसी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी हुई है या नहीं, इसकी पड़ताल की जाएगी।
जिन परीक्षाओं की जांच सीआईडी करेगी, उनमें पांचवीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, सिविल जज भर्ती परीक्षा, मृदा संरक्षण पदाधिकारी भर्ती, सहायक निदेशक कृषि और अनुमंडल कृषि पदाधिकारी भर्ती, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी भर्ती, दंत चिकित्सक भर्ती और संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षाएं शामिल हैं।
इसके अलावा वाणिज्यिक कर सीमित परीक्षा, संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा 2016, भू-वैज्ञानिक एवं रसायनज्ञ भर्ती, सहायक लोक अभियोजक भर्ती, संयुक्त सहायक अभियंता भर्ती, संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2021 और डेंटल डॉक्टर भर्ती की भी जांच की जाएगी।
सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने के साथ छह परीक्षाओं को स्थगित भी किया है। इनमें फूड एनालिस्ट भर्ती, उप निदेशक अभियोजन भर्ती, प्रोजेक्ट मैनेजर एवं समकक्ष पदों की भर्ती, फैक्ट्री इंस्पेक्टर भर्ती, बॉयलर इंस्पेक्टर भर्ती और निदेशक भर्ती शामिल हैं।
इन परीक्षाओं को स्थगित करने के फैसले के बाद अब इनकी आगे की प्रक्रिया को लेकर भी अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले निर्णय पर रहेगी।
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का भी फैसला किया है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनने वाली यह समिति परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अध्ययन करेगी और सरकार को सुझाव देगी।
समिति में अन्य अधिकारियों के साथ प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशक भी सदस्य होंगे। सरकार ने समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए जरूरी सुधारों की पहचान करना है।
सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ बनाने का भी निर्णय लिया है। यह प्रकोष्ठ परीक्षा प्रक्रिया की लगातार निगरानी करेगा। सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षा के दौरान होने वाली संभावित अनियमितताओं पर नजर रखना और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
इसके साथ ही जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी अनियमितता और कदाचार के मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की दिशा में भी कदम उठाया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार उच्च न्यायालय से अनुरोध करेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की जा सकेगी।
चयनित अभ्यर्थियों ने किया विरोध प्रदर्शन
सरकार के फैसले के बाद जेएसएससी सीजीएल और इससे जुड़ी नियुक्तियों के चयनित अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिली। मंगलवार को पूर्व में चयनित अभ्यर्थियों ने भारी बारिश के बीच प्रोजेक्ट भवन के सामने प्रदर्शन किया। इसके बाद देर शाम बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक मोबाइल की टॉर्च जलाकर मार्च किया।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के पहुंचने के बाद प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट को बंद करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांग थी कि कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जाए।
अब आगे क्या होगा
सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि रद्द की गई परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर आगे क्या फैसला होगा। खास तौर पर जेएसएससी सीजीएल के 1932 पदों के लिए सफल हुए अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है।
एक तरफ सरकार ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ सफल अभ्यर्थी पूरी चयन प्रक्रिया रद्द किए जाने का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में सीआईडी जांच, सरकार की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट और इस मामले से जुड़े कानूनी घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे।
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