MNNIT इलाहाबाद ने 6.5 या अधिक CPI वाले छात्रों को फर्स्ट डिवीजन के समकक्ष मानने का फैसला किया है। जानें नौकरी आवेदन और भर्ती प्रक्रिया में छात्रों को कैसे मिलेगा फायदा।

मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी MNNIT इलाहाबाद से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए राहत की खबर है। संस्थान के स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब फर्स्ट डिवीजन की मान्यता मिल सकेगी। MNNIT की सीनेट ने फर्स्ट डिवीजन इक्विवेलेंस यानी प्रथम श्रेणी की समकक्षता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 6.5 या इससे अधिक CPI प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को फर्स्ट डिवीजन के समकक्ष माना जाएगा।
यह फैसला उन छात्रों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जिन्हें नौकरी या किसी अन्य भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करते समय फर्स्ट डिवीजन की शर्त का सामना करना पड़ता है। तकनीकी संस्थानों में विद्यार्थियों का मूल्यांकन आमतौर पर CPI यानी कम्युलेटिव परफॉर्मेंस इंडेक्स के आधार पर किया जाता है। ऐसे में अंकपत्र पर पारंपरिक प्रतिशत या डिवीजन दर्ज नहीं होने के कारण कई बार छात्रों को अपनी योग्यता साबित करने में परेशानी होती थी।
MNNIT इलाहाबाद की सीनेट की बैठक में विद्यार्थियों को फर्स्ट डिवीजन इक्विवेलेंस देने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। इसके बाद 6.5 या उससे अधिक CPI को फर्स्ट डिवीजन के समकक्ष मानने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इससे MNNIT के स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक योग्यता बताने में आसानी होगी।
तकनीकी संस्थानों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के अंक अक्सर CPI के रूप में दर्ज होते हैं। दूसरी ओर कई भर्ती संस्थाएं, सरकारी संगठन और गैर सरकारी संस्थाएं अपनी पात्रता शर्तों में फर्स्ट डिवीजन मांगती हैं। ऐसी स्थिति में छात्रों को यह स्पष्ट करने की जरूरत पड़ सकती थी कि उनकी CPI फर्स्ट डिवीजन के बराबर है या नहीं। MNNIT के इस फैसले से इसी समस्या को दूर करने की कोशिश की गई है।
अब MNNIT से पढ़ाई करने वाले जिन विद्यार्थियों की CPI 6.5 या उससे अधिक होगी, उन्हें फर्स्ट डिवीजन के समकक्ष माना जाएगा। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिलेगा, जो ऐसी नौकरियों या भर्ती प्रक्रियाओं में आवेदन करना चाहते हैं, जहां शैक्षणिक योग्यता में प्रथम श्रेणी की अनिवार्यता होती है। इस फैसले से विद्यार्थियों के लिए अपनी योग्यता साबित करना आसान होगा। उन्हें केवल CPI दर्ज होने के कारण फर्स्ट डिवीजन से जुड़ी पात्रता को लेकर होने वाली परेशानी का सामना कम करना पड़ेगा। खास तौर पर भर्ती आवेदन में फर्स्ट डिवीजन की शर्त पूरी करने वाले छात्रों के लिए यह फैसला राहत देने वाला है।
MNNIT का यह फैसला सीधे तौर पर उन भर्ती प्रक्रियाओं में उपयोगी साबित होगा, जहां उम्मीदवार से फर्स्ट डिवीजन की योग्यता मांगी जाती है। अब 6.5 या इससे अधिक CPI वाले विद्यार्थी फर्स्ट डिवीजन के समकक्ष अपनी योग्यता साबित कर सकेंगे। दरअसल, CPI आधारित मूल्यांकन व्यवस्था और फर्स्ट डिवीजन की पारंपरिक शर्त के बीच अंतर के कारण छात्रों को कई बार अतिरिक्त प्रमाण या समकक्षता की जरूरत पड़ सकती थी। संस्थान की ओर से CPI की सीमा तय किए जाने के बाद इस तरह की स्थिति में छात्रों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
MNNIT इलाहाबाद से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण गतिविधि भी सामने आई है। नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए MNNIT के इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन हब फाउंडेशन की ओर से एक और दो सितंबर को दो दिन का स्टार्टअप पिचिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। कोहोर्ट 5.0 के तहत आयोजित होने वाले इस सत्र में करीब 60 स्टार्टअप और उद्यमी विशेषज्ञों के सामने अपने नवाचार और व्यावसायिक विचार प्रस्तुत करेंगे। MNNIT फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राम कुमार मिश्र के अनुसार, प्रतिभागी अपने उत्पाद, तकनीक, बिजनेस मॉडल, बाजार की संभावनाओं और भविष्य की कार्ययोजना के बारे में प्रस्तुति देंगे।
स्टार्टअप पिचिंग सत्र के बाद मूल्यांकन के आधार पर चयनित स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। चयनित उद्यमों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग के साथ उत्पाद विकास में सहायता दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें वित्तीय सहायता और निवेशकों से जुड़ने के अवसर भी मिलेंगे। चयनित स्टार्टअप्स को पेटेंट, बौद्धिक संपदा, कानूनी और नियामकीय मामलों में भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही उद्योग जगत और बाजार से जुड़ने में सहयोग दिया जाएगा। भारी बारिश को देखते हुए पिचिंग सत्र में प्रतिभागियों के लिए ऑनलाइन और प्रत्यक्ष, दोनों माध्यमों से भाग लेने की सुविधा रखी गई है।
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