NEET UG 2026 में 11.21 लाख छात्रों ने परीक्षा पास की, जबकि MBBS की कुल 1,36,939 सीटें उपलब्ध हैं। जानें किस राज्य में कितनी MBBS सीटें हैं, MCC और State Counselling में क्या अंतर है, एडमिशन की पूरी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज।

देशभर में NEET UG 2026 का रिजल्ट घोषित होने के बाद अब लाखों छात्र मेडिकल काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। इस बार करीब 11.21 लाख उम्मीदवारों ने NEET UG परीक्षा पास की है, जबकि पूरे देश में MBBS की कुल 1,36,939 सीटें उपलब्ध हैं। यानी औसतन एक MBBS सीट पर करीब 8 उम्मीदवार दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में अच्छे कॉलेज में दाखिला पाने के लिए केवल NEET स्कोर ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग की सही जानकारी और समझदारी से चॉइस फिलिंग भी बेहद अहम होगी।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए देशभर में MBBS सीटों की संख्या बढ़ाई है। इस वर्ष 9,911 नई MBBS सीटें जोड़ी गई हैं। इनमें 2,111 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 7,800 सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ाई गई हैं। इसके साथ ही 25 नए मेडिकल कॉलेज भी शुरू किए गए हैं। इन नए कॉलेजों में कुल 2,400 सीटें शामिल हैं, जिनमें 400 सरकारी और 2,000 निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें हैं।
अब देश में कुल 823 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 441 सरकारी और 382 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। NMC ने सभी मेडिकल कॉलेजों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल स्वीकृत सीटों पर ही दाखिला लें।
NMC की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
सबसे अधिक MBBS सीटें कर्नाटक में हैं, जहां कुल 15,395 सीटें उपलब्ध हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 14,000 सीटें, तमिलनाडु में 13,999 सीटें, महाराष्ट्र में 13,099 सीटें और तेलंगाना में 10,250 सीटें हैं।
राजस्थान में कुल 8,080 सीटें, गुजरात में 7,750 सीटें, आंध्र प्रदेश में 7,465 सीटें और पश्चिम बंगाल में 7,200 सीटें उपलब्ध हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 6,020, केरल में 5,704, बिहार में 4,160 और छत्तीसगढ़ में 2,925 MBBS सीटें हैं।
दूसरी ओर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड जैसे राज्यों में केवल 100-100 MBBS सीटें हैं। अंडमान और निकोबार में 114, चंडीगढ़ में 200, गोवा में 250 और सिक्किम में 200 सीटें उपलब्ध हैं।
NEET UG पास करने के बाद MBBS में दाखिला केवल एक ही काउंसलिंग के जरिए नहीं होता। इसके लिए दो अलग-अलग काउंसलिंग सिस्टम काम करते हैं। पहला MCC Counselling और दूसरा State Counselling।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) की मेडिकल काउंसलिंग कमेटी यानी MCC सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) सीटों की काउंसलिंग कराती है।
इसके अलावा MCC ही देश के सभी AIIMS, JIPMER, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटीज, ESIC संस्थानों और AFMC पुणे की 100 प्रतिशत MBBS सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया भी पूरी कराती है।
वहीं, सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 85 प्रतिशत स्टेट कोटा सीटों और संबंधित राज्य के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की जिम्मेदारी संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी की होती है।
यदि कोई उम्मीदवार ऑल इंडिया कोटा और स्टेट कोटा दोनों के जरिए MBBS सीट पाना चाहता है, तो उसे आमतौर पर MCC पोर्टल और अपने राज्य की काउंसलिंग वेबसाइट दोनों पर अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करना होता है।
NEET UG में सफल होने के बाद वही उम्मीदवार काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे, जिन्होंने अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल हासिल किया हो।
आमतौर पर सामान्य और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 50वां परसेंटाइल, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 40वां परसेंटाइल निर्धारित होता है।
काउंसलिंग कई चरणों में आयोजित की जाती है।
काउंसलिंग प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका चॉइस फिलिंग की होती है। सीट मैट्रिक्स जारी होने के बाद उम्मीदवार अपनी पसंद के जितने चाहें उतने कॉलेज और कोर्स चुन सकते हैं। प्राथमिकताओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं होती। इसलिए विशेषज्ञ उम्मीदवारों को सलाह देते हैं कि वे अपनी रैंक और पिछले वर्षों के कटऑफ को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक विकल्प भरें।
काउंसलिंग और एडमिशन के समय उम्मीदवारों को ये दस्तावेज तैयार रखने होंगे।
इस वर्ष MBBS की 9,911 नई सीटें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन 11.21 लाख से अधिक सफल उम्मीदवारों के मुकाबले सीटों की संख्या अभी भी काफी कम है। ऐसे में अच्छी रैंक के साथ-साथ सही समय पर रजिस्ट्रेशन, दोनों काउंसलिंग में आवेदन और समझदारी से चॉइस फिलिंग करना ही मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने की सबसे बड़ी कुंजी होगी।
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