राजस्थान स्टेनोग्राफर भर्ती में बड़ा झटका: हाई कोर्ट ने मेरिट लिस्ट की रद्द, 5% छूट अवैध
राजस्थान हाई कोर्ट ने RSSB स्टेनोग्राफर और PA भर्ती की मेरिट लिस्ट रद्द कर दी। कोर्ट ने 5 प्रतिशत अतिरिक्त छूट को अवैध बताते हुए नई मेरिट लिस्ट बनाने के निर्देश दिए।

राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर पीठ ने RSSB स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट भर्ती मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पूरी मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान दिए गए 5 प्रतिशत अतिरिक्त अंकों को पूरी तरह अवैध और नियमों के खिलाफ बताया है।
कोर्ट के इस फैसले का असर भर्ती प्रक्रिया में शामिल बड़ी संख्या में उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। अब चयन बोर्ड को नियमों के अनुसार नई मेरिट लिस्ट तैयार करनी होगी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट भर्ती परीक्षा से जुड़ा हुआ है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान बोर्ड ने कुछ अभ्यर्थियों को उनके प्राप्त अंकों में 5 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी थी।
इस फैसले को कुछ अभ्यर्थियों ने अदालत में चुनौती दी। उनका कहना था कि जब पहले से ही पर्याप्त संख्या में योग्य उम्मीदवार मौजूद थे, तो कुछ उम्मीदवारों को अतिरिक्त अंक देकर मेरिट में शामिल करना गलत है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह फैसला भर्ती के आधिकारिक नोटिफिकेशन और तय नियमों के खिलाफ है।
कोर्ट ने क्या कहा
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकलपीठ में हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद कोर्ट ने पाया कि 5 प्रतिशत अतिरिक्त छूट देने के लिए कोई वैध या आधिकारिक आदेश मौजूद नहीं था।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि यदि भर्ती नियमों में किसी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है तो इस तरह की रियायत देना मनमाना निर्णय माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के फैसलों से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
पारदर्शिता पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी भर्तियों में नियमों का सख्ती से पालन होना जरूरी है। किसी भी उम्मीदवार को बिना नियम के लाभ देना अन्य योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय माना जाएगा। अदालत ने यह भी माना कि इस तरह की छूट से पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
अब आगे क्या होगा
हाई कोर्ट ने मौजूदा मेरिट लिस्ट को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वे नियमों के अनुसार नई मेरिट लिस्ट तैयार करें। साथ ही भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरा करने को कहा गया है।
इस फैसले के बाद अब सभी अभ्यर्थियों की नजर नई मेरिट लिस्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि कोर्ट के आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चयन बोर्ड को अधिक सावधानी बरतनी होगी।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। इससे पहले भी 5 प्रतिशत अतिरिक्त छूट देने के फैसले पर सवाल उठाए गए थे और अदालत ने इस पर कड़ी टिप्पणी की थी। ताजा फैसले ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी भर्ती में नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और नियमों के पालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस निर्णय से यह संदेश भी गया है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को अदालत बर्दाश्त नहीं करेगी।
राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर पीठ ने RSSB स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट भर्ती मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पूरी मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान दिए गए 5 प्रतिशत अतिरिक्त अंकों को पूरी तरह अवैध और नियमों के खिलाफ बताया है।
कोर्ट के इस फैसले का असर भर्ती प्रक्रिया में शामिल बड़ी संख्या में उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। अब चयन बोर्ड को नियमों के अनुसार नई मेरिट लिस्ट तैयार करनी होगी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट भर्ती परीक्षा से जुड़ा हुआ है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान बोर्ड ने कुछ अभ्यर्थियों को उनके प्राप्त अंकों में 5 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी थी।
इस फैसले को कुछ अभ्यर्थियों ने अदालत में चुनौती दी। उनका कहना था कि जब पहले से ही पर्याप्त संख्या में योग्य उम्मीदवार मौजूद थे, तो कुछ उम्मीदवारों को अतिरिक्त अंक देकर मेरिट में शामिल करना गलत है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह फैसला भर्ती के आधिकारिक नोटिफिकेशन और तय नियमों के खिलाफ है।
कोर्ट ने क्या कहा
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकलपीठ में हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद कोर्ट ने पाया कि 5 प्रतिशत अतिरिक्त छूट देने के लिए कोई वैध या आधिकारिक आदेश मौजूद नहीं था।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि यदि भर्ती नियमों में किसी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है तो इस तरह की रियायत देना मनमाना निर्णय माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के फैसलों से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
पारदर्शिता पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी भर्तियों में नियमों का सख्ती से पालन होना जरूरी है। किसी भी उम्मीदवार को बिना नियम के लाभ देना अन्य योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय माना जाएगा। अदालत ने यह भी माना कि इस तरह की छूट से पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
अब आगे क्या होगा
हाई कोर्ट ने मौजूदा मेरिट लिस्ट को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वे नियमों के अनुसार नई मेरिट लिस्ट तैयार करें। साथ ही भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरा करने को कहा गया है।
इस फैसले के बाद अब सभी अभ्यर्थियों की नजर नई मेरिट लिस्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि कोर्ट के आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चयन बोर्ड को अधिक सावधानी बरतनी होगी।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। इससे पहले भी 5 प्रतिशत अतिरिक्त छूट देने के फैसले पर सवाल उठाए गए थे और अदालत ने इस पर कड़ी टिप्पणी की थी। ताजा फैसले ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी भर्ती में नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और नियमों के पालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस निर्णय से यह संदेश भी गया है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को अदालत बर्दाश्त नहीं करेगी।












