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यूपी सरकार की नई योजना के तहत अब कामकाजी युवा नौकरी के साथ पॉलिटेक्निक डिग्री कर सकेंगे। जानें पात्रता, दाखिला प्रक्रिया और लेटरल एंट्री की पूरी जानकारी।

उत्तर प्रदेश के कामकाजी युवाओं और उद्योगों में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब ऐसे युवाओं को नौकरी छोड़कर पढ़ाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तर प्रदेश तकनीकी शिक्षा परिषद ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारी अपनी नौकरी जारी रखते हुए पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा की पढ़ाई कर सकेंगे। यह योजना उन युवाओं के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है, जो समय की कमी या आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण आगे की तकनीकी पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे।
इस नई योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कामकाजी युवा अपनी मौजूदा नौकरी जारी रखते हुए तकनीकी शिक्षा हासिल कर सकेंगे। इससे उन्हें बेहतर नौकरी, प्रमोशन और अधिक वेतन पाने में मदद मिलेगी। कई ऐसे कर्मचारी हैं जिनके पास हुनर और अनुभव तो है, लेकिन डिग्री या डिप्लोमा नहीं होने की वजह से वे आगे नहीं बढ़ पाते। ऐसे लोगों के लिए यह योजना करियर को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।
इस योजना को लागू करने के लिए गाजियाबाद के शास्त्री नगर स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक को तैयार किया गया है। हालांकि तकनीकी कारणों की वजह से इस शैक्षणिक सत्र में दाखिले शुरू नहीं हो सके हैं, लेकिन अगले सत्र से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद कामकाजी युवाओं को नौकरी के साथ पढ़ाई का सुनहरा मौका मिलेगा।
इस विशेष पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। आवेदक के पास कम से कम एक वर्ष का औद्योगिक कार्य अनुभव होना जरूरी है। जिस कंपनी या संस्थान में कर्मचारी काम करता है, वह पॉलिटेक्निक कॉलेज से 50 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। इसके अलावा अभ्यर्थी का आईटीआई, 10वीं या 12वीं पास होना अनिवार्य है। शुरुआत में एक विषय में अधिकतम 30 सीटों पर दाखिला दिया जाएगा।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि पात्र उम्मीदवारों को पॉलिटेक्निक में सीधे दूसरे वर्ष में लेटरल एंट्री के जरिए प्रवेश मिलेगा। यानी छात्रों को पहले साल की पढ़ाई नहीं करनी होगी। इससे उनका समय बचेगा और वे जल्दी डिप्लोमा पूरा कर सकेंगे। दाखिला पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगा। मेरिट लिस्ट तैयार करते समय उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता और कार्य अनुभव को महत्व दिया जाएगा।
राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य डॉ. जानबेग लोनी के अनुसार इस कोर्स को शुरू करने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यानी एआईसीटीई से मंजूरी लेना जरूरी है। इस वर्ष समय की कमी के कारण अनुमति नहीं मिल सकी, लेकिन दिसंबर तक सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद अगले सत्र से प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
यह योजना सिर्फ युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि उद्योगों के लिए भी लाभकारी साबित होगी। इससे कंपनियों को अधिक प्रशिक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और शिक्षित कर्मचारी मिल सकेंगे। वहीं युवाओं को अनुभव के साथ डिग्री भी मिलेगी, जिससे उनके करियर में तेजी से ग्रोथ होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार और तकनीकी शिक्षा परिषद की यह पहल राज्य के लाखों कामकाजी युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। अगर आप भी आईटीआई, 10वीं या 12वीं के बाद किसी कंपनी में काम कर रहे हैं, तो अगले सत्र के लिए अपने दस्तावेज तैयार रखना फायदेमंद हो सकता है।
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