यूपी होमगार्ड भर्ती के मेडिकल में 50 हजार रुपये तक वसूली के आरोप। दो डॉक्टर समेत तीन हिरासत में, ऑनलाइन लेनदेन की जांच और मेडिकल निरस्त।

उत्तर प्रदेश में होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण के दौरान कथित वसूली का मामला सामने आया है। मेडिकल में अनफिट करने का डर दिखाकर अभ्यर्थियों से 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक मांगने का आरोप लगाया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि मेडिकल पैनल में शामिल डॉक्टर नाक टेढ़ी होने और आंखों में परेशानी बताकर उन्हें अनफिट करने की बात कह रहे थे। इस मामले को लेकर गुरुवार, 15 अक्टूबर को पुलिस लाइन में जमकर हंगामा हुआ। मामला बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस की शुरुआती जांच में ऑनलाइन खाते में रुपये ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। नकद रुपये लेने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। मामले में दो डॉक्टरों और एक ड्राइवर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं, दो अन्य युवकों के फरार होने की जानकारी सामने आई है। हंगामे के बाद होमगार्ड भर्ती का मेडिकल परीक्षण भी निरस्त कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को पुलिस लाइन में होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण के पहले दिन 200 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। अभ्यर्थियों की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से तीन डॉक्टरों का पैनल बनाया गया था। इसमें डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. महेश द्विवेदी और डॉ. देवेंद्र सिंह राजपूत शामिल थे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि मेडिकल परीक्षण की शुरुआत में करीब 15 से 20 छात्रों की सामान्य तरीके से जांच की गई। इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों को नाक टेढ़ी होने या आंखों में परेशानी की बात कहकर अनफिट करने का डर दिखाया जाने लगा। अभ्यर्थियों के मुताबिक, इसी आधार पर उनसे रुपये मांगे गए। यह मामला रात करीब आठ बजे सामने आया, जब अभ्यर्थियों ने डॉक्टरों पर मेडिकल में पास कराने के नाम पर रुपये मांगने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भीड़ जुट गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि मेडिकल परीक्षण के दौरान किसी की नाक टेढ़ी बताकर उसे अनफिट करने की बात कही गई, तो किसी की आंखों में परेशानी बताई गई। आरोप है कि नाक से जुड़ी कमी बताने पर 10 हजार से 15 हजार रुपये तक मांगे गए। वहीं, आंखों में समस्या बताकर कथित तौर पर 50 हजार रुपये तक की मांग की गई। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्हें एक कागज पर मोबाइल नंबर दिया गया था और उस नंबर पर संपर्क करके रुपये देने की बात कही गई थी। कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि एक डॉक्टर की कार में मौजूद युवक के माध्यम से नकद और ऑनलाइन रुपये लिए जा रहे थे। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और नकद भुगतान के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
मेडिकल में कथित वसूली को लेकर हुए हंगामे के दौरान अभ्यर्थियों ने एक डॉक्टर की कार में मौजूद युवक अजीत पर रुपये लेने का आरोप लगाया। इस दौरान गुस्साए अभ्यर्थियों ने युवक की पिटाई कर दी और बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया। बताया गया कि अजीत डॉ. महेश द्विवेदी के साथ रहता है। अभ्यर्थियों के आरोपों के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में ऑनलाइन खाते में रुपये ट्रांसफर होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस ने डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. महेश द्विवेदी और उनके ड्राइवर अजीत को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। मामले में दो अन्य युवकों के फरार होने की बात भी सामने आई है।
हंगामे की सूचना मिलने पर एसीपी कोतवाली अमित पांडेय और एसीपी कर्नलगंज अंजना दहिया मौके पर पहुंचीं। पुलिस अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से बातचीत की और पूरे मामले की जानकारी ली। एसीपी कोतवाली अमित पांडेय ने अभ्यर्थियों से कहा कि जिन लोगों ने रुपये दिए हैं, वे पुलिस को इसकी जानकारी दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि अभ्यर्थी खुद आगे आकर जानकारी देते हैं, तो पुलिस उनकी मदद करेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जांच के दौरान रुपये देने की बात सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। बताया गया कि कार्रवाई के डर से कई अभ्यर्थी पुलिस के सामने रुपये देने की बात बताने से बचते रहे। पुलिस अब मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि कथित वसूली के पूरे तरीके का पता लगाया जा सके।
हंगामे के दौरान एक और विवाद सामने आया। घटना की जानकारी मिलने पर कुछ मीडियाकर्मी पुलिस लाइन के अंदर पहुंचे और अभ्यर्थियों से बातचीत करने लगे। इस दौरान कुछ छात्रों ने उन्हें वह कार भी दिखाई, जिसके संबंध में रुपये लेने के आरोप लगाए जा रहे थे। इसी बीच एसीपी कोतवाली अमित पांडेय और कोतवाली थाना प्रभारी अरुण कुमार द्विवेदी कार के पास पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने अभ्यर्थियों पर कार से बैग चोरी करने का आरोप लगाया। इसके बाद थाना प्रभारी अरुण कुमार द्विवेदी ने एक अभ्यर्थी को थप्पड़ मार दिया और उसे अंदर ले गए। इस घटना ने मौके पर मौजूद लोगों के बीच तनाव और बढ़ा दिया। हालांकि, बैग चोरी के आरोप और उससे जुड़े घटनाक्रम के संबंध में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इससे आगे की कोई पुष्टि नहीं की जा सकती।
होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण में कथित वसूली के मामले में पुलिस ने दो डॉक्टरों और एक ड्राइवर को हिरासत में लिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर होने के तथ्य सामने आने की बात कही गई है। वहीं, नकद लेनदेन और अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है। कोतवाली पुलिस ने होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय के अधिकारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अभ्यर्थियों से वास्तव में कितनी रकम ली गई, रुपये किन खातों में भेजे गए और कथित वसूली में कौन-कौन शामिल था। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। हिरासत में लिए गए लोगों की भूमिका और आरोपों की पुष्टि जांच के नतीजों के आधार पर ही हो सकेगी।
मामले के सामने आने और पुलिस लाइन में हुए हंगामे के बाद होमगार्ड भर्ती का मेडिकल परीक्षण निरस्त कर दिया गया। होमगार्ड कमांडेंट प्रीति शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मेडिकल की नई तारीख जल्द तय की जाएगी। मेडिकल निरस्त होने के बाद अब अभ्यर्थियों को अगले कार्यक्रम का इंतजार करना होगा। नई तारीख घोषित होने पर अभ्यर्थियों को दोबारा मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया जाएगा।
यूपी होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण में कथित वसूली का यह मामला अभ्यर्थियों के आरोपों के बाद सामने आया है। इसमें नाक और आंखों से जुड़ी मेडिकल कमियां बताकर रुपये मांगने, ऑनलाइन भुगतान होने और नकद रकम लेने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर पूछताछ और जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि अभ्यर्थियों से कितने रुपये लिए गए और इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका थी। फिलहाल भर्ती का मेडिकल निरस्त है और नई तारीख का इंतजार किया जा रहा है।
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