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यूपी में 13116 पंचायत सचिवों की भर्ती को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। भर्ती पूरी होने के बाद हर ग्राम पंचायत में अलग सचिव की तैनाती होगी। जानें भर्ती योजना, चरणवार प्रक्रिया और ग्रामीणों को मिलने वाले लाभ।

उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में 13116 पंचायत सचिवों की भर्ती को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद हर ग्राम पंचायत में अलग पंचायत सचिव की तैनाती का रास्ता साफ हो जाएगा। इससे ग्राम पंचायतों के कामकाज में तेजी आएगी और ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पंचायती राज विभाग के साथ-साथ वित्त विभाग और ग्राम्य विकास विभाग ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
पंचायती राज विभाग प्रदेश में 13116 पंचायत सचिवों की भर्ती तीन चरणों में पूरी करेगा। पहले चरण में 4372 पंचायत सचिवों की भर्ती की जाएगी। इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण में भी लगभग इतनी ही संख्या में भर्ती की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह है कि भविष्य में प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में एक स्वतंत्र पंचायत सचिव की तैनाती सुनिश्चित की जा सके, ताकि पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बेहतर तरीके से संचालन हो सके।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली स्टेट एक्ज्यूकेटिव कमेटी की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार किया गया। बैठक में पंचायती राज विभाग, वित्त विभाग और ग्राम्य विकास विभाग ने भर्ती के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। इसके साथ ही प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में अलग पंचायत सचिव की तैनाती के प्रस्ताव को भी शासन स्तर पर सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। इस संबंध में पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार की ओर से बैठक के कार्यवृत्त भी जारी कर दिए गए हैं।
पंचायती राज विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब 58 हजार ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से लगभग 42 हजार ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव के पद खाली हैं। यही वजह है कि वर्तमान में ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और पंचायत सचिवों को कई ग्राम पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है। एक ही अधिकारी के पास कई पंचायतों की जिम्मेदारी होने से विकास कार्यों और प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ रहा है।
13116 पंचायत सचिवों की भर्ती पूरी होने के बाद ग्राम पंचायतों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीणों के अधिकतर सरकारी कार्य ग्राम पंचायत स्तर पर ही पूरे हो सकें। इससे लोगों को छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ भी पंचायत स्तर पर आसानी से उपलब्ध कराया जा सकेगा। ग्रामीणों की विकास संबंधी शिकायतों के निस्तारण में भी पंचायत सचिव महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और लोगों को आवश्यक जानकारी तथा सहायता उपलब्ध कराएंगे।
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सरकार की योजना केवल 13116 पदों तक सीमित नहीं है। इन भर्तियों के पूरा होने के बाद प्रदेश में शेष खाली पदों पर भी नई भर्ती करने पर विचार किया जाएगा। इस संबंध में स्टेट एक्ज्यूकेटिव कमेटी आगे अलग से फैसला करेगी। सरकार का लक्ष्य प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में स्वतंत्र पंचायत सचिवों की तैनाती सुनिश्चित करना है, ताकि ग्रामीण प्रशासन को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाया जा सके।
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