उत्तर प्रदेश TGT-PGT और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से वेटिंग लिस्ट समाप्त कर दी गई है, जिससे 14 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। नए आयोग के एक्ट में वेटिंग लिस्ट का प्रावधान नहीं होने से उम्मीदवारों में नाराज़गी बढ़ी।

उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों की TGT, PGT और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से वेटिंग लिस्ट की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है, जिसके बाद 14 लाख से अधिक अभ्यर्थियों में निराशा फैल गई है। यह बदलाव उस समय सामने आया है जब हजारों प्रतियोगी उम्मीदवार लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं और इंटरव्यू की प्रतीक्षा कर रहे थे।
यह बदलाव उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के नए अधिनियम के कारण हुआ है। दो साल पहले पुराने आयोग उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का विलय कर एक नया आयोग बनाया गया था।
नए अधिनियम में वेटिंग लिस्ट का कोई प्रावधान शामिल नहीं किया गया है, जबकि पहले टीजीटी, पीजीटी और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में अधिकतम 25 प्रतिशत तक वेटिंग लिस्ट जारी करने की व्यवस्था लागू थी।
इस बदलाव का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो इन भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं:
इन पदों के लिए लाखों अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे और उनमें से कई उम्मीदवार वेटिंग लिस्ट में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
भर्ती प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट का न होना अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने कहा कि वेटिंग लिस्ट हटाना छात्रों के लिए नुकसानदेह है, क्योंकि चयन प्रक्रिया में कई वर्षों का समय लग जाता है। ऐसे में:
नवगठित आयोग के सचिव मनोज कुमार से जब इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। इससे अभ्यर्थियों की चिंता और भी बढ़ गई है, क्योंकि यह साफ नहीं है कि भविष्य में वेटिंग लिस्ट जारी होगी या नहीं।
फिलहाल यह स्थिति साफ है कि नए एक्ट में वेटिंग लिस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। जब तक अधिनियम में संशोधन नहीं किया जाता, तब तक TGT, PGT और असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में वेटिंग लिस्ट नहीं जारी की जा सकेगी। इससे लाखों उम्मीदवारों का चयन प्रभावित होना तय है।