UPSC CSE 2026 के लिए आज आवेदन की अंतिम तिथि है। 933 पदों पर भर्ती, फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य, रैंक सुधार के नए नियम और पात्रता से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।

संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है और आज 24 फरवरी आवेदन करने की अंतिम तिथि है। जिन अभ्यर्थियों ने अब तक आवेदन नहीं किया है, वे आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाकर तुरंत फॉर्म भर सकते हैं। इस वर्ष कुल 933 पदों पर भर्ती की जाएगी। पिछले वर्ष 979 पद थे, यानी इस बार वैकेंसी में कमी की गई है।
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई 2026 को आयोजित की जाएगी। इसी परीक्षा के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय विदेश सेवा सहित अन्य केंद्रीय सेवाओं में अधिकारियों का चयन किया जाएगा। भारतीय वन सेवा के लिए भी प्रारंभिक परीक्षा समान रहेगी। वन सेवा परीक्षा 2026 के तहत 80 पदों पर भर्ती की जाएगी।
इस बार आयोग ने परीक्षा से जुड़े कई अहम बदलाव किए हैं। खास तौर पर सेवा में कार्यरत अधिकारियों और रैंक सुधार से जुड़े नियमों में बड़ा परिवर्तन किया गया है।
नए नियमों के अनुसार, जो उम्मीदवार पहले से भारतीय प्रशासनिक सेवा या भारतीय विदेश सेवा में कार्यरत हैं, वे सिविल सेवा परीक्षा 2026 में शामिल नहीं हो सकेंगे। यदि कोई उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा के बाद इन सेवाओं में नियुक्त होता है, तो वह मुख्य परीक्षा में बैठने का पात्र नहीं होगा।
यदि किसी उम्मीदवार की नियुक्ति मुख्य परीक्षा शुरू होने के बाद लेकिन अंतिम परिणाम से पहले होती है, तो उसे सिविल सेवा परीक्षा 2026 के आधार पर किसी भी सेवा के लिए विचार नहीं किया जाएगा।
सिविल सेवा परीक्षा 2026 के माध्यम से आईपीएस या किसी केंद्रीय ग्रुप ए सेवा में चयनित उम्मीदवारों को सिविल सेवा परीक्षा 2027 में एक बार रैंक सुधार का अवसर मिलेगा। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण में शामिल होने से एक बार की छूट लेनी होगी।
यदि उम्मीदवार 2027 में दोबारा चयनित होता है, तो उसे 2026 या 2027 में मिली किसी एक सेवा का चयन करना होगा
अंतिम चयनित सेवा की ट्रेनिंग में शामिल न होने पर दोनों सेवाएं रद्द हो सकती हैं
इस अवसर का उपयोग करने के बाद उम्मीदवार 2028 या उसके बाद की परीक्षा में तब तक शामिल नहीं हो सकेगा जब तक वह सेवा से इस्तीफा न दे दे।
यूपीएससी ने प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने की समय सीमा सात दिन से घटाकर पांच दिन कर दी है। अब अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा के बाद केवल पांच दिन के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करनी होगी।
साल 2026 से आयोग की सभी परीक्षाओं में फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। परीक्षा केंद्र पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस टेस्ट किया जाएगा। इसका उद्देश्य फर्जी उम्मीदवारों और डमी कैंडिडेट्स पर रोक लगाना है। यह प्रक्रिया मैन्युअल जांच से अधिक तेज और प्रभावी मानी जा रही है।
इस वर्ष से दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी उम्मीदवारों को उनके द्वारा चुना गया सेंटर ही दिया जाएगा।
सिविल सेवा परीक्षा के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है। अंतिम वर्ष के छात्र भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन मुख्य परीक्षा के समय डिग्री का प्रमाण देना होगा।
भारतीय वन सेवा के लिए संबंधित विषयों जैसे कृषि, वानिकी, इंजीनियरिंग या विज्ञान विषयों में स्नातक डिग्री आवश्यक है।
आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 32 वर्ष होनी चाहिए। आयु की गणना 1 अगस्त 2026 से की जाएगी। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु में छूट मिलेगी।
सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों में आयोजित होती है। पहले प्रारंभिक परीक्षा, फिर मुख्य परीक्षा और अंत में इंटरव्यू। मुख्य परीक्षा 1750 अंकों की होती है जबकि इंटरव्यू 275 अंकों का होता है। अंतिम मेरिट सूची मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों के आधार पर तैयार की जाती है।
आवेदन शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया है। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम या बैंक शाखा के जरिए किया जा सकता है। एससी, एसटी, महिला और दिव्यांग उम्मीदवारों को शुल्क से छूट दी गई है।
इस बार आवेदन वापस लेने का विकल्प उपलब्ध नहीं है। एक बार फॉर्म भरने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकेगा।
सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय विदेश सेवा के अलावा रेलवे ग्रुप ए, भारतीय डाक सेवा और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए चयन किया जाता है।