UPTET पास परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति का मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। 2015 से अटकी पदोन्नति, वरिष्ठता सूची और टीईटी से जुड़े पूरे मामले की जानकारी यहां पढ़ें।

यूपीटीईटी पास परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। शिक्षकों ने लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया को पूरा कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद (प्रयागराज) हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की है। पंकज कुमार सिंह, अमरेन्द्र प्रताप शाही और अन्य शिक्षकों की ओर से दाखिल इस याचिका पर जस्टिस पंकज भाटिया की कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होनी है। शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद लंबे समय से मामला आगे नहीं बढ़ सका है।
शिक्षकों के अनुसार विभिन्न जिलों में वरिष्ठता से जुड़े विवादों के कारण वर्ष 2015 से उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों पर पदोन्नति नहीं हो सकी है। शिक्षकों का कहना है कि अब इस मामले में जुड़ी कई याचिकाओं का निस्तारण हो चुका है। ऐसे में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति की बाधा भी समाप्त हो गई है। इस मामले से जुड़ी तपेश्वर राम एवं अन्य तथा उससे संबद्ध याचिकाएं 11 मार्च 2024 को निस्तारित हो चुकी हैं। वहीं प्रयागराज से संबंधित सरला कुमारी की याचिका का निस्तारण 24 सितंबर 2024 को किया जा चुका है।
शिक्षकों का कहना है कि शासन की ओर से 29 दिसंबर 2022 को प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों पर पदोन्नति के आदेश दिए गए थे। इसके बाद पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से भी कई आदेश जारी किए गए। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने 31 जनवरी 2023, 19 फरवरी 2023 और 4 जनवरी 2024 को अध्यापक सेवा नियमावली 1981 के प्रावधानों के अनुसार वरिष्ठता निर्धारित करते हुए प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापकों की पदोन्नति से संबंधित आदेश जारी किए थे।
पदोन्नति प्रक्रिया के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के सहायक अध्यापकों की वरिष्ठता सूची वेबसाइट पर अपलोड की जा चुकी है। इसके बावजूद अभी तक पदोन्नति की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है। यही वजह है कि शिक्षकों ने अब हाईकोर्ट का रुख किया है। शिक्षकों का कहना है कि जब वरिष्ठता सूची जारी हो चुकी है और पदोन्नति से संबंधित प्रक्रिया के लिए शासन स्तर से पहले ही आदेश जारी किए जा चुके हैं, तो अब पदोन्नति की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
शिक्षकों ने अपनी याचिका में अध्यापक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया है। शिक्षकों के अनुसार पदोन्नति के लिए टीईटी से संबंधित याचिकाओं का भी निस्तारण हो चुका है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति के लिए टीईटी पास होना अनिवार्य माना है। ऐसे में शिक्षकों का तर्क है कि जिन शिक्षकों ने टीईटी पास की है, उनकी पदोन्नति के लिए अब इस आधार पर कोई बाधा नहीं रहनी चाहिए। शिक्षकों ने यूपीटीईटी-2026 में सफल होने वाले और पहले से टीईटी या सीटीईटी पास शिक्षकों को भी पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है।
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शिक्षकों ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रिक्त पदों पर पदोन्नति की मांग की है। उनका कहना है कि इन पदों पर पात्र शिक्षकों की पदोन्नति जल्द से जल्द की जानी चाहिए। याचिका में कंपोजिट विद्यालयों को लेकर भी व्यवस्था में संशोधन की मांग की गई है। शिक्षकों का कहना है कि कक्षा एक से आठ तक के कंपोजिट विद्यालय को एक प्रशासनिक इकाई के रूप में लिया जाए और छात्र संख्या के आधार पर प्रधानाध्यापक के पद सृजित किए जाएं।
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शिक्षकों ने मांग की है कि कंपोजिट विद्यालयों में 100 से अधिक छात्र संख्या होने पर प्रधानाध्यापक का पद सृजित किया जाए। इसके अलावा प्राथमिक स्तर यानी कक्षा एक से पांच में 150 से अधिक और उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा छह से आठ में 100 से अधिक छात्र संख्या होने पर भी प्रधानाध्यापक के पद सृजित करने के लिए जरूरी संशोधन किया जाए। शिक्षकों का कहना है कि इस व्यवस्था के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापकों, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापकों की पदोन्नति का रास्ता आगे बढ़ सकता है।
अब यूपीटीईटी पास परिषदीय शिक्षकों की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। याचिकाकर्ता शिक्षकों की मांग है कि लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को पूरा किया जाए और पात्र शिक्षकों को रिक्त पदों पर पदोन्नति दी जाए। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत में होने वाली सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है।
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