
Baba Latest: बाबा बागेश्वर धाम वाले बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आए दिन चर्चा का विषय बने रहते हैं। अपनी अभद्र टिप्पणियों से किसी को भी बेज्जत करना बाबा की आदत बन गई है। इस बार तो बाबा ने हद ही कर दी है। जिस मंच से बाबा भगवान की कथा कह रहे हैं उसी मंच से काले रंग के इंसानों को बेइज्जत करते हुए नज़र आ रहे हैं। उनके इस कथन हो सुनकर हर कोई हैरान है। सभी का कहना है कि यह पूरी तरह से नस्लभेद का मामला है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि यह किस प्रकार का बाबा है जो किसी को भी बेज्जत करने में देर नहीं लगाता है।
आपको बता दें कि बाबा बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पूर्व में भी अपने बिगड़े बोल के कारण चर्चा में रह चुके हैं। ग्रेटर नोएडा में ही अपनी कथा के दौरान वह महिलाओं को 'खाली प्लाट' और 'रजिस्ट्री' की संज्ञा दे चुके हैं। उन्होंने अपनी कथा में कहा था कि “जिस महिला के मांग में सिंदूर नहीं है, गले में मंगलसूत्र नहीं है मान लो वह खाली प्लॉट है जिसका देखने वाला कोई नहीं है। और अगर महिला की मांग में सिंदूर है और गले में मंगलसूत्र है तो समझ लो उस महिला की रजिस्ट्री हो गई है।” यह बेहूदा अपमानजनक कथन था जिसके बाद सोशल मीडिया पर बाबा की काफी निंदा हुई थी।
जैतपुर मेट्रो स्टेशन के पास आयोजित श्रीमदभागवत कथा के समापन के साथ ही 'बाबा' का आखरी एपिसोड भी खतम हो चुका है। इस आखरी एपिसोड में बाबा बागेश्वर धाम वाले पंड़ित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नस्लभेद के बीज बोने का काम किया है। श्रीमदभागवत कथा के जिस पवित्र मंच पर श्रीहरि भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का वर्णन होता है, श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए ज्ञान बखान होता है, उसी पवित्र मंच से बाबा बागेश्वर धाम वाले पंड़ित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 'काला' और 'गोरा' की व्याख्या कर नस्लभेद पैदा कर दिया है।
[video width="360" height="640" mp4="https://test.chetnamanch.com/wp-content/uploads/2023/07/WhatsApp-Video-2023-07-17-at-10.29.51-AM.mp4"][/video]उन्होंने कहा कि 'अच्छे-अच्छे काले आदमी, जिनको देखकर अमावस्या भी डर जाए, वो भी अपनी फोटो इतनी गोरी बनाकर अपलोड करते हैं कि दूसरा अंग्रेज हो।' काले और गोरे के इस व्याख्या के बाद लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या बाबा बागेश्वर नोएडा में श्रीमदभागवत का ज्ञान बांटने आए थे या इंसान को नस्लभेद को विभाजित करने ? लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि श्रीहरि भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण भी काले थे, क्या उनको देखकर अमावस्या डर जाती थी ? लोगों ने साफ कहा है कि काले और गोरे की इस व्याख्या से बाबा ने नस्लभेद पैदा कर लोगों को बेइज्जत करने का काम किया है।
बरहाल, 10 जुलाई से 16 जुलाई तक आयोजित बाबा बागेश्वर धाम वाले पंड़ित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सात दिन की कथा में ऐसा कुछ भी नहीं सुनने को मिला, जिससे किसी भी श्रद्धालु को सदमार्ग पर चलने का ज्ञान प्राप्त हुआ हो। पहले के दो दिन तो कलशयात्रा निकालने और शुभारंभ में ही चले गए। तीसरे दिन यानि 12 जुलाई को दिव्य दरबार लगाया गया, जो अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया। बाकि के दिन भी इधर उधर की बातों में ही चले गए और रविवार को बाबा के 'फ्लॉप शो' का दी एंड हो गया। Baba Bageshwar