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ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में चल रहे बाराही मेले में रविवार को बेहद शानदार नजारा देखने को मिला। यह नजारा था ग्रेटर नोएडा के बाराही मेले में आयोजित कवि सम्मेलन का। कवि सम्मेलन में सुप्रसिद्ध कवि तथा गीतकार संतोष आनंद ने जब अपना प्रसिद्ध गीत - ‘‘एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है”।

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में चल रहे बाराही मेले में रविवार को बेहद शानदार नजारा देखने को मिला। यह नजारा था ग्रेटर नोएडा के बाराही मेले में आयोजित कवि सम्मेलन का। कवि सम्मेलन में सुप्रसिद्ध कवि तथा गीतकार संतोष आनंद ने जब अपना प्रसिद्ध गीत - ‘‘एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है”। गुनगुनाया तो उनके साथ मेले में मौजूद ग्रेटर नोएडा के सभी नागरिक प्यार का नगमा गुनगुनाते नजर आए। Greater Noida News:
ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में हर साल प्रसिद्ध बाराही मेला आयोजित किया जाता है। लगातार एक सप्ताह तक चलने वाले मेले में अलग-अलग दिन अलग-अलग आयोजन किए जाते हैं। इसी कड़ी में ग्रेटर नोएडा के बाराही मेले में रविवार की शाम रंगीन हो गई जब हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद ने गीत गए। मंच पर आते ही संतोष आनंद ने अपने मशहूर गीतों की प्रस्तुति से ऐसा जादू बिखेरा कि मानो समय ठहर गया हो। जब उन्होंने एक प्यार का नगमा है गुनगुनाया तो हजारों दर्शक खुद ही उनके साथ सुर में सुर मिलाने लगे। पूरा पंडाल तालियों और भावनाओं की गूंज से भर उठा। उनके गीतों की गहराई और काव्य संध्या के दौरान कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से बाधा समा संवेदनशीलता ने हर किसी के दिल को छू लिया। Greater Noida News:
काव्य संध्या के दौरान अन्य कवियों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को विविध रंगों से सजाया। इस अवसर पर विभिन्न कलाकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं से दर्शकों का मनोरंजन किया। हास्य, व्यंग्य, वीर रस और गजलों का सुंदर मिश्रण देखने को मिला। कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों ने देर रात तक इस सांस्कृतिक संध्या का आनंद लिया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बाराही मेला केवल मनोरंजन का मंच नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों को संजोने का एक प्रयास है।Greater Noida News:
इस वर्ष मेले में पारंपरिक चौपाल विशेष आकर्षण का केंद्र है। फूस के छप्पर से निर्मित इस चौपाल ने ग्रामीण जीवन की झलक को जीवंत कर दिया है। यहां विशाल खाट, हुक्का, बैलगाड़ी और पारंपरिक उपकरणों की प्रदर्शनी ने लोगों को गांब की पुरानी संस्कृति से जोडऩे का काम किया। चौपाल के सामने स्थित विशाल पीपल का वृक्ष और पास का प्राचीन कुआं इस स्थल को ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करते हैं। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोडऩे और सामाजिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। Greater Noida News:
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