पिता की अनुपस्थिति उस पल को फीका नहीं कर सकी। क्योंकि 50 सैनिकों ने कदम आगे बढ़ाया वर्दी में, आत्म-सम्मान और सम्मान के साथ। अचानक एक बस गांव में आई, पूरी वर्दी में जवान बैठे थे। देखते ही देखते, 50 जवान शादी के पंडाल में आए और उन्होंने आगे बढ़कर कन्यादान की पावन जिम्मेदारी उठाई।

Greater Noida news : ग्रेटर नोएडा के डाबरा गांव में मंगलवार की शाम एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहाँ मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। यह दिन था, एक शहीद की बेटी की शादी। पर इस शादी में पिता नहीं था क्योंकि 2006 में कश्मीर के बारामूला में आतंकवादी हमले में सुरेश सिंह भाटी शहीद हो चुके थे। मंगलवार को जब उनकी बेटी की शादी थी तो पंजाब से सेना के पचास जवान उसे आशिर्वाद देने और शादी को सकुशल संपन्न कराने शादी में शामिल हुए। उनकी मौजूदगी ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
पिता की अनुपस्थिति उस पल को फीका नहीं कर सकी। क्योंकि 50 सैनिकों ने कदम आगे बढ़ाया वर्दी में, आत्म-सम्मान और सम्मान के साथ। अचानक एक बस गांव में आई, पूरी वर्दी में जवान बैठे थे। देखते ही देखते, 50 जवान शादी के पंडाल में आए और उन्होंने आगे बढ़कर कन्यादान की पावन जिम्मेदारी उठाईपंडाल में खड़ी हर आंख उस पल को देख हुई नमपंडाल में खड़ी हर आंख उस पल नम हो गई। गांव वालों ने, रिश्तेदारों ने, बारात-वाले आये थे, सब का दिल झूम उठा। जवानों ने ना सिर्फ रस्म निभाई, बल्कि शहीद की बहादुरी के किस्से सुनाये, उनकी पुण्य-यात्रा याद की, और बहादुर पिता की जगह की भरपाई के लिए वो लोग वहाँ मौजूद थे। बेटी को आशीर्वाद दिया गया, उनका हाथ दूल्हे के हाथ में सौंपा गया। वो पल, एक आम शादी से कहीं ज्यादा था। यह था सम्मान, प्यार, वफादारी और देशभक्ति का मिलन।
विदाई के समय भी पूरा माहौल पवित्र था। जवानों ने परिवार को भरोसा दिलाया कि शहीद अकेला नहीं होता, उसका परिवार हमारा परिवार है और जैसा उन्होंने किया वो सिर्फ एक रस्म नहीं, एक संदेश था कि बलिदान को भूला नहीं जा सकता सम्मान और साथ हमेशा मौजूद रहेगा। यह घटना सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं, यह वो कहानी है जो हर वीर-परिवार को बताती है कि उनका दुख, उनकी याद, उनकी जिम्मेदारी पूरा देश मानता है। ऐसी भावनाओं को देखकर लगता है कि देशभक्ति सिर्फ खिड़की के बाहर नहीं, हमारे घरों, हमारे रीति-रिवाजों, हमारे रिश्तों में भी बसती है।
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