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Greater Noida News: कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें धरना स्थल से जबरन हटाया गया इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और कुछ कर्मचारियों पर लाठी भी चली। दूसरी ओर, पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने लाठीचार्ज या किसी तरह की मारपीट से साफ इनकार किया है।

ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित जिम्स अस्पताल (GIMS) में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल के 10वें दिन बुधवार रात माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे कर्मचारियों को हटाने के लिए पुलिस पहुंची जिसके बाद कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और हंगामे की स्थिति बन गई। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें धरना स्थल से जबरन हटाया गया इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और कुछ कर्मचारियों पर लाठी भी चली। दूसरी ओर पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने लाठीचार्ज या किसी तरह की मारपीट से साफ इनकार किया है।
जिम्स अस्पताल में काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारी पिछले 10 दिनों से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से अस्पताल में काम कर रहे हैं और कोविड जैसे मुश्किल दौर में भी उन्होंने लगातार सेवाएं दीं इसलिए अब उन्हें नौकरी की सुरक्षा और स्थायी नियुक्ति मिलनी चाहिए। दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सरकारी नियमों के तहत नियमित पदों पर भर्ती केवल तय चयन प्रक्रिया और परीक्षा के जरिए ही हो सकती है। प्रशासन ने यह भी कहा है कि मौजूदा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं अचानक खत्म नहीं की जा रही हैं और अस्पताल उनकी चिंताओं से अवगत है। हड़ताल 15 जून से चल रही है और शुरुआत में इसका असर अस्पताल की सेवाओं पर साफ दिखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या काफी घट गई थी। ओपीडी, रजिस्ट्रेशन और कई गैर-चिकित्सीय सेवाओं पर दबाव बढ़ा। बाद में अस्पताल प्रबंधन ने वैकल्पिक इंतजाम कर सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की। इसी बीच कर्मचारी ओपीडी पर्ची हॉल के पास दिन-रात धरने पर बैठे रहे।
धरने पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि बुधवार रात करीब 10 बजे कासना कोतवाली पुलिस अस्पताल पहुंची और वहां बैठे कर्मचारियों को हटाने लगी। कर्मचारियों के मुताबिक, पुरुष और महिला कर्मचारियों को वहां से जबरन उठाया गया। उनका कहना है कि इस दौरान धक्का-मुक्की हुई, कुछ लोगों को खींचकर हटाया गया और कई कर्मचारी घायल हो गए। कुछ कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया जिसमें एक महिला कर्मचारी के सिर पर चोट लगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे और अपनी मांगों को लेकर बैठे थे लेकिन अचानक रात में कार्रवाई कर उन्हें हटाया गया। उनका आरोप है कि घायल कर्मचारियों को बाद में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
कासना कोतवाली पुलिस ने कर्मचारियों के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि धरना खत्म कराने के लिए किसी तरह का बल प्रयोग या लाठीचार्ज नहीं किया गया। पुलिस के मुताबिक, जब टीम अस्पताल पहुंची तो किसी भी पुलिसकर्मी के पास लाठी नहीं थी। उनका कहना है कि कर्मचारी ओपीडी हॉल में बैठे थे जहां सुबह मरीजों की काफी भीड़ रहती है और धरने की वजह से मरीजों के इलाज और अस्पताल के कामकाज में परेशानी हो रही थी। पुलिस का यह भी कहना है कि कर्मचारियों से पहले दूसरी जगह बैठने के लिए कहा गया था लेकिन जब वे नहीं माने तो उन्हें उठाकर पास के दूसरे स्थान पर बैठा दिया गया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई केवल अस्पताल की व्यवस्था बनाए रखने और मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखकर की गई थी न कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए।
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