
Greater Noida : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा पारित आदेश को वैधानिक चुनौती देने का फैसला लिया है। इस आदेश में कई वैधानिक त्रुटियां हैं तथा भ्रम की स्थिति है। नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।
नोएडा प्राधिकरण की ओर से कहा गया है कि अदालत के आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि आदेश का अनुपालन न करने का दंड किस मुख्य कार्यपालक अधिकारी पर लागू होगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की वर्तमान (सीईओ) रितु माहेश्वरी को इस वाद में नाम से पक्षकार नहीं बनाया गया है। इसलिए यह आदेश ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की वर्तमान सीईओ पर लागू नहीं होता है।
प्राधिकरण का तर्क है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 1000-25000 वर्ग मीटर तक के भूखंड का ऑफर देते हुए 10 सितंबर 2014 को 9810 रूपये प्रति वर्ग मीटर की दर से प्रोविजनल आबंटन पत्र जारी कर दिया था। वर्ष 2014 में महेश मित्रा ने उक्त दर पर ऑफर को स्वीकार नहीं किया था और न ही अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट दी थी। बल्कि वे आदेश का पुन: अनुपालन कराने के लिए जिला उपभोक्ता फोरम सीईओ ने 3 अप्रैल 2018 को जिला उपभोक्ता फोरम में आदेश का अनुपालन हलफनामा भी दाखिल किया था। वर्ष-2018-2022 के मध्य तक जिला उपभोक्ता फोरम में लगातार सुनवाई चल रही है तथा प्राधिकरण की ओर से लिखित बहस वर्ष-2019 में दाखिल कर दी गयी थी।
इससे स्पष्ट है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्ष-2014 में राष्ट्रीय उपभोक्त फोरम के आदेश का अनुपालन कर दिया गया था तथा वर्ष-2018 में सीईओ द्वारा अनुपालन हलफनामा भी दाखिल किर दिया गया था। इसके बाद भी जिला उपभोक्ता फोरम ने वर्तमान मुख्य कार्यपालक को पक्षकार बनाये बिना 7 जनवरी-2023 को आदेश पारित कर दिया। जिसमें कहा गया है कि 30 मई 2014 को अनुपालन आदेश 7 जनवरी की तिथि से 15 दिवस में दें। यदि अनुपालन नहीं हुआ तो गिरफ्तारी वारंट जारी होगा तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी को एक माह के कारावास से दंडित किया जाएगा।