पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सहरियार ने 16 नवंबर 2025 को महिला रूपा पुत्री कुलेश्वर सिंह, निवासी मधुबनी, बिहार के साथ मिलकर 8,000 रुपये महीने पर कमरा किराए पर लिया था। दोनों ने मकान मालिक के समक्ष खुद को पति–पत्नी बताया और 17 नवंबर को शिफ्ट होकर रहने लगे थे।

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-1 में किराए के मकान में रह रहे बांग्लादेशी मूल के एक युवक ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर जान दे दी। मामले की सूचना पर पहुंची थाना बीटा-2 पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जबकि युवक के साथ उसी कमरे में रहने वाली महिला का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
थाना बीटा-2 प्रभारी के अनुसार, बीटा-1 सेक्टर में रहने वाले एक मकान मालिक ने पुलिस को फोन कर जानकारी दी कि उनके यहां किरायेदार के रूप में रह रहे युवक ने कमरे के अंदर फांसी लगा ली है। टीम तुरंत मौके पर पहुंची, दरवाजा खोलकर अंदर देखा तो युवक का शव फंदे से लटका हुआ मिला। पंचनामा भरने के बाद पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
प्रारंभिक जांच में मृतक की पहचान सहरियार पुत्र अब्दुल अलीम, निवासी मोनू बिपदा कालिया चौधरी, सिरसागंज सिटी (बांग्लादेश) के रूप में हुई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सहरियार ने 16 नवंबर 2025 को महिला रूपा पुत्री कुलेश्वर सिंह, निवासी मधुबनी, बिहार के साथ मिलकर 8,000 रुपये महीने पर कमरा किराए पर लिया था। दोनों ने मकान मालिक के समक्ष खुद को पति–पत्नी बताया और 17 नवंबर को शिफ्ट होकर रहने लगे थे।
मकान मालिक ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि 21 नवंबर को रूपा कमरे से कहीं चली गई और उसके बाद से वापस नहीं लौटी। इसके बाद सहरियार का मोबाइल फोन भी लगातार स्विच ऑफ आने लगा। उन्हें शक हुआ तो बीती शाम उन्होंने कमरे की खिड़की से भीतर झांककर देखा, जहां सहरियार फांसी के फंदे पर लटका दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही थाना बीटा-2 पुलिस के साथ फील्ड यूनिट की टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। थाना प्रभारी ने बताया कि मृतक के परिजनों को बांग्लादेश में सूचना भेज दी गई है। कमरे में सहरियार के साथ रह रही रूपा की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस उसके मोबाइल नंबर और अन्य संपर्क सूत्रों के आधार पर तलाश कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।