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नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में सक्रिय वकीलों की संस्था जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन एक बार फिर चर्चा में है। बार एसोसिएशन के नाम से प्रसिद्ध इस संस्था के अध्यक्ष मनोज भाटी के विरूद्ध बड़ा आरोप लगाया गया है।

Greater Noida News : नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में सक्रिय वकीलों की संस्था जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन एक बार फिर चर्चा में है। बार एसोसिएशन के नाम से प्रसिद्ध इस संस्था के अध्यक्ष मनोज भाटी के विरूद्ध बड़ा आरोप लगाया गया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी के विरूद्ध यह आरोप बाकायदा एक प्रेस नोट जारी करके लगाया गया है। प्रेस नोट में आरोप है कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं प्रेस नोट में यह आरोप भी है कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी ने सरकारी जमीन के नाम पर डेढ़ करोड़ रूपए की अवैध उगाही कर ली है। Greater Noida News
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी के विरूद्ध यह बड़ा आरोप ग्रेटर नोएडा में रहने वाले सामाजिक तथा राजनीतिक कार्यकर्ता वीरेन्द्र सिंह उर्फ गुड्डू ने लगाया है। यह वही वीरेन्द्र सिंह उर्फ गुड्डू हैं जिन्होंने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी के विरूद्ध थाने में FIR दर्ज करा रखी है। मनोज भाटी के विरूद्ध दर्ज FIR में उनके ऊपर फर्जी डिग्री लेकर गैर कानूनी ढंग से वकालत करने का गंभीर आरोप है। ग्रेटर नोएडा पुलिस FIR की जांच कर रही है। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी ने फर्जी डिग्री के मामले में अदालत से अग्रिम जमानत ले रखी है। Greater Noida News
एक प्रेस नोट जारी करके वीरेन्द्र सिंह गुड्डू ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी के विरूद्ध बड़ा आरोप लगाया है। वीरेन्द्र सिंह उर्फ गुड्डू के द्वारा जारी प्रेस नोट को हम यहां ज्यों का त्यों प्रकाशित कर रहे हैं। इस प्रेस नोट में कहा गया है कि जिला न्यायालय सूरजपुर गौतम बुद्ध नगर तथा जिला उपभोक्ता फोरम के मध्य बनी दीवार से जिला जज गौतमबुद्धनगर, जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर तथा डीसीपी सेंट्रल जोन की संतुति पर मान्य उच्च न्यायालय द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद जिला न्यायालय परिसर से जिला उपभोक्ता फोरम में अधिवक्ताओं के सुगम आवागमन हेतु गेट खोला गया था गेट खुलने के बाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी द्वारा सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए चैंबर विहीन अधिवक्ताओं जिला उपभोक्ता फोरम तथा जिला न्यायालय परिसर की दीवार के मध्य खुले गेट के सामने पड़ी प्राधिकरण की सरकारी भूमि पर चैंबर निर्माण करने का प्रस्ताव बार एसोसिएशन के लेटर हेड पर कर एक चैंबर की 600000 रूपये लागत तय कर पहली किस्त के तौर पर 600 से अधिक अधिवक्ताओं से 25000-25000 रूपये वसूल लिए गए तथा निर्माण कार्य शुरू कर दिया सरकारी भूमि पर अवैध तरीके से निर्माण कार्य शुरू होने के बाद शिकायत का दौर शुरू हुआ। प्रेस नोट में आगे लिखा गया है कि वीरेंद्र उर्फ गुड्डू जिसके द्वारा मनोज भाटी के विरुद्ध पहले भी। फर्जी डिग्री का मुकदमा दर्ज कराया गया था की शिकायत पर जिलाधिकारी ने उक्त भूमि के संबंध में एक जांच कमेटी गठित की जिसकी रिपोर्ट के बाद जानकारी हुई कि यह ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की अर्जित वह कब्ज प्राप्त भूमि है पोल खुलने पर मनोज भाटी द्वारा अधिवक्ताओं के गुस्से से बचने के लिए तथा मुठमर्दी करते हुए भरोसा दिलाने के लिए जिलाधिकारी तथा प्राधिकरण में भी ज्ञापन दिया गया जिस कारण ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण को इस अवैध कब्जा व निर्माण की जानकारी होने पर मनोज भाटी को संबोधित करते हुए 18/5/2026 को एक पत्र जारी किया जिस पर मनोज भाटी द्वारा उसी नोटिस की फोटो प्रति प्रति पर दस्तावेजी साक्ष्य मांगने पर यह लिखते हुए कि स्वीकृत नक्शा तथा स्ट्रक्चर ड्राइंग की कॉपी प्रेषित की जा चुकी है। प्राधिकरण को भेज दिया गया जबकि ऐसा कोई दस्तावेज मनोज भाटी द्वारा प्राधिकरण में आज तक नहीं भेजा गया है। उक्त नोटिस पर लिखी गई टिप्पणी के प्राप्त होने पर तथा प्राधिकरण के रिकॉर्ड में कोई साक्ष्य न मिलने पर प्राधिकरण द्वारा 19/0 5 2026 को पुन: एक नोटिस जारी करते हुए निर्माण कार्य को रोकने तथा 3 कार्य दिवस में जवाब देने का नोटिस जारी किया जिसको मनोज भाटी द्वारा लेने से इंकार करने पर निर्माण स्थल पर प्राधिकरण के कर्मचारी द्वारा चस्पा किया गया। निर्माण कार्य न रुकने पर उन्हें 20/5/2025 को धारा 10 का नोटिस यह कहते हुए कि अवैध निर्माण कार्य जो सरकारी भूमि पर चल रहा है तुरंत बंद किया जाए तथा निर्माण सामग्री व निर्मित अवैध भवन को हटाया जाए अन्यथा की स्थिति में प्राधिकरण द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी जिसके समस्त खर्चे की जिम्मेदारी आपसे वसूली जाएगी। किंतु मनोज भाटी द्वारा उक्त तीनों नोटिसों के बारे में किसी भी अधिवक्ता को नहीं बताया अधिवक्ताओ द्वारा अपनी निजी जानकारी के माध्यम से नोटिसों की जानकारी होने तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी से सवाल जवाब का दौर शुरू हो गया। अब जिन अधिवक्ता ने चैंबर निर्माण की लागत के नाम पर छह सौ से अधिक अधिवक्ताओं ने चैंबर मिलने की आस में दिए गए। 25000- 25000 रूपए से इक_ी हुई लगभग डेढ़ करोड़ रकम फंसने और ठगी होने का शिकार बनने का डर सताने लगा मनोज भाटी द्वारा चैंबर के निर्माण हेतु निर्माण एजेंसी नियत करने के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापन जारी होने के बाद किस किस निर्माण कर्ता कंपनी द्वारा निर्माण करने हेतु आवेदन किया गया उनमें से किस निर्माण एजेंसी को चेंबर निर्माण का ठेका दिया कितने रुपये की लागत में दिया तथा उसका नक्शा तथा निर्माण की समय सीमा की जानकारी भी आज तक बार एसोसिएशन के नोटिस बोर्ड तथा जर्नल बॉडी में जानकारी के तौर पर नहीं दी गई इसके अलावा पात्रता सूची भी जारी न होने से भी अधिवक्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है तथा अधिवक्ता उक्त फंड का गबन करने का दोष भी लगाने लगे हैं किंतु मनोज भाटी द्वारा चैंबर के संबंध में कोई बयान सरकारी भूमि पर बन रहे चेंबर निर्माण तथा उनकी सुरक्षा के संबंध में जारी नहीं किया गया। इसके अलावा चैंबर का साइज 12X9 वर्ग फिट में 4 अधिवक्ताओं को देने की बात कही गई है प्रत्येक अधिवक्ता से 150000 रूपए अर्थात एक चैंबर की कीमत 600000 रूपये तथा 420 लोगों को 105 चैंबरों में आवंटित करने की बात कही गई थी। यदि बहुमंजिला इमारत जिस भूमि पर बनाई जा रही है उसके सरकारी भूमि होने के कारण बिल्डिंग के नक्शे की स्वीकृति प्राधिकरण द्वारा नहीं करने के कारण विद्युत कनेक्शन, फायर की एनओसी किसी भी हालत में नहीं मिलेगी जिससे अधिवक्ताओं द्वारा दी गई रकम और उनके चैंबर के नाम पर बनी बिल्डिंग इस्तेमाल लायक नहीं हो पाएगी। अभिवक्ताओं का यह कहना है कि हमने मनोज भाटी पर नहीं बल्कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पर भरोसा किया था किंतु शिकायत का दौर शुरू होने के बाद हमें पता चला है कि यह भूमि सरकारी है जिसकी बाबत न तो जिला जज साहब से निर्माण से पूर्व कोई अनुमति ली नहीं जिलाधिकारी तथा प्राधिकरण से कोई अनुमति ली गई। उल्टे ज्यादा पैसे इकठ्ठा करने की एवज में 420 अधिवक्ताओं के स्थान पर 600 से अधिक अधिवक्ताओं से आवेदन के नाम पर 25-25000 रूपये वसूल का 15000000 रूपये इकठ्ठा कर लिया गया। अधिवक्ताओं का यह भी आरोप है कि चैंबर के नाम पर बार एसोसिएशन चार पूर्व कार्यकारिणी। द्वारा बार एसोसिएशन के खाते पंजाब नेशनल बैंक शाखा जिला न्यायालय परिसर मे जमा किए गए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की एफडी को भी बिना किसी को भरोसे में लिए शपथ पत्र देकर एफडी को ड्रा कर बैंक खाते से निकाल लिया गया यदि सरकारी भूमि पर हो रही निर्माण प्रक्रिया बंद हो जाती है अब तक। उक्त निर्माण में लाखों रुपये हुए खर्च की भरपाई कौन करेगा इस बात की जवाबदेही बार एसोसिएशन को देनी पड़ सकती है। Greater Noida News
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