लगातार दूसरी बार है जब एक महीने के भीतर ग्रेटर नोएडा देश में सबसे प्रदूषित शहर बना है। इसने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

दिल्ली-एनसीआर इन दिनों गंभीर वायु प्रदूषण से जूझ रहा है। मंगलवार को स्थिति सबसे खराब ग्रेटर नोएडा में रही, जहाँ एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 454 दर्ज किया गया। जो कि खतरनाक श्रेणी में आता है। यह लगातार दूसरी बार है जब एक महीने के भीतर ग्रेटर नोएडा देश में सबसे प्रदूषित शहर बना है। इसने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा ही नहीं, बल्कि पूरा एनसीआर जूझ रहा है। मंगलवार को देश के शीर्ष पाँच प्रदूषित शहरों में से चार शहर इसी क्षेत्र के रहे।
1. ग्रेटर नोएडा एक्यूआई 454
2. गाजियाबाद एक्यूआई 434
3. हापुड़ एक्यूआई 398
4. बागपत एक्यूआई 397
5. नोएडा एक्यूआई 390
लगातार 11 दिनों से यह क्षेत्र गंभीर से खतरनाक वायु गुणवत्ता वाले स्तर में बना हुआ है। 14 से 18 नवंबर तक ग्रेटर नोएडा के एक्यूआई में लगातार उतार-चढ़ाव रहा लेकिन यह हर दिन खतरनाक श्रेणी के आसपास ही रहा।
* 14 नवंबर: एक्यूआई 377
* 15 नवंबर: एक्यूआई 368
स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का कहना है कि प्राधिकरण तथा प्रशासन की ढिलाई के कारण हालात बदतर हुए हैं। न तो सड़क धूल नियंत्रण की उचित व्यवस्था की गई है, न ही खुले में कचरा जलाने, निर्माण कार्यों और वाहनों से निकलने वाले धुएँ पर प्रभावी अंकुश है। पूरा दिल्ली-एनसीआर इस समय धुंध और प्रदूषण की घनी चादर में लिपटा हुआ है। आसमान साफ दिखाई नहीं देता और दृश्यता बेहद कम हो गई है। खासकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) में हालात सबसे गंभीर बताए जा रहे हैं।
खतरनाक स्तर का प्रदूषण लोगों की सेहत पर गहरा असर डाल रहा है। सबसे आम समस्याएँ हैं। आंखों में तेज जलन, सांस लेने में कठिनाई, गले में खराश और सूखापन, सिरदर्द और थकान, अस्थमा और हार्ट पेशेंट के लिए बड़ा खतरा है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें, मास्क पहनें और एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करें। डॉक्टरों ने विशेष रूप से इस बात की हिदायत दी है कि यदि आवश्यक न हो तो अपने घरों से बाहर न निकलें।
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