ग्रेटर नोएडा को गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू हुई, शहर के कई सेक्टरों में गंगाजल की आपूर्ति भी पहुंची, लेकिन सेक्टर बीटा-1 के लोगों की परेशानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यहां पानी की सप्लाई आने के बावजूद कम प्रेशर की शिकायत लगातार सामने आ रही है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा को गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू हुई, शहर के कई सेक्टरों में गंगाजल की आपूर्ति भी पहुंची, लेकिन सेक्टर बीटा-1 के लोगों की परेशानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यहां पानी की सप्लाई आने के बावजूद कम प्रेशर की शिकायत लगातार सामने आ रही है। स्थिति यह है कि कई बार पर्याप्त दबाव नहीं होने के कारण घरों की टंकियां तक ठीक से नहीं भर पातीं। सेक्टर बीटा-1 के निवासी अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर जब शहर में गंगाजल पहुंच रहा है और जलापूर्ति व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, तो घर की टंकी तक पानी पर्याप्त दबाव के साथ क्यों नहीं पहुंच रहा? RWA बीटा-1 के महासचिव एवं एक्टिव सिटीजन टीम से जुड़े हरेंद्र भाटी ने इस समस्या को गंभीरता से उठाते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों से नियमित, पर्याप्त और निर्धारित दबाव के साथ जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि समस्या का बार-बार अस्थायी समाधान करने के बजाय इसकी मूल वजह तलाशकर स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। Greater Noida News
ग्रेटर नोएडा में गंगाजल पहुंचाने की योजना वर्ष 2005 में तैयार की गई थी। अपर गंगा कैनाल से ग्रेटर नोएडा तक पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 2012 से 2014 के बीच लगभग 176 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया गया। इस परियोजना पर करीब 848 करोड़ रुपये खर्च हुए और इसकी क्षमता 85 क्यूसेक यानी लगभग 210 MLD बताई गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 नवंबर 2022 को इस परियोजना का शुभारंभ किया था। शुरुआती चरण में 28 सेक्टरों में करीब चार लाख लोगों तक गंगाजल पहुंचाने की योजना बताई गई थी। बाद में प्राधिकरण ने गंगाजल आपूर्ति का दायरा बढ़ाया। 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और एटा समेत नौ सेक्टरों में 100 प्रतिशत गंगाजल आपूर्ति होने की जानकारी प्राधिकरण की ओर से दी गई थी। पूरी क्षमता पर परियोजना से 210 MLD पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य बताया गया था। ऐसे में बीटा-1 जैसे सेक्टर में कम प्रेशर की शिकायत स्वाभाविक रूप से व्यवस्था की अंतिम कड़ी पर सवाल खड़े करती है। Greater Noida News
बीटा-1 में पानी के कम दबाव की शिकायत अचानक सामने नहीं आई है। जुलाई 2024 में भी ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में पानी का दबाव बेहद कम होने की खबर सामने आई थी। उस समय बीटा-1 में करीब 5,000 निवासियों के प्रभावित होने की बात कही गई थी। उस दौरान पानी का दबाव इतना कम था कि कई घरों में ग्राउंड फ्लोर की टंकियों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था। कुछ स्थानों पर पानी की आपूर्ति पूरी तरह रुकने की भी शिकायत सामने आई थी। प्राधिकरण के स्तर पर पाइपलाइन में लीकेज और गंगाजल में सिल्ट जैसी वजहों की चर्चा भी हुई थी। यानी सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि आज पानी का प्रेशर कम क्यों है। बड़ा सवाल यह है कि बार-बार सामने आने वाली समस्या का स्थायी तकनीकी समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया? Greater Noida News
जनवरी 2025 में भी बीटा-1 में करीब दो सप्ताह से पानी का प्रेशर कम होने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग के अधिकारियों ने सेक्टरवासियों के साथ बैठक की थी। बैठक में सेक्टरवासियों ने गंगाजल की लाइनों में टूट-फूट और जगह-जगह पाइपलाइन की समस्या को कम प्रेशर से जोड़ते हुए शिकायत रखी थी। अधिकारियों ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था। बैठक में हरेंद्र भाटी समेत सेक्टर के कई निवासी मौजूद थे। फरवरी 2025 में भी बीटा-1 समेत कई क्षेत्रों में कम प्रेशर, पाइपलाइन लीकेज और जलापूर्ति की अवधि कम होने जैसी शिकायतें सामने आई थीं। उस समय भी हरेंद्र भाटी ने बीटा-1 में कम दबाव और पानी की व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को उठाया था। Greater Noida News
गंगाजल परियोजना का पानी केवल मुख्य पाइपलाइन तक पहुंच जाना ही पर्याप्त नहीं है। असली कसौटी यह है कि सेक्टर के प्रत्येक घर तक पर्याप्त मात्रा और पर्याप्त दबाव के साथ पानी पहुंचे। बीटा-1 की मौजूदा शिकायत के संदर्भ में प्राधिकरण के सामने कई तकनीकी सवाल हैं —
- क्या सेक्टर बीटा-1 को निर्धारित मात्रा में पानी मिल रहा है?
- सेक्टर तक पहुंचने वाली मुख्य पाइपलाइन में कहीं लीकेज तो नहीं?
- पाइपलाइन में सिल्ट या अन्य अवरोध की समस्या तो नहीं?
- पंपिंग सिस्टम पर्याप्त क्षमता से काम कर रहा है या नहीं?
- भूमिगत जलाशय से वितरण लाइन तक पर्याप्त दबाव बन रहा है या नहीं?
- सेक्टर के अलग-अलग ब्लॉकों में वास्तविक जल दबाव कितना है?
- क्या कहीं पाइपलाइन नेटवर्क में तकनीकी असंतुलन के कारण कुछ हिस्सों में पानी का दबाव कम हो रहा है?
इन सवालों का जवाब किसी अनुमान से नहीं बल्कि तकनीकी जांच और वास्तविक जल दबाव के आंकड़ों से मिलना चाहिए। Greater Noida News
बीटा-1 के निवासियों की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब प्राधिकरण जलापूर्ति की पूरी श्रृंखला की जांच करे। यह देखा जाना चाहिए कि जलाशय से निकलने वाले पानी की मात्रा कितनी है, सेक्टर की मुख्य लाइन में दबाव कितना है और अलग-अलग ब्लॉक में उपभोक्ता स्तर पर कितना दबाव पहुंच रहा है। यदि कहीं पाइपलाइन में लीकेज है तो उसकी मरम्मत होनी चाहिए। यदि पंपिंग क्षमता समस्या है तो उसे अपग्रेड किया जाना चाहिए। यदि वितरण नेटवर्क में तकनीकी खामी है तो उसका पुनर्गठन किया जाना चाहिए। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहले भी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर करने के लिए पंप हाउस के आधुनिकीकरण और ऑटोमेशन की दिशा में कदम उठाने की बात कह चुका है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने 210 एमएलडी पेयजल आपूर्ति की आवश्यकता का भी उल्लेख किया था। Greater Noida News
गंगाजल परियोजना की मूल भावना यह थी कि ग्रेटर नोएडा के लोगों को बेहतर गुणवत्ता का पानी उपलब्ध हो और भूजल पर निर्भरता कम हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परियोजना के उद्घाटन के समय भी गंगाजल को लोगों के घरों तक पहुंचाने की बात कही थी। परियोजना की लागत और क्षमता को देखते हुए शहरवासियों की अपेक्षा भी यही है कि उन्हें नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति मिले। इसलिए बीटा-1 की शिकायत को सिर्फ स्थानीय स्तर की छोटी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि किसी सेक्टर में बार-बार कम प्रेशर की शिकायत आती है तो यह वितरण व्यवस्था की कार्यप्रणाली की समीक्षा का विषय बन जाता है। Greater Noida News
RWA बीटा-1 के महासचिव हरेंद्र भाटी की मांग का मूल मुद्दा भी यही है कि समस्या का केवल तत्काल समाधान नहीं किया जाए। पानी कुछ घंटे ठीक दबाव से आ गया और फिर समस्या दोबारा शुरू हो गई—यह स्थायी समाधान नहीं है। सेक्टरवासियों की मांग है कि प्राधिकरण संबंधित अधिकारियों और तकनीकी टीम के माध्यम से बीटा-1 की जलापूर्ति व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण कराए। पाइपलाइन, पंपिंग स्टेशन, जलाशय, लीकेज और वितरण नेटवर्क की जांच के साथ वास्तविक जल दबाव का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाए। Greater Noida News
गंगाजल परियोजना पर करीब 848 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और इसकी क्षमता 85 क्यूसेक यानी लगभग 210 MLD बताई गई है। ऐसे में यदि पानी उपलब्ध है लेकिन वह पर्याप्त दबाव के साथ लोगों के घरों तक नहीं पहुंच रहा, तो जिम्मेदारी तय करने से पहले समस्या की तकनीकी वजह सार्वजनिक करना जरूरी है। क्या समस्या मुख्य पाइपलाइन में है? क्या समस्या पंपिंग सिस्टम में है? क्या जलाशय से पर्याप्त दबाव नहीं बन रहा? क्या सेक्टर की आंतरिक पाइपलाइन में लीकेज है? या फिर वितरण व्यवस्था में ही कोई तकनीकी कमी है? बीटा-1 के लोग अब इन सवालों का जवाब चाहते हैं।
हरेंद्र भाटी का कहना है कि सेक्टरवासियों को अस्थायी राहत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। प्राधिकरण को समस्या की जड़ तक पहुंचकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीटा-1 के प्रत्येक ब्लॉक और प्रत्येक घर तक नियमित तथा पर्याप्त दबाव के साथ पानी पहुंचे। बीटा-1 की यह समस्या अब केवल पानी के कम प्रेशर की शिकायत नहीं रह गई है। यह सवाल शहर की जलापूर्ति व्यवस्था, करोड़ों रुपये की गंगाजल परियोजना और उसकी अंतिम डिलीवरी प्रणाली से जुड़ गया है। अब निगाहें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर हैं कि वह इस शिकायत की तकनीकी जांच कराकर जनता को बताएगा कि आखिर गंगाजल की पाइपलाइन में पानी होने के बावजूद बीटा-1 की टंकियां पूरी तरह क्यों नहीं भर पा रही हैं। Greater Noida News
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