ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन को लेकर लंबे समय से अटकी विस्तार योजना अब जमीन पर उतरती नजर आ रही है। जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रमुख अड़चनें दूर होने के बाद इस परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन को लेकर लंबे समय से अटकी विस्तार योजना अब जमीन पर उतरती नजर आ रही है। जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रमुख अड़चनें दूर होने के बाद इस परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के तहत ग्रेटर नोएडा के इस क्षेत्र को बड़े यातायात केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने से ग्रेटर नोएडा को रेलवे, मेट्रो और बस कनेक्टिविटी के बड़े नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
बोड़ाकी के पास विकसित होने वाले मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए 137 एकड़ जमीन की जरूरत थी। इस जमीन के करीब आधे हिस्से पर आबादी बसी हुई थी, जिससे परियोजना लंबे समय से फंसी हुई थी। अब ग्रेटर नोएडा के आसपास के सात गांवों के करीब 1500 परिवारों ने जमीन देने पर सहमति जता दी है। इसके बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए आगे की प्रक्रिया आसान हो गई है। माना जा रहा है कि ग्रेटर नोएडा में यह सहमति इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे बड़ी बाधा को खत्म कर चुकी है। प्रस्तावित योजना के तहत ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन का बड़ा विस्तार किया जाएगा। स्टेशन के विस्तार में 13 नए प्लेटफॉर्म तैयार किए जाने हैं, जो बोड़ाकी से खुर्जा की दिशा में विकसित होंगे। इस विस्तार के बाद स्टेशन और यार्ड का कुल क्षेत्रफल लगभग 267 एकड़ तक पहुंच जाएगा। रेलवे की नजर में ग्रेटर नोएडा का बोड़ाकी स्टेशन भविष्य में एनसीआर का एक प्रमुख वैकल्पिक टर्मिनल बन सकता है, जहां से बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
यह पूरी परियोजना 358 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। ग्रेटर नोएडा में बनने वाले इस मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में आईएसबीटी, क्षेत्रीय बस टर्मिनल, मेट्रो ट्रांजिट सिस्टम और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जरूरी ढांचा तैयार होगा। दूसरे हिस्से में बोड़ाकी रेलवे स्टेशन का विस्तार किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य ग्रेटर नोएडा को ऐसा ट्रांसपोर्ट केंद्र बनाना है, जहां यात्रियों को अलग-अलग परिवहन सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकें।
बोड़ाकी स्टेशन के विस्तार के बाद ग्रेटर नोएडा से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाली करीब 70 ट्रेनों के संचालन की योजना है। इससे यात्रियों को दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि ग्रेटर नोएडा में इस बड़े स्टेशन के विकसित होने से दिल्ली के स्टेशनों पर बढ़ता दबाव कम होगा और ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। ग्रेटर नोएडा के इस प्रोजेक्ट की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यहां मेट्रो, बस और रेलवे को आपस में जोड़ा जाएगा। एक्वा लाइन मेट्रो को बोड़ाकी स्टेशन तक बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है। डिपो से बोड़ाकी तक मेट्रो विस्तार होने के बाद ग्रेटर नोएडा के यात्रियों को सीधी और आसान कनेक्टिविटी मिल सकेगी। बस डिपो के लिए 12.5 एकड़, मेट्रो के लिए 5.5 एकड़ और कॉमर्शियल गतिविधियों के लिए 65 एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। इन सभी सुविधाओं को जोड़ने के लिए आरओबी, एफओबी, स्काईवॉक और सबवे जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी।
ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी, चमरावली, दादरी, तिलपता, करनवास, पाली, पल्ला और चमरावली रामगढ़ क्षेत्र के कुल 1800 परिवार इस परियोजना से प्रभावित होंगे। जिन परिवारों के घर या जमीन अधिग्रहित किए जाएंगे, उन्हें शिव नाडर यूनिवर्सिटी के पीछे नए प्लॉट दिए जाने की योजना है। प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि ग्रेटर नोएडा में विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार दिल्ली के बड़े रेलवे स्टेशनों पर पहले से ही भारी दबाव है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी स्टेशन को बड़े स्तर पर विकसित करना भविष्य की जरूरत माना जा रहा है। यदि यह योजना तय ढांचे के अनुसार आगे बढ़ती है, तो ग्रेटर नोएडा न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पूर्वी भारत की रेल कनेक्टिविटी का भी अहम केंद्र बन सकता है।