ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की बड़ी खबर यह है कि बच्चे की मौत के आरोपी ठेकेदार को अदालत ने जमानत देने से साफ मना कर दिया है। लम्बी सुनवाई के बाद ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में स्थित गौतमबुद्ध नगर की जिला अदालत ने बच्चे की मौत के जिम्मेदार ठेकेदार की जमानत अर्जी को रद्द कर दिया है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आई है। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की बड़ी खबर यह है कि बच्चे की मौत के आरोपी ठेकेदार को अदालत ने जमानत देने से साफ मना कर दिया है। लम्बी सुनवाई के बाद ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में स्थित गौतमबुद्ध नगर की जिला अदालत ने बच्चे की मौत के जिम्मेदार ठेकेदार की जमानत अर्जी को रद्द कर दिया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तथा ठेकेदार की गलती से खोदे गए गड्ढे में डूबने से मासूम बच्चे की मौत हो गई थी। Greater Noida News
आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र स्थित एक आवासीय सोसाइटी में छह वर्षीय मासूम मौत के चर्चित मामले में आरोपी ठेकेदार मनोज जैन को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ), गौतमबुद्ध नगर मयूर जैन की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला साधारण लापरवाही का नहीं, बल्कि जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी से जुड़े गंभीर अपराध का प्रतीत होता है। इसलिए आरोपी को जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। अदालती आदेश के अनुसार, 25 जुलाई 2026 की शाम करीब 5:30 से 6:00 बजे के बीच नॉलेज पार्क-2 स्थित एक आवासीय सोसाइटी में छह वर्षीय अव्यान सुया अपने साथी के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह बोरिंग कार्य के लिए खोदे गए लगभग 10 से 12 फीट गहरे, पानी से भरे खुले गड्ढे में गिर गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल उसे बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इस मामले में मृतक के पिता की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया कि बोरवेल की खुदाई के दौरान गहरे गड्ढे के आसपास न तो बैरिकेडिंग की गई, न चेतावनी बोर्ड लगाए गए और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था की गई। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 और 125 के तहत मुकदमा दर्ज किया। Greater Noida News
आरोपी की ओर से अधिवक्ता सूर्य प्रताप सिंह ने अदालत में दलील दी कि मनोज जैन को झूठा फंसाया गया है। उनका कहना था कि आरोपी घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था, कार्यस्थल पर सुपरवाइजर नियुक्त थे और सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए गए थे। साथ ही आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, वह जांच में सहयोग करेगा और फरार होने की संभावना भी नहीं है। जमानत याचिका का सरकारी पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) राजनीश यादव एडवोकेट, पुष्पेंद्र यादव एडवोकेट, शिखर यादव एडवोकेट और सौरभ भारती एडवोकेट ने जोरदार विरोध किया। अभियोजन का तर्क था कि आरोपी की फर्म को बोरवेल खुदाई का ठेका मिला था, लेकिन घनी आबादी वाले आवासीय परिसर में सुरक्षा के अनिवार्य मानकों की अनदेखी करते हुए 10 से 12 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे को बिना किसी चेतावनी, बैरिकेडिंग या सुरक्षा व्यवस्था के खुला छोड़ दिया गया, जिसके कारण छह वर्षीय मासूम की जान चली गई। Greater Noida News
अपर सत्र न्यायाधीश मयूर जैन ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि आवासीय परिसर में बच्चों की आवाजाही के बावजूद आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। अदालत ने माना कि संभावित खतरे की जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित न करना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आरोपी का कथित कृत्य केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जानकारी आधारित अपराध की श्रेणी में आता प्रतीत होता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी व उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मयूर जैन ने आरोपी मनोज जैन की जमानत याचिका खारिज कर दी। Greater Noida News
अदालत के द्वारा जमानत याचिका खारिज करने से यह स्पष्ट हो गया है कि आरोपी ठेकेदार मनोज जैन को जेल में ही रहना पड़ेगा। जमानत का विरोध करने वाले युवा अधिवक्ता शिखर यादव एडवोकेट ने बताया कि यह एक बेहद संवेदनशील मामला है। इस मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों तथा ठेकेदार की गलती के कारण एक होनहार मासूम बच्चे की जान चली गई है। उस मासूम बच्चे के पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। इतनी बड़ी दर्दनाक घटना होने के बावजूद ठेकेदार तथा उसके सहयोगी सजा से बचने का प्रयास कर रहे हैं। जिला अदालत ने जमानत याचिका रदद करके बच्चे के परिवार के जख्म पर मरहम लगाने का प्रयास किया है। Greater Noida News
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