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ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। बिजली बिल पर पिछले कई वर्षों से मिल रही 10 प्रतिशत की रियायत नए टैरिफ ऑर्डर में समाप्त होने की संभावना जताई जा रही है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। बिजली बिल पर पिछले कई वर्षों से मिल रही 10 प्रतिशत की रियायत नए टैरिफ ऑर्डर में समाप्त होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो क्षेत्र के करीब 2.5 लाख उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और मासिक बिजली खर्च बढ़ सकता है। Greater Noida News
ग्रेटर नोएडा में बिजली वितरण का कार्य संभाल रही नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) उपभोक्ताओं को लंबे समय से बिजली बिल में 10 प्रतिशत की छूट दे रही थी। यह रियायत कंपनी के पास मौजूद सरप्लस फंड के आधार पर दी जा रही थी। नियामक आयोग का मानना था कि कंपनी ने विभिन्न मदों में उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि वसूली थी, जिसे वापस करने के उद्देश्य से बिल में यह छूट लागू की गई थी। इसी वजह से हजारों परिवारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हर महीने बिजली बिल में राहत मिलती रही, लेकिन अब यह व्यवस्था बदल सकती है। Greater Noida News
मामले में नया मोड़ तब आया जब एनपीसीएल ने वर्ष 2018 से 2023 के बीच जारी ट्रू-अप ऑर्डर को अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी में चुनौती दी। पहले नियामक आयोग ने कंपनी का सरप्लस लगभग 1500 करोड़ रुपये माना था। बाद में पुनर्मूल्यांकन के दौरान यह राशि घटकर 593 करोड़ रुपये रह गई। सरप्लस में आई इस बड़ी कमी के बाद बिजली बिल पर मिलने वाली 10 प्रतिशत रिबेट के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरप्लस कम माना जाता है तो उपभोक्ताओं को दी जाने वाली राहत भी सीमित हो सकती है। Greater Noida News
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले को लेकर चिंता जाहिर की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि सरप्लस राशि में कमी आने से बिजली वितरण कंपनियों को टैरिफ बढ़ाने का नया आधार मिल सकता है। उनके अनुसार प्रदेश की बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं से संबंधित हजारों करोड़ रुपये का समायोजन बकाया है। यही कारण रहा कि पिछले कई वर्षों से बिजली दरों में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हो सकी। अब यदि सरप्लस कम होता है तो कंपनियां नियामक आयोग के सामने बिजली दरें बढ़ाने की मांग और मजबूती से रख सकती हैं। Greater Noida News
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