यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के कार्यालय के बाहर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। युवाओं से लेकर बुजुर्ग किसानों तक ने धरनास्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

Greater Noida News : गौतमबुद्धनगर में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के कार्यालय के बाहर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश और राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के आह्वान पर शुरू हुए इस आंदोलन में मंगलवार को भी बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। युवाओं से लेकर बुजुर्ग किसानों तक ने धरनास्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। किसानों ने साफ कर दिया है कि अब केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। भूमि अधिग्रहण, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा, 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, आबादी और लीज बैक, रोजगार तथा वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने जैसी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। Greater Noida News
मंगलवार को यमुना प्राधिकरण कार्यालय के बाहर किसान बड़ी संख्या में जुटे। धरने की अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष बिसंबर बाबूजी ने की, जबकि संचालन राजीव मलिक ने किया। किसानों ने कहा कि उनकी मांगें वर्षों से लंबित हैं और अलग-अलग स्तर पर बातचीत तथा आश्वासन मिलने के बावजूद जमीन पर अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले किसानों के अधिकारों का समाधान किए बिना प्राधिकरणों का विस्तार पूरा नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि इस बार आंदोलन को लंबा चलाने की रणनीति बनाई गई है। Greater Noida News
किसानों की प्रमुख मांगों में भूमि अधिग्रहण के बदले 10 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड, लंबित आबादी और लीज बैक मामलों का तत्काल निस्तारण तथा 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा शामिल है।
किसानों ने यह भी मांग उठाई है कि:
इसके अलावा किसान क्षेत्र के गांवों के विकास और जेवर क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार सहित अन्य मांगें भी लगातार उठा रहे हैं। हालिया किसान महापंचायत में भी आबादी, भूखंड, मुआवजा, रोजगार और गांवों के विकास के मुद्दे प्रमुखता से उठे थे। Greater Noida News
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष पवन खटाना ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों और प्राधिकरण की ओर से समय-समय पर आश्वासन दिए गए, लेकिन निर्णायक स्तर पर समाधान नहीं हुआ। पवन खटाना ने स्पष्ट किया कि अब किसानों को आश्वासन नहीं बल्कि लिखित और ठोस निर्णय चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। Greater Noida News
गौतमबुद्धनगर में 14 सितंबर को हुई किसान महापंचायत के दौरान भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने किसानों के आंदोलन को निर्णायक लड़ाई में बदलने का संकेत दिया था। महापंचायत के बाद बड़ी संख्या में किसान प्राधिकरणों की ओर बढ़े और तीनों प्राधिकरणों के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया गया। चेतना मंच ने भी इससे पहले “नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के घेराव” और 14 सितंबर की किसान पंचायत को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की थीं। इन खबरों में भूखंड, आबादी, मुआवजा, रोजगार और गांवों के विकास से जुड़े मुद्दों को आंदोलन का प्रमुख आधार बताया गया था। अब वही आंदोलन धरने के दूसरे दिन भी जारी रहने से साफ है कि किसान संगठन इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। Greater Noida News
इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों ने अपनी लड़ाई को केवल यमुना प्राधिकरण तक सीमित नहीं रखा है। नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण—तीनों को लेकर एक साथ आंदोलन की रणनीति बनाई गई है। 14 सितंबर को तीनों प्राधिकरणों के कार्यालयों के बाहर किसानों की मौजूदगी रही और अलग-अलग क्षेत्रों के किसानों ने अपने-अपने मुद्दों को लेकर धरना शुरू किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार किसानों की मुख्य मांगों में आबादी निस्तारण, 64.7 प्रतिशत मुआवजा, विभिन्न प्रतिशत कोटे के भूखंड, स्थानीय युवाओं को रोजगार और भूमिहीन किसानों को भूखंड देने जैसे मुद्दे शामिल हैं। किसान नेताओं का कहना है कि यदि तीनों प्राधिकरणों से जुड़े मामलों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का दायरा और बढ़ाया जाएगा। Greater Noida News
धरने के दूसरे दिन भारतीय किसान यूनियन सर छोटू राम की ओर से भी किसानों को समर्थन दिया गया। मथुरा जिला अध्यक्ष मीरा सिंह, आशु शर्मा, आगरा मंडल अध्यक्ष युवा विपिन यादव सहित कई पदाधिकारी और किसान नेता धरनास्थल पर पहुंचे। इसके अलावा मटरू नागर, अजीत अधाना, बलजीत नागर, राजे प्रधान, रॉबिन नागर, भगत सिंह प्रधान, प्रकाश फौजी, राकेश खाजपुर, बेली भाटी, गुलाब, ललित चौहान, लाला यादव, अमित डैढा, विकास भाटी, राकेश नंबरदार, जगत प्रधान, संजू, अमित जैलदार, नागेश, सुवे राम मास्टर, अनित कसाना, अरविंद लोहिया, अजय भाटी, अविनाश तवर, अनिल, सुरेश सिंह, साजिद, उदयवीर, योगेश शर्मा, नरेश चौहान, ताराचंद, जयकरण, वीरपाल, देवी राम मास्टर, नरेंद्र कसाना, मोहित कसाना, रविंद्र नागर, बिजेंदर, श्यामवीर प्रताप नागर, आनंद चौधरी, प्रवीण शर्मा, नितीश राणा, श्याम सिंह, राजेश, हरि, प्रवीण चौधरी, विनोद राजपूत, जैसलमेर त्यागी, अर्जुन सिंह, गोपाल शर्मा, महेश चंद शर्मा, नूर हसन, रविंद्र कुमार, राहुल भाटी, जितेंद्र बैरागी, गौरव बैरागी, जितेंद्र गुर्जर, सोनू कसाना और अमित भाटी समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। Greater Noida News
गौतमबुद्धनगर में किसानों के आंदोलन की मौजूदा तस्वीर पिछले कई दिनों में तेजी से बदली है। पहले गांव-गांव बैठकों के जरिए 14 सितंबर की महापंचायत की तैयारी हुई। चेतना मंच ने भी इस आंदोलन को लेकर लगातार अपडेट प्रकाशित किए। इसके बाद महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान जुटे और राकेश टिकैत ने किसानों की लंबित मांगों पर आर-पार की लड़ाई का संकेत दिया। अब यमुना प्राधिकरण के सामने दूसरे दिन भी किसान डटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि इस बार आंदोलन केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना, तीनों प्राधिकरणों के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा। Greater Noida News
किसानों के अनिश्चितकालीन धरने ने शासन और तीनों विकास प्राधिकरणों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ गौतमबुद्धनगर में तेजी से औद्योगिक और शहरी विकास हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपनी जमीन देने वाले किसान वर्षों पुराने मुआवजे, आबादी, भूखंड और रोजगार से जुड़े मामलों के समाधान की मांग कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शासन और प्राधिकरण किसानों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लेकर आंदोलन खत्म कराने की पहल करेंगे या फिर गौतमबुद्धनगर में तीनों प्राधिकरणों के खिलाफ किसानों का आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा? Greater Noida News
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