
सार
Greater Noida : अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए आंदोलन कर रहे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के किसानों के धैर्य ने अब जवाब दे दिया है। अब किसानों ने बड़ा फैसला कर लिया है। आंदोलनरत किसानों ने घोषणा की है कि 12 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय पर ताला जड़ देंगे। किसानों का दावा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाएंगी वें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का पूरा कामकाज ठप्प रखेंगे।
विस्तार
Greater Noida : जैसा कि आपको भी ज्ञात होगा कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के किसान साढ़े तीन महीने से आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन के तहत किसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय के बाहर रात दिन धरना दे रहे हैं। इतना लंबा धरना चलाने के बाद किसानों का धैर्य अब समाप्त हो गया है। किसानों ने आर पार की लड़ाई लड़ने का फैसला कर लिया है।
आपको बता दें कि आंदोलन कर रहे ग्रेटर नोएडा के किसानों ने अब बड़ा फैसला लिया है। फैसला यह है कि 12 सितंबर तक उनकी मांगे पूरी नहीं की गई तो वें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दोनों प्रवेश द्वारों पर अपना ताला लगाकर वहीं बैठ जाएंगे। जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाएगी तब तक ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में कोई भी कामकाज नहीं होने दिया जाएगा।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के विरूद्ध आंदोलन का नेतृत्व किसान सभा नामक संगठन कर रहा है। किसान सभा के प्रवक्ता डा. रुपेश वर्मा ने चेतना मंच को बताया कि किसान 12 सितंबर को आर पार की लड़ाई लड़ेंगे। उस दिन पूरे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के प्रत्ये गांव से बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, बुजुर्ग व बच्चे ग्रेटर नोएडा के कार्यालय पर पहुंचेंगे। वहां पहुंचकर प्राधिकरण के दोनों गेट बंद करके बैठ जाएंगे। डा. रूपेश वर्मा बताते हैं कि किस अभियान में उन्हें सपा के विधायक अतुल प्रधान व दूसरे अनेक विधायकों का सहयोग मिल रहा है। 12 सितंबर को भी विधायकगण ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर पर उनके आंदोलन में भाग लेंगे।
किसान सभा के प्रवक्ता डा. रूपेश वर्मा ने चेतना मंच को बताया कि 12 सितंबर यानि मंगलवार को उनके आंदोलन का अहम दिन होगा। उस दिन प्राधिकरण की तालाबंदी की जाएगी। इस आंदोलन की सफलता के लिए किसान संगठन के तमाम नेता गांव गांव जाकर जन संपर्क कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि 12 सितंबर को ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के प्रत्येक गांव के किसान, मजदूर, महिाएं एवं युवा आंदोलन में शामिल होकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को मांगे पूरी करने के लिए मजबूर कर देंगे। डा. वर्मा ने बताया कि अधिकारी किसानों के साथ वार्ता तो करते हैं, किंतु वार्ता में झूठे आश्वासन देते हैं। जब किसान लिखित सझमौता मांगते हैं तो अधिकार भाग खड़े होते हैं। Greater Noida