
Greater Noida : चिटहेरा गांव में किए गए अरबों रुपये के भूमि घोटाले के मास्टरमाइंड यशपाल तोमर सहित आठ लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई है। गैंग लीडर यशपाल सहित उसके साथी वर्तमान में जेल में बंद हैं। इस घोटाले की जांच एसआईटी द्वारा की गई थी जिसमें जिसके बाद इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
दादरी कोतवाली प्रभारी सुजीत उपाध्याय ने बताया कि पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के आदेश पर यशपाल तोमर पुत्र महेंद्र सिंह तोमर, कर्मवीर पुत्र प्यारेलाल, बेलू पुत्र रामस्वरूप, कृष्णपाल पुत्र छोटे, मालू पुत्र वीरेंद्र, नरेंद्र कुमार पुत्र पीतांबर लाल, शीतला प्रसाद पुत्र अलगू राम व गोवर्धन पुत्र लीलाधर के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। गैंग लीडर यशपाल ने अपने पियादों के साथ मिलकर चिटहेरा गांव में अरबों रुपये के भूमि घोटाले को अंजाम दिया था।
आपको बता दें कि यशपाल तोमर पर आरोप है कि उसमें अपने साथियों के साथ मिलकर चिटहेरा गांव के किसानों को डरा धमका कर उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराएं और उनकी जमीन हड़प ली। अरबों रुपए के घोटाले के मास्टरमाइंड यशपाल तोमर को उत्तराखंड एसटीएफ ने वर्ष 2022 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह हरिद्वार जेल में बंद है। उसके खिलाफ हरिद्वार पुलिस द्वारा भी गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। गौतमबुद्ध नगर में दर्ज किए गए मुकदमों में उसके जिला अदालत में जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है अब यशपाल तोमर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है।
दादरी के चिटहेरा गांव में हुए 100 करोड़ से ज्यादा के भूमि घोटाला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस तरह से यह पूरा भूमि घोटाला हुआ। अब इसमें उत्तराखंड के कुछ अफसरों के परिजनों के नाम सामने आये है। जिला प्रशासन ने उस समय पर तैनात रहे लेखपाल को भी सस्पेंड कर दिया था। दादरी थाने में 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसमें भू-माफिया यशपाल तोमर समेत त्रिदेव रिटेल कंपनी के नरेंद्र कुमार व 9 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
चिटहेरा गांव में वर्ष 1997 में 282 पट्टों का आवंटन हुआ था। जांच में पट्टों का आवंटन गलत मिला है। साथ ही, पट्टा बहाल होने के बाद नियमों के खिलाफ जाकर पट्टों का क्रय-विक्रय किया गया। इसमें भू-माफिया सक्रिय थे। बाद में काफी पट्टों का बैनामा ग्रेनो प्राधिकरण के नाम कर मुआवजा उठाया गया। घोटाले में भू-माफिया के साथ नेता और अफसर भी शामिल रहे हैं। तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ था।
चिटहेरा भूमि घोटाले में दर्ज़ हुए मुकदमों की जांच के लिए एसआईटी का गठन गौतमबुद्ध नगर के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने किया था। एसआईटी टीम को एडिशनल कमिश्नर भारती सिंह लीड कर रही थी। इसमें क्राइम ब्रांच के दो इंस्पेक्टर एसआईटी में बतौर सदस्य नियुक्त किए गए थे।