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ग्रेटर नोएडा में राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में मरीजों की मुसीबत लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रेटर नोएडा के कासना क्षेत्र में स्थित जिम्स में आउटसोर्सिंग स्टाफ की हड़ताल लगातार चल रही है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा में राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में मरीजों की मुसीबत लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रेटर नोएडा के कासना क्षेत्र में स्थित जिम्स में आउटसोर्सिंग स्टाफ की हड़ताल लगातार चल रही है। जिम्स की हड़ताल के मामले में उत्तर प्रदेश शासन तथा प्रशासन पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। ग्रेटर नोएडा के जिम्स को उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने का गौरव प्राप्त है। इस अस्पताल में चल रही हड़ताल ने बड़ी संख्या में मरीजों को मुसीबत में डाल दिया है। Greater Noida News
ग्रेटर नोएडा के जिम्स में 700 से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर हैं। सोमवार 15 जून 2026 से शुरू हुई जिम्स के कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को भी जारी रही। बुधवार को तो ऐसा लगा कि मानो जिम्स के प्रशासन ने अपने हाथ खड़ कर दिए हैं। हड़ताल के कारण अस्पताल में भर्ती मरीज बड़ी संख्या में मजबूरन अस्पताल छोडक़र दूसरे अस्पतालों का रूख कर रहे हैं। बुधवार को अस्पताल में भर्ती एक गंभीर मरीज ने दम तोड़ दिया। पिछले तीन दिनों में जिम्स में भर्ती अनेक मरीजों के मरने की खबर है।Greater Noida News
आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा के जिम्स के 700 से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं। आलम यह है कि तीन दिनों में 150 से अधिक सर्जरी टालनी पड़ी। भर्ती मरीजों का आरोप है कि उन्हें जबरन डिस्चार्ज किया जा रहा है। ओपीडी में दिखाने पहुंचे चार हजार से अधिक लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। वहीं आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। Greater Noida News
ग्रेटर नोएडा स्थित जिम्स की हालत यह है कि केवल इमरजेंसी को छोड़ लगभग सभी विभागों की सेवाएं प्रभावित हैं। बुधवार को भी मरीज इधर-उधर भटकते दिखे। आईसीयू में भर्ती एक मरीज ने दम तोड़ दिया। सोमवार को भी दो मरीजों की मौत हुई थी। मरीज के परिवार ने बताया कि उनके बड़े भाई सांस संबंधी गंभीर बीमारी से पीडि़त हैं और कई दिनों से आईसीयू में भर्ती हैं। हालत बेहद गंभीर है लेकिन समय पर जांच और निगरानी नहीं हो पा रही है। जिम्स में सामान्य दिनों में प्रतिदिन 50 से 55 ऑपरेशन होते हैं लेकिन हड़ताल के कारण दो दिनों में 100 से अधिक गंभीर सर्जरी प्रभावित हुई हैं। ऑपरेशन की तारीख आगे बढऩे की जानकारी दी गई है। आलम यह है कि गर्भवती महिलाओं की भी सर्जरी नहीं हो पा रही है। Greater Noida News
कुछ तीमारदार अपने मरीजों को निजी अस्पतालों या अन्य सरकारी संस्थानों में ले जाने को मजबूर हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने शिशुओं को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया है। उनकी देखरेख की जिम्मेदारी नर्सिंग के विद्यार्थियों को सौंपी गई है। परिजनों में चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल और अनुभवी स्टाफ की जरूरत होती है। इसी कारण वह प्राइवेट अस्पतालों की तरफ भाग रहे हैं। Greater Noida News
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