
Greater Noida : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में इन दिनों बॉक्सिंग प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। इस प्रतियोगिता में कई राज्यों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। इन्हीं खिलाड़ियों में से एक महिला खिलाड़ी है ज्योति गुलिया। ज्योति गुलिया ने तेलंगाना और राजस्थान के खिलाड़ियों को हराकर क्वाटर फाइनल में जगह बनाई है। ज्योति गुलिया इंटरनेशनल बॉक्सर हैं। हम आपको उनके जीवन के वो राज बताएंगे, जिन्हें शायद ही आप जानते हों...
ज्योति गुलिया का जन्म हरियाणा के रोहतक जनपद के गांव रूड़की में हुआ है। वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बॉक्सर हैं और कई खिताब जीत चुकी हैं। ज्योति ने 10 साल पहले जब बाक्सिंग खेलना शुरू किया था तब उनके पिता और भाई ने उनके खेलने पर पाबंदी लगा दी थी। पिता और भाई का कहना था कि लड़कियों का काम घर में चूल्हा चौका करने का है न की बॉक्सिंग के पंच मारने का है। पिता की बातें सुनकर ज्योति के सपने टूट चुके थे, लेकिन मां के हौंसले ने उनमें ऊर्जा का संचार कर दिया था। जब पूरे परिवार ने उनका साथ नहीं दिया तब मां ने सबसे बैर लेकर उन्हें रिंग में जाने की अनुमति दी।
ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में आयोजित बॉक्सिंग प्रतियोगिता में हरियाणा की ओर से प्रतिभाग करने आई ज्योति गुलिया बताती हैं कि जब पिता और भाई घर में नहीं होते तब मां उन्हें खेलने के लिए भेज देती थी। पिता के आने से पहले वह घर वापस लौट आती थी और घर पर रहकर ही अभ्यास करती थी। कुछ दिनों बाद जब राज्य स्तरीय खेलने के गई और वहां स्वर्ण पदक जीत कर आई तब भी पिता खुश नहीं हुए, लेकिन मां के चहेरे पर खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने बताया कि यदि उनका साथ मां ने नहीं दिया होता तो भारतीय रेलवे की तरफ से राष्ट्रीय महिला बाक्सिंग में नहीं खेल रही होती।
ज्योति ने बताया कि वह पहली यूथ खिलाड़ी थी,जिसने 2018 में यूथ ओलंपिक चैंपियनशिप में भाग लिया था। इसके साथ ही यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप 2017 में स्वर्ण पदक जीता,लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाली राशि उन्हें आधी ही मिली। कई बार प्रयास करने के बाद भी उन्हें निराशा ही लगी। कई बार इंटानेशनल चैंपियनशिप खेलने के लिए गई। वहां भी देश के लिए कई पदक जीते। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी कई प्रतियोगिता जीत चुकी है।