
Greater Noida Kisan Andolan : 20 अप्रैल 2023 से लेकर 24 जून तक ग्रेटर नोएडा में चले किसानों के सबसे लंबे धरने का एक बार फिर आगाज हो गया है। इस बार किसान नेता घोषणा कर रहे हैं कि वे प्राधिकरण से पूरा हिसाब किताब करने के मकसद से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर डेरा डालने आए हैं। हम इस बार किसी के झांसे में नहीं आएंगे। इस बार अपनी सारी जायज मांगों को पूरा कराने के बाद ही ही किसान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय से वापस जाएंगे।
आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की स्थापना वर्ष 1991 में 28 जनवरी को हुई थी। इस स्थापना के वक्त किसानों की भूमि अधिग्रहण करने के लिए क्षेत्र के किसानों से ढेर सारे वायदे किए गए थे। सबसे बड़ा वायदा यह था कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में जितने भी उद्योग स्थापित होंगे उनमें किसानों के युवा लड़के-लड़कियों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाएगा।
इसके साथ ही यह भी वायदा किया गया था कि किसानों को उनकी जमीन का वाजिब मुआवजा मिलेगा तथा यहां बनने वाले बड़े-बड़े सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में किसानों के बच्चों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसी प्रकार के ढेर सारे लुभावने वायदे करके ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के सभी गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा चुकी हैं। पिछले 32 वर्षों से किसान अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। किसानों से किए गए एक भी वायदे को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पूरा नहीं किया है। बीच-बीच में किसानों को खुश करने के लिए छोटी-मोटी घोषणाएं जरुर होती रही है।
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के किसानों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग को लेकर अब तक सैकड़ों बार प्राधिकरण के विरुद्ध आंदोलन हो चुके हैं। इन अधिकतर आंदोलनों का कोई नतीजा आज तक नहीं निकला है इतना जरुर हुआ है कि किसानों के नाम पर आंदोलन करके कई किसान आम किसान से बड़े-बड़े नेता बन गए हैं। इतना ही नहीं किसानों के नाम पर दलाली का धंधा भी इस क्षेत्र में खूब फला फूला है।
दुर्भाग्य से आम किसानों को उनके जायज हक कभी नहीं मिले। प्रदेश में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो किसानों का शोषण आज की तरह से ही होता रहा है। इन्हीं सब समस्याओं को लेकर इसी वर्ष अप्रैल 2023 में किसान सभा के आह्वान पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के विरुद्ध एक बार फिर आंदोलन खड़ा किया गया।
20 अप्रैल से 24 जून 2023 तक ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय पर चले किसान आंदोलन को अब तक का सबसे लंबा चलने वाला आंदोलन माना जा रहा है। विगत 24 जून को इस आंदोलन को सरकार के एक 'मीडिएटर' के जरिए समाप्त करा दिया गया था। किसानों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी सभी मांगों को राज्य स्तर पर एक हाईपॉवर कमेटी बनाकर हल करा दिया जाएगा। इस आश्वासन को लेकर पहले से ही आशंका थी कि यह आश्वासन केवल आंदोलन समाप्त करने के लिए दिया गया है।
यह आशंका पूरी तरह सच साबित हुई और सरकार ने हाईपॉवर कमेटी बनाने जैसी किसी भी प्रक्रिया से इनकार कर दिया। कमेटी न बनने की सूचना मिलकर आंदोलन करने वाले किसान अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अब उन्होंने 18 जुलाई से एक बार फिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया है। आंदोलन में शामिल किसानों ने घोषणा की है कि इस बार में किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और अपने सारे जायज हक लेकर ही घर वापस जाएंगे।
दोबारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय पर डेरा डालने वाले किसान पूर्व में उनके आंदोलन को तुड़वाने वाले "मीडिएटर" को पानी पी पीकर कोस रहे हैं। आंदोलन में शामिल महिलाएं तो बाकायदा उस "मीडिएटर" को अभिशाप तक देती हुई नजर आ रही हैं जिसने उनका आंदोलन तुड़वाया था।
महिलाओं का आरोप है कि वें अपना घरबार छोड़कर 62 दिनों तक प्राधिकरण के बाहर बैठी रहीं उन्हें "मीडिएटर" ने फर्जी आश्वासन देकर यह कहते हुए घर भेज दिया कि उनकी सारी मांगें पूरी कर दी गई हैं। ऐसे "मीडिएटर" को किसान कभी माफ नहीं करेंगे। समय आने पर उन्हें सबक सिखाकर बताया जाएगा कि किसानों के साथ छल करने का नतीजा क्या होता है।