अचानक लिया गया 36 गांवों के नाम बदलने का फैसला, आखिर क्या है इसकी वजह?
Greater Noida News
भारत
चेतना मंच
11 Jul 2025 01:11 PM
Greater Noida News : दिल्ली-एनसीआर के जेवर क्षेत्र के 36 गांवों में अब इतिहास और पहचान का नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। विधायक धीरेंद्र सिंह की पहल पर यहां महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों और सामाजिक नेताओं के नाम पर भव्य स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं। इन स्वागत द्वारों के माध्यम से जहां गांवों को एक नई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान मिलेगी, वहीं युवाओं को प्रेरणा देने का प्रयास भी किया जाएगा।
गांवों के मुख्य मार्गों पर बनेंगे ऐतिहासिक स्वागत द्वार
इस योजना के तहत हर गांव के प्रवेश मार्ग पर एक स्वागत द्वार बनाया जाएगा जिसे किसी महान व्यक्ति, सामाजिक सुधारक या ऐतिहासिक योद्धा के नाम से समर्पित किया जाएगा। हर द्वार पर लगभग ₹5.36 लाख का खर्च आएगा और पूरा कार्य चार महीने के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर विधायक निधि से लगभग ₹2 करोड़ खर्च किए जाएंगे। कार्य की जfम्मेदारी ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (RED) को सौंपी गई है और उन्होंने निर्माण कार्य शुरू भी कर दिया है।
कौन-कौन से गांव किस महापुरुष से जुड़ेंगे?
इस अनूठी पहल के अंतर्गत कई गांवों को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक नामों से जोड़ा जाएगा जैसे- सिरसा मांचीपुर (बिरसा मुंडा), सोल्डा मार्ग (महात्मा गांधी), बेगमाबाद मार्ग (मल्हार राव होल्कर), जेवर खादर मार्ग (झलकारी बाई), गोविंदगढ़ मार्ग (चौधरी चरण सिंह), कानीगढ़ी मार्ग (राजा महेंद्र प्रताप सिंह), भगवंतपुर मार्ग (विपिन चंद्र पाल), नगला चांदन (डॉ. रोशन सिंह), हिमायुपुर (मंगल पांडे), अलावलपुर (नेताजी सुभाष चंद्र बोस), बुढाका की मढैया (तात्या टोपे), भीकनपुर (राजा राम मोहन राय), शाहपुर मार्ग (योगी आदित्यनाथ), मिलक करीमाबाद (डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम), कानपुर (भगत सिंह), भोयरा मार्ग (अंगपाल तोमर), इनायतपुर (राणा सांगा), दस्तमपुर (महाराणा प्रताप), धनसिया (सरदार वल्लभ भाई पटेल), धनपुरा मार्ग (खान अब्दुल गफ्फार खान), भोयरा-कानपुर मार्ग (संत कबीरदास) इस पूरी सूची में कुल 36 गांवों को शामिल किया गया है।
युवाओं को क्या मिलेगा?
हर स्वागत द्वार पर संबंधित महापुरुष का नाम, उनकी जीवनी, योगदान और संघर्षों की झलक भी उकेरी जाएगी। विधायक धीरेंद्र सिंह ने बताया कि, “इस पहल का उद्देश्य सिर्फ सजावटी द्वार बनाना नहीं है, बल्कि युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और महापुरुषों के विचारों से जोड़ना है।”
जेवर क्षेत्र के गांवों को दी जा रही यह नई पहचान न केवल सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी। महापुरुषों के नाम से जुड़े इन स्वागत द्वारों से गांवों की पहचान मजबूत होगी और यह पहल देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।