300 स्कूलों के करीब तीन लाख छात्रों की पौने तीन करोड़ रुपये फीस समायोजित करनी होगी
Greater Noida News
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:55 AM
ग्रेटर नोएडा। निजी स्कूलों द्वारा कोरोना काल यानी 2020-21 सत्र के दौरान विद्याथियों से फीस ली गई थी, जिसके खिलाफ बाद में अभिभावकों ने काफी हो हल्ला मचाया था। जिसके बाद विद्यार्थियों से ली गई स्कूल फीस का 15 फीसदी समायोजित या भुगतान करने का हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर मुहर लगा दी है।
फैसले से अभिभावकों में खुशी की लहर
जिले के अभिभावकों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के बाद से खुशी की लहर है। अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की हैं कि जल्द कोर्ट के आदेश का पालन कराया जाए, जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 350 से अधिक निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं।
अब तक 50 स्कूलों ने ही छात्रों की फीस समायोजित की
हाई कोर्ट के आदेश आने के बाद 50 स्कूलों ने ही छात्रों की फीस समायोजित की थी। जबकि 300 से अधिक स्कूलों ने कोर्ट के आदेश को नहीं माना था। 300 स्कूलों में पढ़ाई कर रहे करीब तीन लाख छात्रों की पौने तीन करोड़ रुपये फीस समायोजित व वापस करनी होगी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में संचालित हो रहे कई स्कूलों में 15 हजार से अधिक महीने की फीस है। वहीं कई स्कूलों में फीस आठ से नौ हजार रुपये फीस ली जा रही है।
अभिभावक साल में करीब एक लाख की फीस अदा करते हैं
एक अभिभावक हर साल करीब 80 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये फीस जमा कर रहे हैं। अभिभावक राकेश कुमार का कहना है कि जिला प्रशासन को स्कूलों से कोर्ट का आदेश का पालन कराना चाहिए। पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए। तभी आदेश का पालन आसानी से हो पाएगा। एक अभिभावक ने बताया कि जिले के निजी स्कूल कमाई का अड्डा बन गए हैं। वह कापी- किताब से लेकर कई शुल्क लगा कर अभिभावकों को लूट रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) को स्कूलों को पत्र जारी करके अभिभावकों को जल्द से जल्द राहत दिलानी चाहिए।
100 से अधिक स्कूलों पर अब तक लग चुका जुर्माना
हाई कोर्ट का आदेश नहीं मनाने वाले 100 से अधिक स्कूलों के ऊपर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने एक एक लाख रुपये दंड लगाया था। दंड की धनराशि जमा न करने वाले चार स्कूलों के खिलाफ आरसी वसूली की भी कार्रवाई की गई थी। अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल दिखावे के लिए की गई थी, जिन स्कूलों के खिलाफ दंड लगाया गया। उनके नाम सार्वजनिक किये जाएं। इसके साथ ही दंड की राशि जमा करने वाले स्कूलों के नाम भी अभिभावकों को बताया जाए।
जिले के अधिकतर स्कूलों ने फीस समायोजित नहीं की
कुछ स्कूलों ने दंड लगने के बाद 15 प्रतिशत फीस समायोजित की,लेकिन जिले के अधिकतर स्कूलों ने न तो फीस समायोजित की और न ही स्कूल छोड़ चुके बच्चों की फीस वापस की। इसके साथ ही कुछ स्कूलों ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) को अवगत कराया है कि उन्होंने छात्रों से फीस नहीं ली थी।
>>सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। प्रशासन से उम्मीद है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन कराएगा। यदि एक हफ्ते के अंदर सभी स्कूलों ने इसका अनुपालन नहीं किया तो हम सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे।- सुखपाल सिंह तूर,संस्थापक एनसीआर पेरेंट्स एसोसिएशन।
ग्रेटर नोएडा – नोएडाकी खबरों से अपडेट रहने के लिए चेतना मंच से जुड़े रहें।देश-दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमें फेसबुकपर लाइक करें या ट्विटरपर फॉलो करें।