
Greater Noida News : सबसे सुंदर शहर बनाने का सपना दिखाकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नागरिकों को भगवान के भरोसे छोड़ दिया गया है। यह शहर समस्याओं का शहर बन गया है। समस्याएं एक-दो होतीं, तो नागरिक बर्दाश्त भी कर लेते, लेकिन यहां तो समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। सैकड़ों बिल्डर्स ने बड़े-बड़े सपने दिखाकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट को बसाया था। अब यह शहर समस्याओं का गढ़ बन चुका है।
ग्रेटर नोएडा के पश्चिम भाग में स्थापित हुआ ग्रेटर नोएडा वेस्ट शहर कुछ वर्षों पूर्व तक देश भर के फ्लैट बायर्स के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। कारण यह था कि यहां अपने प्रोजेक्ट बना रहे सभी बिल्डर्स बड़े-बड़े आकर्षक विज्ञापन निकालकर दावा कर रहे थे कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट देश का सबसे सुंदर शहर होगा। आज हालात बिलकुल उलट हो गए हैं।
रोज लगाने वाला कई-कई घंटों का ट्रैफिक जाम, टूटी हुई सड़कें, सोसाइटियों में पानी का अभाव, अव्यवस्थित लिफ्ट सिस्टम, आवारा कुत्तों व पशुओं का आतंक, छिनौती करने वाले अपराधियों का लगातार आक्रमण जैसी दर्जनों समस्याओं से यहां के लाखों नागरिक अब ट्रस्ट हो चुके हैं। परेशान नागरिकों ने सिस्टम की पोल खोलने के लिए टूटी हुई सड़कों की प्रदर्शनी लगाने की घोषणा कर दी है।
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा वेस्ट में टूटी हुई सड़कों की समस्या से पूरी तरह ट्रस्ट हो चुके निवासियों ने यहां एकमूर्ति गोलचक्कर पर टूटी हुई सड़कों की प्रदर्शनी लगाने का फैसला किया है। नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन (नेफोवा) के सदस्य ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों के साथ मिलकर रविवार को यह प्रदर्शनी लगाएंगे।
नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार के अनुसार इस प्रदर्शनी में टूटी हुई सड़कों की 100 तस्वीरें लगाई जाएंगी। उम्मीद है कि इस प्रदर्शनी को देखकर प्राधिकरण के अधिकारियों को शर्म आएगी और वे यहां की समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करेंगे।
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों को उम्मीद है कि टूटी हुई सड़कों की प्रदर्शनी देखकर प्राधिकरण के अधिकारी शर्म से पानी-पानी हो जाएंगे और हो सकता है कि वे यहां की समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई पहले शुरू कर दें।
यहां के निवासियों का आरोप है कि वे इन समस्याओं के समाधान के लिए कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन प्राधिकरण पर कोई असर नहीं हो रहा है। यहां तक कि प्राधिकरण के अधिकारी इस इलाके में दौरा करने भी नहीं आते हैं। इसलिए रविवार (10 सितंबर) को टूटी हुई सड़कों की 100 तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाकर प्राधिकरण के अधिकारियों को जगाने का प्रयास किया जाएगा।
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों के लिए पानी का अभाव भी एक बड़ी समस्या है। यहां अक्सर पानी की पाइपलाइन फटने की समस्या आती रहती है। इस कारण एक ओर जहां सोसाइटियों के निवासी पानी को तरसते रह जाते हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों लीटर पानी सड़क पर बहकर बर्बाद हो जाता है।
गुरुवार को भी ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ऐस एस्पायर सोसाइटी के पास पानी की पाइपलाइन फट गई। यहां लगभग तीन घंटे तक पानी बर्बाद होता रहा और कई सोसाइटियों में पानी का प्रेशर कम हो गया। सोसाइटियों के निवासी पानी के लिए तरसते रहे।
पानी की पाइपलाइन फटने के कारण पानी का अभाव होना यहां एक बड़ी समस्या का रूप ले चुका है। एक सप्ताह के दौरान तीसरी बार पाइपलाइन फटने की घटना होने के बावजूद इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस कारण यहां के निवासियों में भारी रोष भी पनपने लगा है।
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी एक ओर जहां पानी के अभाव में जीने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर कई सोसाइटियों में जलभराव एक बड़ी समस्या बन जाती है। यहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए बड़ी-बड़ी योजनाओं के साथ ही इसके सिस्टम भी स्थापित किए गए, लेकिन अधिकांश सोसाइटियों में ये सिस्टम ठप्प हो चुके हैं।
बिल्डर्स और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बेकार हो गए, जिसके कारण बारिश का पानी जमीन के भीतर जा ही नहीं पा रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि कई सोसाइटियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का सिस्टम लगा ही नहीं है।
Greater Noida News : बता दें कि जिन सोसाइटियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगा हुआ भी है, उनमें से अधिकांश सिस्टम मिट्टी, कूड़े-कचरे और पत्तों के कारण बंद हो चुके हैं। इस कारण बारिश होने के दौरान इन सोसाइटियों में जलभराव की बड़ी समस्या हो जाती है, जबकि जल का संरक्षण नहीं हो पाता। इस वजह से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में भूगर्भीय जल का स्तर भी लगातार गिरता जा रहा है।
आरोप है कि सोसाइटियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रखरखाव पर न तो बिल्डर्स ध्यान देते हैं, और न ही प्राधिकरण के अधिकारियों को इसकी जांच में दिलचस्पी है। मॉनसून के पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का रखरखाव आवश्यक होता है, लेकिन बिल्डर्स इसपर कोई ध्यान नहीं देते।
Greater Noida News : नियम के अनुसार किसी भी सोसाइटी में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने के बाद ही प्राधिकरण की ओर से ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट या कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। सर्टिफिकेट जारी करने से पहले प्राधिकरण के अधिकारियों को सोसाइटी का निरीक्षण करके देखना होता है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ठीक से स्थापित किया गया है या नहीं।
यहां के निवासियों का कहना है कि बिल्डर्स की ओर से प्राधिकरण को बता दिया जाता है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित कर दिया गया है और इसके बाद अधिकारी सोसाइटी की जांच किए बिना ही उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं। बिल्डर्स भी प्राधिकरण से सर्टिफिकेट मिलने के बाद रखरखाव करना बंद कर देते हैं। यह एक बड़ी समस्या है।
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