
ग्रेटर नोएडा न्यूज (चेतना मंच)। मानवीयता को तार-तार करने वाला एक बड़ा गंभीर मामला ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल का सामने आया है। जिम्स के कर्मचारियों ने अस्पताल में एक व्यक्ति की मौत होने के बाद उसके शव को मोर्चरी के फ्रीजर में रख दिया और भूल गए। 14 दिनों बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को उक्त मृत व्यक्ति के बारे में सूचना दी। इस लापरवाही के खुलासे के बाद अस्पताल प्रशासन मामले को दबाने में जुटा हुआ है।
ग्रेटर नोएडा के थाना सूरजपुर पुलिस को बीते 7 अक्टूबर को सोहन पाल नामक व्यक्ति की मौत होने का मीमो जिम्स अस्पताल से भेजा गया। अस्पताल से भेजे गए डेथ मीमो को देखकर पुलिसकर्मी चौंक उठे। डेथ मीमो में उक्त व्यक्ति की मौत की तिथि 23 सितंबर 2023 लिखी हुई थी। डेथ मीमो मिलने के बाद हालांकि पुलिस ने शव का पंचायतनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। बताया जाता है कि जिम्स अस्पताल द्वारा देरी से सूचना देने की कोई स्पष्ट वजह न होने के कारण पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में भी देरी हुई।
बताया जाता है की मूल रूप से उड़ीसा के रहने वाले सोहनपाल सेक्टर ईटा-1 में किराये पर रह रहे थे। उनकी हालत बिगड़ने पर मकान मालिक ने उन्हें 23 सितंबर को जिम्स अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया था। सोहनपाल को भर्ती करने के बाद मकान मालिक वापस अपने घर लौट आए। उपचार के दौरान सोहनपाल की मौत हो गई।
सोहनपाल की मौत होने के बाद अस्पताल कर्मियों ने उनके शव को अस्पताल में बने मोर्चरी के फ्रीजर में रख दिया। अस्पताल कर्मियों द्वारा उनकी मौत की सूचना पुलिस को नहीं दी गई। करीब 14 दिन बाद अस्पताल प्रशासन को सोहनपाल की मौत की सूचना देने की याद आई। जिसके बाद डेथ मीमो थाना सूरजपुर पुलिस को भेजा गया। नियम अनुसार अस्पताल में उपचार के दौरान मौत होने के तुरंत बाद संबंधित थाने को उक्त व्यक्ति का ब्यौरा डेथ मीमो के जरिए भेजना होता है। सोहनपाल की मौत के मामले में इस नियम का पालन नहीं किया गया। मामला प्रकाश में आने पर अस्पताल प्रशासन इसे दबाने में जुटा हुआ है।
इस संबंध में पूछे जाने पर जिम्स के डायरेक्टर राकेश गुप्ता ने बताया कि वह अपने स्तर से इस मामले की जांच करा रहे हैं। सोहनपाल की मौत के मामले में डेथ मीमो देरी से भेजने के क्या कारण रहे, इसकी पड़ताल की जा रही है।