ग्रेनो में आठ साल से रजिस्ट्री का है इंतजार, कानूनी पेंच में फंसे 8 हजार परिवार
Greater Noida News
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 05:17 AM
Greater Noida News : उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम प्राधिकरण (यूपीसीडा) क्षेत्र में एक दशक पहले घर का सपना संजाने वाले आठ हजार से ज्यादा फ्लैट खरीदार अपने घर की रजिस्ट्री की बाट जोह रहे हैं। यूपीसीडा के प्रशासनिक क्षेत्र की 10 में से 9 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं आज भी अधर में लटकी हुई हैं।
खरीदारों को नहीं मिल पा रहा मालिकाना हक
फ्लैट मिल जाने के बाद भी खरीदारों को न तो मालिकाना हक मिल पा रहा है और न ही मूलभूत अधिकार, क्योंकि प्रोजेक्ट्स को कम्पलीशन सर्टिफिकेट (सीसी) नहीं मिल रहा। इसके पीछे बिल्डरों पर बकाया करीब 400 करोड़ रुपये की राशि, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को लेकर पुराना विवाद, अधूरे निर्माण और लंबित कानूनी मामले अहम कारण बने हैं। हालांकि यूपीसीडा ने अब एफएआर मुद्दे को सुलझा लिया है और पिछले महीने मिसगुन बिल्डर ने रजिस्ट्री शुरू कर बाकी बिल्डर परियोजनाओं में फंसे आठ हजार से ज्यादा खरीदारों को नई उम्मीद दी है।
एफएआर बढ़ने से मामला फंसा
दरअसल, यूपीसीडा ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के नियमानुसार वर्ष 2009 में एफएआर को 2.75 से बढ़ाकर 3.5 करने की स्वीकृति दी थी। वर्ष 2007-2011 के बीच भूमि आवंटन प्राप्त करने वाले बिल्डरों ने योजनाओं में संशोधन कर 3.5 एफएआर के अनुरूप नक्शे पास कराए, जिनकी मंजूरी 2013-14 के बीच दी गई। हालांकि इसी बीच यूपीसीडा के अधिकारियों ने एफएआर के नए निर्णय को खारिज कर दिया और एफएआर को फिर 2.75 पर सीमित करने की बात कही, जिससे पूरा मामला उलझ गया।
कई परियोजनाएं पूरी तरह से रुकी हुई
इसके अलावा यहां कई परियोजनाएं पूरी तरह रुकी हैं। इनमें एक दंत एल्पाइन रियलटेक लिमिटेड की परियोजना में 502 खरीदार फंसे हैं। इस पर 24 करोड़ रुपये का बकाया है और निर्माण भी अधूरा है। इसका मामला एनसीएलटी में विचाराधीन है। वहीं जेके डेवलपर्स की परियोजना के सभी नौ टॉवर अधूरे पड़े हैं। इससे 1100 से ज्यादा खरीदार प्रभावित है और इसका मामला भी एनसीएलटी में है। इस पर 88 करोड़ रुपये का बकाया है। जबकि अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन में वर्ष 2014 में स्वीकृति इस परियोजना को पांच एकड़ में विकसित किया जाना था। अनिल शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीसीडा ने बताया कि यूपीसीडा की ओर से 3.5 एफएआर को बोर्ड ने मान्यता दे दी है, सीसी जारी करने में कोई रोक नहीं है। लेकिन केवल उन्हीं बिल्डरों को सीसी मिलेगी जो बकाया चुकाएं और आॅनलाइन आवेदन करें। Greater Noida News