Greater Noida News : क्या साफ बच जाएंगे हजार करोड़ रूपये के घोटाले के दोषी अफसर ?
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:15 AM
Greater Noida : ग्रेटर नोएडा। आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी। करे कोई, भरे कोई। अब योगी राज में यही कहावत इन दिनों यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) पर चरितार्थ हो रही है। प्राधिकरण ने कुछ लोगों को किसानों से ली गई अधिग्रहण दर से कम दर पर जमीन का आवंटन कर दिया। मामले का खुलासा होने पर अब सस्ती दर पर जमीन का आवंटन करने वाले दोषी अफसरों का तो कुछ नहीं बिगड़ रहा है। जबकि आवंटियों पर घाटे की राशि की भरपाई करने का नोटिस जारी किया गया है। जबकि इस कृत्य के लिए आवंटन करने वाले अफसर ही दोषी हैं।
हुआ यह कि वर्ष 2009 में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने सेक्टर-17 में मिनी स्पेशल इकॉनोमिक जोन की योजना निकाली थी। इसके लिए किसानों से 2670 रू0 प्रति वर्ग मीटर की दर से जमीन अधिग्रहण की गयी थ्ी। मगर कुछ अधिकारियों ने किसी बड़े लाभ व स्वार्थवश 13 लोगों को 1629 रू0 प्रति वर्ग मीटर की दर से जमीन आवंटित कर दी। यानी किसानों से अधिग्रहण दर से 1041 रूपये प्रति वर्ग मीटर गज दर से कम। जिसके कारण प्राधिकरण को 982.85 करोड़ रूपये का नुकसान हुआ। इसमें अब तक का लीज रैंट तथा ब्याज जोड़कर घाटे की यह रकम बढ़कर 2201.83 करोड़ रूपये हो गई।
मामले की जानकारी मिलने पर प्राधिकरण के तत्कालीन चेयरमैन प्रभात कुमार ने वर्ष 2018 में इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी। अब इस मामले में जांच रिपोर्ट के बाद न्याय विभाग ने प्राधिकरण के सीईओ डा. अरूणवीर सिंह को रिपोर्ट सौंप दी है। अब उक्त 2201.83 करोड़ रूपये की वसूली के लिए उन 13 आवंटियों को नोटिस जारी करके 15 दिनों में उक्त रकम जमा कराने के निर्देश दिये गये हैं।
लेकिन इस समूचे प्रकरण में उन दोषी अफसरों पर कोई भी कार्यवाही नहीं की गई जिन्होंने अधिग्रहण से भी कम दर पर 13 लोगों को जमीन का आवंटन कर दिया। लोगों का कहना है कि प्रथम दृष्टया इस कृत्य के लिए उन दोषी अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करके उनसे घाटे की रकम की भरपाई भी की जानी चाहिए। लेकिन हो रहा है ठीक इसके उलट।
बताया जाता है कि इस पूरे घोटाले को उस समय प्राधिकरण के सीईओ व चेयरमैन रहे ललित श्रीवास्तव (अब सेवानिवृत्त) के निर्देश पर अंजाम दिया गया था। उनकी टीम में उस वक्त प्राधिकरण के ओएसडी प्रवेन्द्र कुमार, नगर नियोजन श्रीमती लीनू सहगल तथा लेखपाल रणवीर सिंह जैसे चर्चित अफसर शामिल थे। यह प्रकरण गौतमबुद्धनगर जिले से लेकर लखनऊ तक चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि जिन कंपनियों को सस्ती जमीन बांटी गई थी उनसे वसूली का नोटिस तो ठीक है किन्तु इस पूरे घोटाले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्यवाही होगी कि नहीं? यदि कार्यवाही होगी तो कब होगी क्या होगी?