
Greater Noida News : यदि आप नोएडा अथवा ग्रेटर नोएडा में कोई प्रॉपर्टी, मकान, दुकान अथवा प्लॉट खरीद रहे हैं तो सावधान हो जाएं। इस क्षेत्र में अनेक ऐसे बिल्डर हैं जो अपने आपको बड़े बिल्डर होने के तमाम दावे करते हैं। सच यह है कि बिल्डर की आड़ में ये तथाकथित बिल्डर खरीददारों को ठग रहे हैं। अनेक बिल्डरों की ठगी के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। अब ताजा मामला अपने आपको प्रसिद्घ बिल्डर बताकर प्रचारित करने वाले Omaxe बिल्डर का सामने आया है।
ओमेक्स ग्रुप ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से बिना नक्शा पास कराए अपने ओमेक्स कनॉट प्लेस प्रोजेक्ट में कई लोगों को दुकानें बेच कर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी का खेल खेला है। अब धीरे-धीरे ओमेक्स ग्रुप के हाथों ठगे गए पीडि़त आगे आ रहे हैं। ऐसे ही तीन अलग-अलग पीडि़तों ने ओमेक्स बिल्डर के चेयरमैन रोहताश गोयल सहित कंपनी के 7 बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
जनपद गौतमबुद्धनगर के बिरौंडी चक्रसेनपुर निवासी रुमाल सिंह ने थाना सूरजपुर में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि उन्होंने 28 मई 2015 को ओमेक्स लिमिटेड के प्रोजेक्ट ओमेक्स कनॉट प्लेस बीटा-2 में एक दुकान अपने तथा अपनी पत्नी शशि के नाम से बुक की थी। बुकिंग की एवज में उन्होंने 18 लाख, 50 हजार 835 रूपये चेक के माध्यम से दिए थे इसके अलावा दुकान की शेष राशि 23 लाख 9 हजार 686 रूपये बीटा-2 स्थित ओमेक्स कनॉट प्लेस के कार्यालय पर ओमेक्स के चेयरमैन रोहताश गोयल, मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित गोयल, डायरेक्टर जतिन गोयल, विनीत गोयल गुरुनाम सिंह, विशाल जैन को चेक के माध्यम से दी थी।
बोर्ड के पदाधिकारियों ने 2 वर्ष के भीतर दुकान पर कब्जे का वादा किया था और 1 वर्ष के पश्चात उससे बिजली उपकरण, लीज रेंट, पावर बैकअप, मेंटेनेंस व बिजली मीटर के नाम पर 14 लाख 4 हजार 125 रूपये और वसूल कर लिए। रुमाल सिंह ने बताया कि ओमेक्स ग्रुप ने उससे 22 लाख 34 हजार 646 रूपये ले लिए। इस दौरान उसे पता लगा कि ओमेक्स बिल्डर के प्रोजेक्ट में दुकान का नक्शा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से स्वीकृत ही नहीं है। ओमेक्स में सैकड़ों लोगों को इस प्रकार फर्जी दुकानें बेंच दी हैं। मानसिंह ने आरोप लगाया कि ओमेक्स बोर्ड के पदाधिकारियों ने उसके साथ धोखाधड़ी कर उसके द्वारा जमा कराई गई रकम को भी हड़प कर लिया है।
वहीं ग्राम घोड़ी बछेड़ा निवासी मांगेराम पुत्र रघुवीर सिंह नेगी ने कंपनी के चेयरमैन रोहताश गोयल व बोर्ड के अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे में मांगेराम ने बताया कि उसने अपने व अपनी पत्नी पूनम देवी के नाम से एक दुकान बुक की थी। ओमेक्स बोर्ड के पदाधिकारियों ने उससे दुकान की बुकिंग व अन्य मदों में 18 लाख 10113 रुपए ले लिए। बाद में उसे पता चला कि उक्त दुकान का नक्शा प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं है। मांगेराम ने भी ओमेक्स बोर्ड के पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। तीसरा मामला रूमाल सिंह के पुत्र सुंदर सिंह ने दर्ज कराया है।
सुंदर सिंह का आरोप है कि उसने 22/05/2015 को ओमेक्स लिमिटेड के प्रोजेक्ट ओमेक्स NRI सिटी सेंटर स्थित NRI सिटी सेक्टर ओमेगा दो ग्रेटर नोएडा में एक दुकान संख्या 16 क्षेत्रफल 306.53 वर्ग फुट अप्पर ग्राउंड फ्लोर पर ओमेक्स में अपने व अपनी पत्नी सुमन के नाम से अंकन 1272609 / में बुक की थी और बुकिंग की एवज में अंकन 1272609/ चेक के माध्यम से ओमेक्स NRI सिटी सेंटर के कार्यालय पर ओमेक्स के बोर्ड के चेयरमैन रोहतास गोयल, मोहित गोयल मैनेजिंग डायरेक्टर, जतिन गोयल डायरेक्टर, विनीत गोयल डायरेक्टर, गुरु नाम सिंह डायरेक्टर, निशाल जैन डायरेक्टर को चेक के माध्यम से सौंपी थी। बोर्ड के पदाधिकारियों ने 2 वर्ष के अंदर दुकान पर कब्जे का वादा किया था।
इस प्रकार कुल मिलाकर प्रार्थी से ओमेक्स ने 12 लाख 72 हजार 609 रुपये प्राप्त कर लिए थे समय-समय पर प्रार्थी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर व ओमेक्स के बिजनेस हेड मनीष गर्ग व संजय से मिला तो बार-बार उन्होंने कब्जे के झूठे वादे किए और लगातार समय की मांग करते रहे। इसी बीच प्रार्थी को कुछ अन्य लोगों से जानकारी प्राप्त हुई कि प्रार्थी की दुकान का नक्शा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से स्वीकृत ही नहीं हैी। ओमेक्स ने प्रार्थी के साथ-साथ सैकड़ों लोगों को इस प्रकार फर्जी दुकान बेच दी है। ओमेक्स के चेयरमैन रोहतास गोयल, मोहित गोयल मैनेजिंग डायरेक्टर, जतिन गोयल डायरेक्टर, विनीत गोयल डायरेक्टर, गुरनाम सिंह डायरेक्टर, विशाल जैन डायरेक्टर मनीष गर्ग बिजनेस हेड, संजय बिजनेस हेड सहायक के द्वारा प्रार्थी के साथ 1272609/ की धोखाधड़ी की गई है। थाना प्रभारी अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि तीनों ही मुकदमे न्यायालय के निर्देश पर दर्ज किए गए हैं पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है।
ओमेक्स बिल्डर एक कंपनी का नाम है। इस कंपनी का संचालन रोहताश गोयल नाम का एक व्यापारी करता है। इस व्यक्ति ने अपने परिजनों के साथ मिलकर छोटी-मोटी ठेकेदारी के लिए Omaxe कंपनी का गठन किया था। देखते-देखते ही इस कंपनी ने खूब धन कमाया। धीरे-धीरे ये कंपनी एक बड़े बिल्डर समूह में तब्दील हो गई। कंपनी के खिलाफ ठगी व धोखाधड़ी के 100 से भी अधिक केस देश के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। आरोप है कि कंपनी के कर्ता-धर्ता अपने धन व संपर्कों के बल पर ठगी के सभी मामलों को दबाए हुए हैं। Greater Noida News