Greater Noida : ग्रेटर नोएडा शहर की एक सरकारी कालोनी में सरकारी जमीन पर मंदिर बनाने का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। इस सरकारी कालोनी में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारी रहते हैं। ग्रेटर नोएडा शहर के लगभग तीन दर्जन नागरिकों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रवि कुमार एन.जी. को पत्र लिखकर सरकारी जमीन पर मंदिर के निर्माण को रूकवाने की मांग की है। नागरिकों ने आशंका व्यक्त की है कि मंदिर के निर्माण से इस क्षेत्र में तनाव व टकराव पैदा हो सकता है।
आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा शहर के तीन दर्जन नागरिकों के हस्ताक्षर से युक्त एक पत्र ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रवि कुमार एन.जी. को सौंपा गया है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्रेटर नोएडा की सरकारी कालोनी में अवैध रूप से मंदिर बनाया जा रहा है। इस मंदिर के निर्माण से पूरी कालोनी में तनाव व टकराव का वातावरण बन गया है। पत्र में इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की गई है।
ग्रेटर नोाएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एन.जी. को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा सैक्टर ईटा-1 में प्राधिकरण के कर्मचारियों के निवास के लिए स्टाफ कॉलोनी का निर्माण किया गया है। जिसमें प्राधिकरण के अधिकारी, कर्मचारी के अतिरिक्त अन्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी निवास करते हैं। अन्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा टाईप-2 के भवनों के सामने एक मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। जिसके बारे में प्राधिकरण के अधिकारियों को कई बार लिखित व मौखिक रूप से बताया गया कि यह एक सरकारी कॉलोनी है, इसमें प्राधिकरण की बिना अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य अवैध है किन्तु परियोजना विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से यहाँ पर अवैध निर्माण कार्य (मंदिर निर्माण) प्रगति पर है।
सीईओ को लिखे पत्र में कहा गया है कि स्टाफ कॉलोनी में सभी समुदाय के लोग निवास करते हैं तथा हर व्यक्ति किसी न किसी धर्म में आस्था रखते है। यदि हर समुदाय का व्यक्ति अपने-अपने धर्म के अनुसार मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारा आदि का निर्माण करने लगेगा तो कॉलोनी में साम्प्रदायिक माहौल बिगड़ने की प्रबल संभावना है तथा आपस में लडाई व झगडा भी हो सकता है। इसलिए कालोनी में अवैध रूप से बनाए जा रहे मंदिर के निर्माण को तुरंत रूकवाया जाए तथा परियोजना विभाग के जिन अधिकारियों की इसमें मिलीभगत है उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।